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ध्वजारोहण और झंडा फहराने में क्या है अंतर? राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के झंडा फहराने को क्या कहा जाता है?

ध्वजारोहण और झंडा फहराने में क्या है अंतर? राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के झंडा फहराने को क्या कहा जाता है?

भारतीय तिरंगा ( फाइल फोटो)

भारतीय तिरंगा ( फाइल फोटो)

Republic Day 2022 : स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के अवसर पर जब राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं तब उसे ध्वजारोहण (Flag Hoisting) कहते हैं और वहीं जब गणतंत्र दिवस (Republic Day) के दौरान झंडा लहराते है तब केवल फहराना (Flag Unfurling) कहते हैं.

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हाइलाइट्स

भारत की आजादी का 75 वर्ष पूरा होने जा रहा है
राष्ट्रपति ने 1950 में पहली बार तिरंगा फहराया.
1950 से पहले जवाहरलाल नेहरू ध्वजारोहण करते थे

नई दिल्ली. इस साल देश की आजादी को 75 वर्ष पूरा होने जा रहे हैं. इस महत्वपूर्ण अवसर पर पूरे हिंदुस्तान में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. लोग हर घर तिरंगे का अभियान चला रहे है, धूमधाम से तैयारियां कर रहे हैं.

हर भारतीय को अपने तिरंगे के बारे में जान लेना चाहिए. हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को तिरंगा फहराया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों दिनों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने में क्या अंतर है?

जानिए क्या है अंतर
स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के अवसर पर जब राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं तब उसे ध्वजारोहण (Flag Hoisting) कहते हैं और वहीं जब गणतंत्र दिवस (Republic Day) के दौरान झंडा लहराते है तब केवल फहराना (Flag Unfurling) कहते हैं. इसके साथ-साथ जगह में भी अंतर होता है, बता दें कि स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम लाल किले पर आयोजित किया जाता है और इस दिन प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं. वहीं, गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम राजपथ पर होता है जहां राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं.

26 जनवरी को ही राष्ट्रपति क्यों फहराते हैं ध्वज?
1950 से पहले प्रधानमंत्री राज्य के मुखिया हुआ करते थे, इसलिए,पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण करते थे. 1950 में जब संविधान लागू हुआ तब भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Rajendra Prasad) ने अपना कार्यभार संभाला, तब उन्होंने 1950 में पहली बार तिरंगा फहराया.

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क्या भारतीय नागरिक राष्ट्रीय ध्वज अपने घरों पर फहरा सकते है?
इसका जवाब हां है, लेकिन कुछ नियम भी हैं. भारतीय ध्वज संहिता 2002 में कहा गया है कि सार्वजनिक, निजी संगठन या शैक्षणिक संस्थान का कोई सदस्य सभी दिनों और अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है या प्रदर्शित कर सकता है जब तक ध्वज सम्मान के अनुरूप हो. लेकिन जुलाई में, ध्वज संहिता के विशिष्ट खंड में बदलाव हुए है जिसमें बताया गया है कि अब सूर्यास्त के बाद तिरंगे को नहीं फहराया जा सकता.

Tags: 75th Independence Day, Amrit Mahotsav of Azadi

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