क्या है PM 10 और 2.5, कैसे पहुंचाता है नुकसान?

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पीएम 2.5 बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. इससे आंख, गले और फेफड़े की तकलीफ बढ़ती है.

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  • Last Updated: October 20, 2017, 4:59 PM IST
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दिवाली पर बढ़े प्रदूषण को लेकर एक बार फिर चर्चा छिड़ गई है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया है कि हवा में घुले खतरनाक सूक्ष्म कण पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा काफी बढ़ गई.

ये खतरनाक कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि सांस के जरिए ये हमारे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं. आईए हम जानते हैं कि पीएम 10 और 2.5 है क्या, यह हमें कैसे नुकसान पहुंचाता है?

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम 10 को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर कहते हैं. इन कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर होता है. इससे छोटे कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या कम होता है. इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. पीएम 10 और 2.5 धूल, कंस्‍ट्रक्‍शन और कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ता है.



आमतौर पर लोग पीएम 2.5 के बारे में नहीं जानते, लेकिन इससे बचाव के लिए इस खतरनाक कण के बारे में जानना बेहद जरूरी है. पीएम 2.5 हवा में घुलने वाला छोटा पदार्थ है. पीएम 2.5 का स्तर ज्यादा होने पर ही धुंध बढ़ती है. विजिबिलिटी का स्तर भी गिर जाता है.
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सांस लेते वक्त इन कणों को रोकने का हमारे शरीर में कोई सिस्टम नहीं है. ऐसे में पीएम 2.5 हमारे फेफड़ों में काफी भीतर तक पहुंचता है. पीएम 2.5 बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. इससे आंख, गले और फेफड़े की तकलीफ बढ़ती है. खांसी और सांस लेने में भी तकलीफ होती है. लगातार संपर्क में रहने पर फेफड़ों का कैंसर भी हो सकता है.

कितना होना चाहिए पीएम 10 और पीएम 2.5

पीएम 10 का सामान्‍य लेवल 100 माइक्रो ग्राम क्‍यूबिक मीटर (एमजीसीएम) होना चाहिए. जबकि दिल्ली में यह कुछ जगहों पर 1600 तक भी पहुंच चुका है. पीएम 2.5 का नॉर्मल लेवल 60 एमजीसीएम होता है लेकिन यह यहां 300 से 500 तक पहुंच जाता है.

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