लाइव टीवी

जेपी नड्डा को इसलिए चुना गया बीजेपी अध्यक्ष, ये सारी बातें बनाती हैं उन्हें ख़ास

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: February 12, 2020, 5:30 PM IST

दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी BJP के शीर्ष पद पर पहुंचने वाले जेपी नड्डा (JP Nadda) की शख्सियत और राजनीति में दम खम है. छात्र राजनीति, विद्यार्थी परिषद, हिमाचल प्रदेश में विधायकी और मंत्री पद और फिर अध्यक्ष बनने के बाद नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) जब उन्हें दिल्ली लेकर आए तो फिर उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 12, 2020, 5:30 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. पटना (Patna) में जन्मे और बिहार (Bihar) की मिट्टी से छात्र राजनीति का सबक लेने वाले जगत प्रकाश नड्डा बीजेपी के शीर्ष तक पहुंचेंगे इसका अंदाजा तो शायद कोई नहीं लगा सकता था. लेकिन इससे एक बात तो पुख्ता हो गई कि एक सामान्य कार्यकर्ता भी अपनी लगन और मेहनत से पार्टी का अध्यक्ष (President) बन सकता है. एक से बढ़कर एक चुनौतियां हैं नड्डा साहेब के सामने. एक तो पीएम मोदी (PM Modi) और अमित शाह (Amit Shah) के साथ कंधे से कंधा मिला कर आगे बढ़ना है और साथ ही अटल, आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे की विरासत को ऊंचाइयों तक भी ले जाना है.

जाहिर है जब वो दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के शीर्ष पद पर पहुंचे हैं तो जेपी नड्डा की शख्सियत और राजनीति में दम खम रहा होगा. धीरे-धीरे छात्र राजनीति (Student Politics), विद्यार्थी परिषद, हिमाचल प्रदेश में विधायकी और मंत्री पद और फिर अध्यक्ष (President) बनने के बाद नितिन गडकरी जब उन्हें दिल्ली लेकर आए तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. आखिर नड्डा में ऐसी क्या खूबियां हैं ? हम सिलसिलेवार इससे परत हटाने की कोशिश करते हैं.

सरल स्वभाव
मृदु भाषी जेपी नड्डा अपने सरल स्वभाव के कारण कार्यकर्ताओं और नेताओं से लगातार संवाद बनाकर रखते हैं. राजनीति जीवन की शुरुआत से ही संवाद बनाए रखने की कला ही उन्हें तमाम मसले सुलझाने में मदद देती आयी है. चाहे बीजेपी (BJP) का कोई भी कार्यकर्ता हो या फिर पदाधिकारी जो भी उनसे मिलता है उनसे गर्मजोशी से मिलना और उनके नाम याद रखना उनकी खासियत है. तभी तो कोई भी उनसे मिलने जाए उसे सम्मान देकर और उन्हें नाम से बुलाकर उन्हें अभिभूत कर जाते हैं.

संवाद बनाए रखने की कला में माहिर
मोदी सरकार में बतौर स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की संवाद की इसी कला ने आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat) जैसी महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने में सफलता दिलाई थी. जब विपक्ष शासित राज्य और हॉस्पिटल्स इस पर सवाल उठा रहे थे तब नड्डा लगे रहे सबसे बात कर उन्हें आश्वस्त करने में. योजना लागू भी हुई और लाखों की संख्या में गरीब इलाज का फायदा उठा रहे हैं.

मृदुभाषी यानी मीठा बोलने की उनकी कला 2019 के लोक सभा चुनावों, यूपी के विधान सभा चुनावों (UP Assembly Elections) में काम आयी. जब सहयोगी दल और जिनके टिकट काटने थे सब तलवार ताने खड़े थे. लेकिन बवाल नही हुआ न कोई खबर बाहर आई. दिन रात प्रभारी नड्डा लगे रहे. किसी को मनाया. किसी को बिठाया. और नतीजा लोगों के सामने था.उम्मीद है कि संवाद बनाए रखने की ये कला आने वाले दिनों में बीजेपी (BJP) को आगे ले जाएगी.



फिजूल की बयानबाजी नहीं करते
नड्डा की शख्सियत का ये एक ऐसा पहलू है जो उन्हें आला नेताओं का भी प्रिय बनाता है. चाहे वो किसी के साथ आमने सामने बात हो या फिर कोई गंभीर बैठक. नड्डा का रिकॉर्ड रहा है कि वो कोई भी बात न बाहर करते हैं और न ही इधर की बात उधर करते हैं. जो कमिटमेंट पार्टी (Party) के लिए है वो किसी से कम नहीं है.

6 महीने हो गए कार्यकारी अध्यक्ष बने लेकिन उन्होंने किसी भी प्रेस को इंटरव्यू (Interview) नहीं दिया. न ही कोई बयान दिया जिससे विवाद पनपे. सिर्फ पार्टी के प्लेटफार्म पर बोलते रहे. यही बात तो पीएम मोदी बार बार अपने बयानवीरों को कहते है कि फिजूल बोलने से बचो. यही उदाहरण तो पार्टी अध्यक्ष के तौर जेपी नड्डा अपने कार्यकर्ताओं के सामने पेश करेंगे. फिजूल की बयानबाजी से अपने नेताओं को रोकना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगा.

व्यर्थ का तनाव अपने सिर नहीं लेते
चाहे कोई भी संगठन या सरकार (Government) से संबंधित कोई परेशानी सामने आ जाए, किसी भी बात को वो दिल पर नहीं लेते हैं. सिर्फ और सिर्फ उस समस्या का हल निकलने की कोशिश में लग जाते हैं. इधर की बात उधर न करना उनका मूल स्वभाव है तो उसके साथ-साथ चुगलियों से कन्नी काटने में भी वो माहिर हैं. इसलिए किसी के बहकावे में आए बिना पूरी पार्टी के साथ आगे बढ़ने की कला में सक्षम हैं.

नियमों और कायदों पर चलना
पार्टी लाइन से नहीं भटकना, हर वक़्त नियमों का पालन करना उनकी शख्शियत के अटूट हिस्से हैं. इस लिए जिस रोल में रहे उसके बाहर के मुद्दों पर कभी बात नही की. उनके इसी कमिटमेंट के कारण गडकरी, राजनाथ, अमित शाह सरीखे अध्यक्षों की टीम के अभिन्न हिस्से बने रहे और पीएम मोदी (PM Modi) की कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री. उनकी बेदाग छवि का ही असर था कि पीएम मोदी ने उन पर भरोसा करते हुए उन्हें इतना बड़ा पद सौंपा.

लड़ाई लंबी है. चुनावी हारों के बाद सवाल उठने लगे है. लेकिन नड्डा बेफिक्र हैं. वो जानते हैं कि उनके स्वभाव से अपनों के साथ सख्त विरोधियों का दिल भी जीत लेंगें.

यह भी पढ़ें: सीएम योगी अखिलेश का तंज- हमारे बाबा मुख्यमंत्री बहुत अच्छे हैं, सिर्फ...

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 20, 2020, 4:52 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर