PM मोदी का तूफान ग्रस्त बंगाल और ओडिशा का दौरा क्या है संदेश

पीएम नरेंद्र मोदी के पत्र के साथ बीजेपी का घर-घर संपर्क अभियान

पीएम नरेंद्र मोदी के पत्र के साथ बीजेपी का घर-घर संपर्क अभियान

पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने बंगाल का दौरा किया और 1000 करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान भी किया. साथ ही मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख और घायलों के लिए 50 हजार रुपये राहत का ऐलान भी किया.

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पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार शाम जब ऐलान किया कि वो बंगाल और ओडिशा के तूफानग्रस्त इलाकों का दौरा करेंगे तो साफ था कि वो कोरोना हो या प्राकृतिक आपदा वो फ्रंट से लीड करने में यकीन रखते हैं. पीएम मोदी आखिरकार 83 दिनों यानि लगभग तीन महीने के बाद दिल्ली के बाहर दौरे पर निकलने वाले थे. वो भी तूफान अम्फान से प्रभावित इलाकों का. पीएम मोदी का आखिरी दौरा उत्तर प्रदेश का था, जब 29 फरवरी को वे प्रयागराज और चित्रकूट के दौरे पर गए थे. तीन महीने कोरोना संकट से जूझने के बाद जैसे ही खबर मिली की तटीय इलाकों में अम्फान तूफान का प्रकोप बढ़ने वाला है तो पीएम मोदी ने तत्काल आपदा प्रवधंन की बैठक बुलाकर राहत और बचाव कार्यों के लिए पूरे तंत्र को सक्रिय कर दिया. एक शुरुआत तो पीएम मोदी ने कर दी और इसका असर साफ नजर आया कि नुकसान से ज्यादा बचाव का काम पूरा हो पाया. शुक्रवार की सुबह ही पीएम मोदी निकल पड़े एक और आपदा की जमीनी हकीकत देखने और उससे निपटने का रास्ता निकालने.

राहत का जायजा और बंगाल के घावों पर मरहम

पीएम मोदी ने उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना जिलों के दौरे के बाद बंगाल के अधिकारियों के साथ मंथन किया. 1000 करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान भी किया और साथ ही मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख और घायलों के लिए 50 हजार रुपये राहत का ऐलान भी किया. साथ यह भी ऐलान किया कि एक इंटर मिनिस्टीरियल टीम बंगाल का दौरा करेगी. फिर असली नुकसान का जायजा लेकर बड़ी राहत दी जाएगी. पीएम मोदी ने कहा कि दोनों सरकारों के भरसक प्रयासों के बावजूद 80 लोगों की जान बचा नहीं पाए जिसका उन्हें दुख है. पीएम ने कहा कि बंगाल की इस दुख की घड़ी में हम पूरा-पूरा साथ देंगे, सहयोग देंगे और बंगाल जल्‍द से जल्‍द खड़ा हो जाए. बंगाल जल्‍द से जल्‍द तेज गति से आगे बढ़े  इसके‍ लिए भारत सरकार कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी और जो भी आवश्‍यकताएं होंगी, उन आवश्‍यकताओं को पूर्ण करने के लिए भारत सरकार के जो भी नीति-नियम हैं उसका पूरी तरह उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल की मदद में हम खड़े रहेंगे.

बंगाल के लिए खास बात ये कि यूपी के बाद बंगाल ही एक ऐसा राज्य है जहां पीएम मोदी ने इस साल एक से ज्यादा बार दौरे किए हैं. इसके पहले जनवरी 11 को वो कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर पहुंचे थे और बेलुर मठ का दौरा भी किया था. संदेश साफ रहता है कि पीएम मोदी का बंगाल और बंगाल की संस्कृति को लेकर खासा लगाव रहा और आने वाले दिनों में बीजेपी की राजनीति का केन्द्र बिंदू भी रहने वाला है. पीएम का खुद आना और राहत का ऐलान करना बंगाल की जनता को जरुर भाया होगा.
ममता दीदी के आक्रामक तेवरों को ठंडा करना

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जो आपदा से लेकर कोरोना किसी मौके पर केन्द्र से टकराव का रास्ता ही अपनाती हैं. उन्होने भी मौके की गंभीरता को समझते हुए पीएम मोदी को बंगाल आकर वहां का हाल जानने का न्यौता भेज दिया. पीएम ने भी देर नहीं लगायी क्योंकि वो ऐसा मौका नहीं देना चाहते थे कि तूफान में भी विपक्ष को राजनीति करने का मौका मिले. पीएम मोदी के सर्वेक्षण और बैठकों के दौरान और ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनकड मौजूद रहे. अंत में पीएम मोदी ने ममता बनर्जी के प्रयासों की तारीफ भी कर दी. पीएम मोदी ने कहा कि ममता जी के नेतृत्‍व में राज्‍य सरकार ने भरसक प्रयास किया है. भारत सरकार ने भी लगातार उनके साथ रह करके इस संकट की घड़ी में जो भी आवश्‍यक व एडवांस में करने योग्‍य था, जो उसी समय करने के योग्‍य था और जो आगे दिनों में करने की आवश्‍यकता है, उसको भी पूरा करने का हम प्रयास करेंगे. जाहिर है ये संदेश दोनों पक्षों के बीच तल्खियों को खासा कम कर गया होगा.

कोरोना और तूफान दो विपरित आपदाओं से जंग



पीएम मोदी ने बंगाल की जनता को बताया कि पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत कोरोना के संकट से जूझ रहा है. कोरोना वायरस की लड़ाई जीतने का मंत्र और तूफान से जीतने का मंत्र, दोनों पूरी तरह एक-दूसरे के बिल्कुल विपरित हैं. कोरोना वायरस से लड़ने का मंत्र है- जो जहां है वहीं रहे, जरूरत नहीं हो तब तक घर से बाहर नहीं निकले और जहां भी जाए दो गज की दूरी बनाए रखे. लेकिन चक्रवात का मंत्र है कि साइक्लोन आ रहा है, जल्‍दी से जल्‍दी सुरक्षित स्‍थल पर आप शिफ्ट कर जाइए. वहां पर पहुंचने का प्रयास कीजिए, अपना घर खाली कीजिए, यानी दोनों अलग-अलग प्रकार की लड़ाईयां एक साथ पश्चिम बंगाल को लड़नी पड़ी है. पीएम जानते हैं कोरोना को लेकर ममता सरकार केन्द्र से सहयोग करने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में पीएम मोदी को उम्मीद है कि तूफान राहत के लिए सहयोग में बढ़ाया तो हाथ शायद बंगाल सरकार के तेवरों को थोड़ा नरम कर जाए. और आने वाले दिनों में कोरोना के बढ़ते मरीजों और बंगाल वापस लौटते श्रमिकों के पुनर्वास और वापसी के लिए मिल बैठकर योजना बनायी जा सके.

राजा राम मोहन राय को याद कर बंगाल वासियों के दिल को छुआ

पीएम मोदी ने बंगाल के गौरव राजा राम मोहन राय को याद कर मानो बंगाल के लोगों के दिल पर हाथ रख दिया. पीएम मोदी ने कहा आज देश को जिन पर गर्व है, ऐसे राजा राममोहन राय जी की जन्‍म जयंती है. और इस समय मेरा पश्चिम बंगाल की पवित्र धरती पर होना  मेरे मन को छूने वाली बात होती है. लेकिन संकट की घड़ी से हम जूझ रहे हैं, तब मैं इतना ही कहूंगा कि राजा राममोहन राय जी हम सबको आशीर्वाद दें ताकि समयानुकूल समाज परिवर्तन के जो उनके सपने थे  उनको पूरा करने के लिए हम मिल बैठकर, मिल जुलकर एक उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए भावी पीढ़ी के निर्माण के लिए समाज सुधार के अपने कामों को निरंतर जारी रखेंगे और वहीं राजा राममोहन राय जी को उत्‍तम श्रद्धांजलि होगी.

सोनिया विपक्ष को एकजुट करने की जुगत में तो पीएम मोदी दो गैर एनडीए शासित राज्यों का मुश्किल में साथ देने में

ये बात और कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष के तमाम दिग्गज नेताओं की बैठक बुलायी थी. जिसमें कोरोना संकट और वापस लौटते श्रमिकों के हालात पर एक साझा रणनीति बनानी थी. ममता बैनर्जी इसमें शामिल भी हुईं, लेकिन ये भी साफ था कि पूरे बंगाल दौरे के दौरान वो पीएम मोदी के साथ भी रहीं ताकि तूफान की तबाही पर उन्हें ज्यादा से ज्यादा केन्द्र का सहयोग मिल सके. उधर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी पीएम मोदी के साथ ही रहे. ओडिशा में उनकी बीजेडी और बीजेपी को हर वक्त आर पार की लड़ाई में लगीं हैं. लेकिन वक्त आपदा का है तो केन्द्र का सहयोग जरुरी है ये बात भी नवीन बाबू जानते हैं.  इसलिए ओडिशा राहत के लिए 500 करोड़ रुपये का प्राथमिक ऐलान काम कर गया. अभी नुकसान का आंकलन बाकी है और बाकी राहत का आश्वासन भी साथ है. इसलिए पीएम मोदी का ये संदेश की चाहे बीजेपी हो या फिर गैर बीजेपी शासित राज्य वो सहयोग और मदद देने से पीछे नहीं हटेंगे.

लगभग तीन महीने बाद मोदी दिल्ली से बाहर दौरे पर निकले

लगभग 83 दिनों के बाद पीएम मोदी दौरे पर निकले थे. आखिरी दौरा उत्तर प्रदेश का था जब 29 फरवरी को वो चित्रकूट और प्रयागराज गए थे. इस दौरे के लिए भी उन्होंने आनन फानन मे तमाम तैयारियां भी की थी. बंगाल और ओडिशा जाना था और वहां की जनता को ये संदेश भी देना था कि वो उनके नुमाईंदों के हाथों में ही सर्वेक्षण से लेकर राहत कार्यों का जिम्मा सौंपेंगे. इसलिए उनके विशेष विमान में ओडिशा से मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, प्रताप सिंह सारंगी, बंगाल से बाबुल सुप्रियों मौजूद थे. बंगाल भी दूसरा राज्य हैं जहां पीएम मोदी इस साल दूसरी बार गए हैं.

कोरोना से जंग हो या फिर प्राकृतिक आपदा से बचाव की रणनीति बनाना पीएम मोदी इसमें देर नहीं लगाते और पूरा जोर इस बात पर होता है कि सबको साथ लेकर जंग को आगे बढाएं. यहीं संदेश था ओडिशा और बंगाल के तूफान ग्रस्त इलाकों के दौरे का.
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