जानें क्या होता है इंफेंट्री कॉम्बैट व्हीकल, कैसे करता है दुश्मनों को नेस्तनाबूद

आत्मनिर्भर भारत अभियान और मेक इन इंडिया के तहत कुल 1750 फ्यूचरिस्टिक इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल भारतीय सेना को लेने हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

सेना (Indian Army) की तरफ से जो आरएफआई यानी रिक्वेस्ट फॉर इंट्रस्ट जारी की गई है उसमें जिक्र है कि ये ऐसे फ्यूचरिस्टिक इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल हों, जिनका इस्तेमाल नॉर्दर्न बॉर्डर यानी कि लद्दाख, सेंट्रल सेक्टर और सिक्किम के इलाके में आसानी से किया जा सके.

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नई दिल्ली. चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच भारत ने LAC पर भारी भरकम टैंकों और इंफेंट्री कॉम्बैट व्हीकल की तैनाती कर दी थी. लेकिन सेना के व्हीकल अब पुराने पड़ चुके हैं. समय-समय पर हुए तकनीकी बदलाव के बावजूद अब लड़ाई के मौजूदा स्वरूप में ये व्हीकल पुराने पड़ चुके हैं. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए भारतीय सेना ने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी है. इसी के मद्देनजर सेना ने नए अत्याधुनिक इंफेंट्री कॉम्बैट व्हीकल के लिए बुधवार को टेंडर जारी कर दिया.

आत्मनिर्भर भारत अभियान और मेक इन इंडिया के तहत कुल 1750 फ्यूचरिस्टिक इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल भारतीय सेना को लेने हैं. ये फ्यूचरिस्टिक इंफेंट्री कॉम्बैट व्हीकल अस्सी के दशक के कॉम्बैट व्हीकल BMP-2 की जगह लेंगे. सेना की तरफ से जो आरएफआई यानी रिक्वेस्ट फॉर इंट्रस्ट जारी की गई है उसमें जिक्र है कि ये ऐसे फ्यूचरिस्टिक इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल हों, जिनका इस्तेमाल नॉर्दर्न बॉर्डर यानी कि लद्दाख, सेंट्रल सेक्टर और सिक्किम के इलाके में आसानी से किया जा सके.

असल काम जंग के मैदान में सैनिकों को दुश्मन की गोलाबारी से बचाते हुए आगे बढ़ाना
दरअसल इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल का असल काम जंग के मैदान में सैनिकों को दुश्मन की गोलाबारी से बचाते हुए आगे बढ़ाना है. आसान भाषा में अगर कहें तो लड़ाई के दौरान टैंक फॉर्मेशन के साथ ये मैकेनाइज्ड इंफैंट्री के व्हीकल मूव करते हैं. जब टैंक के जरिए दुश्मन के टैंकों को ध्वस्त कर दिया जाता है तो इन्हीं इंफेंट्री कॉम्बैट व्हीकल में सवार सैनिक दुश्मन के इलाकों में घुसते हैं और उन इलाकों पर कब्जा करते हैं.

रॉकेट और एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल दागने की खूबी होगी
इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल में न सिर्फ सैनिकों का प्रोटेक्शन होता है बल्कि दुश्मन के इलाके में घुसते वक्त इसमें लगी मशीन गन से फायर भी किया जाता है. कुछ तकनीकी बदलाव करके अब तक पुरानी कॉम्बैट व्हीकल को इस्तेमाल किया जा रहा है. अब फ्यूचरिस्टिक इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल में लंबी दूरी तक मार करने वाली मशीन गन के साथ रॉकेट और एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल दागने की खूबी होगी. वो आसानी से दुश्मन के टैंक को भी नष्ट कर सकेगा.

ये भी होंगी खूबियां
साथ ही कम ऊंचाई पर उड़ने वाले दुश्मन के हेलिकॉप्टर को नष्ट करने के लिए प्लेटफॉर्म का भी काम करेगा. ये कॉम्बैट व्हीकल ऑल टेरेन एमफीबीयस होगा जो की जमीन और पानी में भी आसानी से दौड़ सके. साथ ही 40-45 डिग्री लेकर माइनस 20 डिग्री वाले इलाकों में पूरी क्षमता से काम करे. 32 साल से कम इसकी ऑपरेशनल लाइफ नहीं होनी चाहिए. साथ ही इस व्हीकल की सड़क पर 70 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा और रेगिस्तान में 35 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा और सड़क पर रिवर्स स्पीड 20 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा हो.

साथ ही कम से कम 75-100 कॉम्बेट व्हीकल हर साल भारतीय सेना को सप्लाई करना होगा. यही नहीं व्हीकल में आसानी से ट्रेन की बोगी में चढ़ाकर एक जगह से दूसरी जगह तक ले जा सकने की खासियत होगी. बहरहाल एक हफ्ते के भीतर इस फ्यूचरिस्टिक इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल की आरएफआई पर अपना जवाब देना होगा.

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