लाइव टीवी

क्या है कोरोना वायरस का Cluster Transmission और भारत इसको रोकने के लिए क्या कर रहा है!

News18Hindi
Updated: March 27, 2020, 9:29 AM IST
क्या है कोरोना वायरस का Cluster Transmission और भारत इसको रोकने के लिए क्या कर रहा है!
देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

अथॉरिटीज़ लॉकडाउन, संपर्कों का पता लगाकर, अलग रहकर और जांच से यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि इस बीमारी का फैलाव न्यूनतम हो, वे ऐसे सीमित क्षेत्रों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं जहाँ संक्रमण ज़्यादा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 27, 2020, 9:29 AM IST
  • Share this:
(निखिल घानेकर)


नई दिल्ली. भारत में जैसे-जैसे कोविड-19 (Covid-19) के मामले बढ़ रहे हैं, केंद्र और राज्यों में अथॉरिटीज़ का पूरा ध्यान नोवेल कोरोना वायरस के समूह संक्रमण (cluster transmission) को फैलने से पहले ही रोक देने पर है ताकि यह सामुदायिक संक्रमण (community transmission) का रूप न ले. लेकिन यह समूह संक्रमण है क्या? अभी तक देश में इसके कहां होने का पता चला है? और अथॉरिटीज़ कैसे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस बीमारी का फैलाव न्यूनतम हो? हम यहां इन सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगे.

समूह संक्रमण (क्ल्स्टर ट्रांसमिशन) का क्या मतलब है?



विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने समूह संक्रमण की कोई परिभाषा नहीं दी है. हालांकि, उसने इसका प्रयोग संक्रमण के आकार को बताने के लिए किया है, सरकारी बोलचाल की भाषा में इसने अन्य शब्द समूहों का प्रयोग भी किया है जैसे आयातित मामले (imported cases), स्थानीय संक्रमण (local transmission) और सामुदायिक संक्रमण (community transmission). समूह संक्रमण का प्रयोग भारतीय अथॉरिटीज़ ने ऐसे संक्रमण की पहचान के लिए किया है जो सीमित क्षेत्र में, अमूमन परिवार के अंदर या विस्तृत सर्कल (extended circle) तक सीमित हो.

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) का कहना है, 'अगर किसी परिवार का कोई एक व्यक्ति विदेश गया है और वह परिवार के दूसरे सदस्यों को संक्रमित करता है या अपने परिवार के बाहर परिवार से जुड़े दूसरे लोगों को संक्रमित करता है तो इसे समूह संक्रमण कहा जा सकता है. इस स्थिति में, संक्रमण का स्रोत मालूम है और अगर परिवार के बाहर का कोई व्यक्ति संक्रमित होता है तो इसका पता लगाया जा सकता है'.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 'सामुदायिक संक्रमण वह है जिसमें हम बड़ी संख्या में पुष्ट मामलों (confirmed cases) को संक्रमण के चेन से जोड़ नहीं पाते हैं, या सांस नली से लिए गए नमूने की किसी प्रतिष्ठित प्रयोगशाला में व्यवस्थित रूटीन जांच के माध्यम से बढ़ते पॉज़िटिव मामलों की पुष्टि नहीं कर पाते'. फिर, उसके अनुसार, स्थानीय संक्रमण वह है जिसमें संक्रमण का स्रोत रिपोर्टिंग लोकेशन के अंदर ही है.

जब WHO के महानिदेशक टेडरोस अधनोम घेबरेएसस ने घोषणा की कि Covid-19 वैश्विक महामारी है, उन्होंने कहा, 'अगर कोई देश इस मामले के संक्रमण को रोकने के लिए बीमारी की पहचान, इसकी जांच, इसका इलाज, इसको अलग-थलग करता है, इसका पता लगाता है, और अपने लोगों को इसके ख़िलाफ़ लड़ने के लिए तैयार करता है तो उस स्थिति में जहां Covid-19 के मामले बहुत कम होते हैं, वहां वह इस बीमारी को समूह का रूप लेने और इसके फिर समुदाय संक्रमण में बदलने से रोक सकते हैं'.
क्या भारत में समूह संक्रमण हुए हैं?
हां. दिल्ली में उन मरीज़ों का मामला जो इटली से लौटे, केरल का पथनमथित्ता मामला, केरल के उस दंपति का मामला जो हवाई अड्डे पर स्क्रीनिंग से बचकर निकल गए, भीलवाड़ा अस्पताल का मामला और तेलंगाना डीएसपी के बेटे के मामले को समूह संक्रमण का मामला कहा जा सकता है. ये संक्रमण या तो एक ही विशेष भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित होते हैं या फिर यह ऐसे व्यक्ति के इधर-उधर जाने से जुड़े हैं जिसमें संक्रमण के लक्षण हैं, जिसके कारण अन्य लोगों में संक्रमण फैला.

हम पथनमथित्ता के मामले को लें. इस परिवार में तीन लोग हैं -पति, पत्नी और उनका 24 साल का बेटा जो इटली से 29 फ़रवरी को लौटा. पथनमथित्ता के रन्नी के रहनेवाले इस परिवार ने कोच्चि हवाईअड्डे पर स्क्रीनिंग के दौरान अपनी विदेश यात्रा के बारे में साफ़-साफ़ नहीं बताया. हवाईअड्डे पर उनकी बेटी और दामाद उनको लेने आया था. बाद में, पथनमथित्ता में वे अपने बूढ़े मां-बाप और चार अन्य रिश्तेदारों से मिले जिनमें से दो कोट्टायम के थे.

परिवार के सभी आठ सदस्य जो इटली से वापस आनेवाले इस तीन-सदस्यीय परिवार के संपर्क में आए, उनमें कोविड-19 के वायरस पाए गए. परिवार के इन सभी सदस्यों को अलग-थलग रखा गया.

हालांकि, केरल सरकार ने बताया कि इससे पहले कि उनके संक्रमित होने का पता चलता, तीन लोगों का यह परिवार कुछ सार्वजनिक स्थलों पर भी गया था. इस परिवार ने जिन स्थानों का दौरा किया अथॉरिटीज़ ने उनके रूट को सही क्रम में नक़्शे पर चिह्नित किया. फिर इस रूट मैप को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया गया और पथनमथित्ता के लोगों से सार्वजनिक अपील की गई कि अगर वे इन स्थलों पर मौजूद थे, जहां पर इटली से लौटे इस परिवार के सदस्य गए थे तो वे राज्य के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें.

केरल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कई लोग सामने आए, जिन्होंने बताया कि वे उन स्थानों पर मौजूद थे, पर सौभाग्य से जिन घरों में यह परिवार गया था उन पर तीव्र निगरानी की वजह से किसी भी व्यक्ति में इस वायरस का संक्रमण नहीं पाया गया है.

समूह संक्रमण को रोकने के लिए राज्य सरकारें किस तरह का क़दम उठाती हैं?
इस वायरस को ज़्यादा लोगों तक फैलाने से रोकने के लिए राज्य सरकारें सूक्ष्म योजना (micro plan) पर अमल करते हैं. इस योजना के तहत एक रोकथाम ज़ोन की पहचान की जाती है, जिसका निर्णय उन व्यक्तियों के संपर्कों के आधार पर होता है जिनमें वायरस के लक्षण पाए गए हैं और यह उनके संपर्कों के विस्तार पर निर्भर करता है. अगर संपर्कों का पता लगाने में एक दिन से ज़्यादा का समय लगता है, तो संक्रमित होनेवाले व्यक्तियों के आवास के इर्द गिर्द तीन किलोमीटर के क्षेत्र को चिह्नित किया जाता है.

फिर अतिरिक्त रूप से, पांच किलोमीटर रेडियस और अगर यह ग्रामीण क्षेत्र है तो सात किलोमीटर के इलाक़े की बफ़र जोन के रूप में चिह्नित किया जाता है, जो समूह रोकथाम योजना के तहत आता है.

एक आदर्श स्थिति में, आशा हेल्थ वर्कर्स और सहायक नर्स मिडवाइफ़ हेल्थ वर्कर्स को रोकथाम क्षेत्र के तहत आने वाले घरों में जाना होता है और उनको संदिग्ध (suspect) मामलों का पता करना होता है, उनके संपर्कों का पता लगाना होता है और लोगों में इस संक्रमण को रोकने, घर में ही बंद रहने और संक्रमण के आम लक्षणों के बारे में जानकारी फैलानी होती है.

यह भी पढ़ें:  कोरोना: महिला ने लगाई छींक तो दुकानदार ने फेंक डाले 26 लाख रुपये के समान

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 27, 2020, 9:08 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर

भारत

  • एक्टिव केस

    5,218

     
  • कुल केस

    5,865

     
  • ठीक हुए

    477

     
  • मृत्यु

    169

     
स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
हॉस्पिटल & टेस्टिंग सेंटर

दुनिया

  • एक्टिव केस

    1,151,274

     
  • कुल केस

    1,603,428

    +355
  • ठीक हुए

    356,440

     
  • मृत्यु

    95,714

    +22
स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
हॉस्पिटल & टेस्टिंग सेंटर