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कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच क्यों है जमीन की लड़ाई? 5 पॉइंट्स में समझें पूरा विवाद

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और कर्नाटक के सीएम बीएस येडियुरप्पा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और कर्नाटक के सीएम बीएस येडियुरप्पा

उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने कहा था कि मामला सुलझने तक विवादित इलाकों को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए. इसके बाद कर्नाटक के डिप्टी सीएम लक्ष्मण सवादी (Laxman Savadi) ने मुंबई को अपने राज्य का हिस्सा बनाने या केंद्र शासित राज्य बनाने की सलाह दे डाली.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 8:57 PM IST
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नई दिल्ली. एक कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कह दिया था कि कर्नाटक (Karnataka) के कुछ मराठी बहुल क्षेत्रों को राज्य में मिलाने के लिए सरकार कोशिश कर रही है. इसके बाद से ही दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद (Border Dispute) एक बार फिर खड़ा हो गया है. हालांकि, महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच यह तनाव दशकों से चला आ रहा है. बेलगाम और दूसरे सीमावर्ती इलाकों से जुड़ा यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी सालों से लंबित है.

ठाकरे के बयान से उठी चिंगारी
उद्धव ठाकरे ने कहा था कि मामला सुलझने तक विवादित इलाकों को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए. इसके बाद कर्नाटक के डिप्टी सीएम लक्ष्मण सवादी ने मुंबई (Mumbai) को अपने राज्य का हिस्सा बनाने या केंद्र शासित राज्य बनाने की सलाह दे डाली. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ठाकरे के बयानों की वजह से दोनों राज्यों के बीच जुबानी जंग शुरू हुई है. इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि बेलगावी, करवर और निपाणी इलाकों को महाराष्ट्र में मिलाने की जरूरत है. क्योंकि यह बालासाहब ठाकरे का सपना था.

महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच सीमा विवाद
स्टेट्स रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट 1956 (States Reorganisation Act of 1956) में बेलगाम (Belgaum) और बॉम्बे राज्य के 10 तालुकों को तब के मैसूर राज्य में मिला दिया गया था. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि राज्यों को भाषाई और प्रशासनिक रेखाओं के आधार पर बांटा गया था. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में कई सालों से अटका हुआ है.





यह भी पढ़ें: कर्नाटक डिप्टी CM का उद्धव को जवाब- मुंबई को हमारे राज्य में शामिल किया जाए

आखिर दोनों राज्य क्या दावे कर रहे हैं?
महाराष्ट्र भाषाई आधार पर कर्नाटक के कुछ हिस्सों- बेलगावी, करवर और निपाणी को अपने राज्य में शामिल करने की मांग कर रहा है. राज्य का कहना है कि इन इलाकों में मराठी बोलने वालों की संख्या ज्यादा है.

वहीं, कर्नाटक का कहना है कि बेलगावी राज्य का अभिन्न हिस्सा है, जिसने बेंगलुरु में राज्य सचिवालय सुवर्ण विधान सौधा का निर्माण किया है. यहां साल में एक बार विधान सत्र आयोजित किया जाता है. राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा (BS Yediyurappa) भी कह चुके हैं कि महाजन कमीशन की रिपोर्ट को अंतिम माना जाएगा.

क्या है महाजन कमीशन की रिपोर्ट?
पूर्व मुख्य न्यायाधीश मेहर चंद महाजन के नेतृत्व में महाजन कमीशन का गठन अक्टूबर 1966 में हुआ था. तब की बॉम्बे सरकार ने सितंबर 1957 में केंद्र के सामने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद मामले को सुलझाने के लिए इस कमीशन का गठन हुआ.

अगस्त 1947 में कमीशन ने 264 गांवों को महाराष्ट्र में ट्रांसफर करने और बेलगाम और 247 गांवों के कर्नाटक में रहने की सिफारिश की. महाराष्ट्र सरकार ने इस रिपोर्ट को अस्वीकार किया और दूसरी बार समीक्षा की मांग की. हालांकि, कर्नाटक सरकार ने इस रिपोर्ट का स्वागत किया और लगातार इसे लागू किए जाने की बात दोहरा रहा है. फिलहाल इसे केंद्र की तरफ से औपचारिक तौर पर लागू नहीं किया गया है.

अब ताजा हालात जानिए
हर राज्य की भाषाई जनगणना के बाद महाराष्ट्र कर्नाटक से 814 गांवों को राज्य में ट्रांसफर किए जाने की मांग कर रहा है. खास बात है कि सीएम पद संभालने के बाद ठाकरे ने दो मंत्रियों छगन भुजबल और एकनाथ शिंदे को सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले पर नजर बनाए रखने की जिम्मेदारी दी थी. महाराष्ट्र सरकार ने 2004 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और आर्टिकल 131(b) के तहत मामले के निपटारे की मांग की थी.
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