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क्या है Hybrid Dating? क्या हैं इसके फायदे और क्या आती हैं इसमें दिक्कतें, जानिए पूरी डिटेल

क्या है Hybrid Dating? क्या हैं इसके फायदे और क्या आती हैं इसमें दिक्कतें, जानिए पूरी डिटेल

जिस तरह आज दफ्तरों में हाइब्रिड तरीके से काम किया जाने लगा है, उसी तरह अब हाइब्रिड डेटिंग का चलन भी बढ़ रहा है. (Shutterstock)

जिस तरह आज दफ्तरों में हाइब्रिड तरीके से काम किया जाने लगा है, उसी तरह अब हाइब्रिड डेटिंग का चलन भी बढ़ रहा है. (Shutterstock)

Hybrid dating: हाइब्रिड डेटिंग में ऑनलाइन चैट और वीडियो कॉल के जरिए भी रोमांस होता है और फिजिकली मिलकर भी एक-दूसरे के साथ प्यार की अठखेलियां खेली जाती हैं. यह ठीक वैसा ही ही है जैसे आजकल दफ्तर का काम है. कुछ दिन दफ्तर जाकर जबकि कुछ दिन ऑनलाइन करते हैं. अब कोरोना काल में हाइब्रिड डेटिंग का चलन भी बढ़ रहा है.

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    नई दिल्ली. कोरोना (Corona) के कहर ने हमारे जीवन को हर तरह से प्रभावित किया है. 2020 में जब कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ने लगी तो दुनिया भर में लॉकडाउन लगाए जाने लगा. कुछ ही समय में पूरी दुनिया की रफ्तार थमने लगी. लोग अपने-अपने घरों में कैद हो गए. एक-दूसरे से संपर्क साधने के इतने मशीनी संसाधनों के बावजूद कई रिश्ते दरकने लगे. रोमांस के जो कोपलें नई-नई फूंटी थीं, वह एक तरह से खत्म हो गई. अब लॉकडाउन नहीं है लेकिन कोरोना हमारे जीवन से गया नहीं है. ऐसे में अब भी कई तरह की पाबंदियां हैं. इस स्थिति में रोमांस के नए-नए तरीके इजाद होने लगे हैं. हाइब्रिड डेटिंग रोमांस का एक नया तरीका है. जिस तरह आज दफ्तरों में हाइब्रिड तरीके से काम किया जाने लगा है, उसी तरह अब हाइब्रिड डेटिंग का चलन भी बढ़ रहा है.

    क्या है हाइब्रिड डेटिंग
    हाइब्रिड डेटिंग में ऑनलाइन चैट और वीडियो कॉल के जरिए भी रोमांस होता है और फिजिकली मिलकर भी एक-दूसरे के साथ प्यार की अठखेलियां खेली जाती हैं. यह ठीक ऐसा ही है जैसे आजकल दफ्तर का काम है. लोग सप्ताह में कुछ दिन दफ्तर में बैठकर काम करते हैं जबकि कुछ दिन ऑनलाइन घर से ही काम कर लेते हैं. कोरोना काल में ऐसे कई डेटिंग एप सामने आ गए हैं जिनपर युवा जोड़ें अपने इस नए तरीके को आजमाने में लगे हैं. सीधे शब्दों में कहे तो फिजिकली रोमांस के साथ-साथ जब वर्चुअल रोमांस भी जुड़ जाए तो यह हाइब्रीड रोमांस या डेट है. हाइब्रिड डेटिंग के अपने फायदे और चुनौतियां भी हैं.

    क्यों जरूरत पड़ी
    दरअसल, कोरोना संक्रमण की रफ्तार को कई ठिकाना नहीं है. कब इसकी रफ्तार बढ़ जाए और कब घट जाए, कोई नहीं कह सकता. इसलिए सबके मन में यह डर रहता है कि बाहर ज्यादा निकलने से कहीं संक्रमण न हो जाए. यही कारण है कि युवा अपना कुछ पल अपने पार्टनर के साथ बाहर फिजिकली बिताना चाहते हैं जबकि बाकी समय में वह ऑनलाइन का सहारा लेते हैं.

    हाइब्रिट डेटिंग की चुनौतियां
    हम सबको पता है कि कोरोना के खत्म होने के अभी कोई आसार नहीं है. ऐसे में हमेशा डर बना रहता है कि बाहर जाने से कहीं परेशानी न हो जाएं. हालांकि अधिकांश जोड़ें ऑनलाइन चैट से अपना रोमांस जारी रखे हुए हैं. लेकिन दिक्कत तब होती है जब किसी एक को कोरोना हो जाए. इसके अलावा इस रिश्ते को कायम रखना भी मुश्किल हो जाता है. कोरोना के कारण लोगों का धैर्य कम हुआ है. लोग बाहर जाकर घूमना-फिरना चाहते हैं. ऐसे में अगर रोज-रोज या सप्ताह में दो-तीन दिन अगर पार्टनर नहीं मिलें तो खींझ पैदा होने लगती है. इससे रिश्तों में खटास आ सकती है. हाइब्रिड डेटिंग में एक तरह से वहीं दिक्कत है जो ऑनलाइन डेटिंग में होती है. मजबूत प्यार के लिए भावनात्मक आदान प्रदान बहुत जरूरी है लेकिन अपेक्षाकृत ज्यादा दिनों में मिलने से ऐसा नहीं हो पाता. बाद में यह मशीनी डेटिंग लगने लगती है.

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