तीन तलाक के संशोधित बिल में क्या है नया, जानें 5 अहम बातें

लोकसभा में इस बिल को पास कराना काफी आसान लग रहा है लेकिन राज्यसभा में इसे पास कराना सरकार के लिए मुश्किल चुनौती होगी.


Updated: July 25, 2019, 1:04 PM IST
तीन तलाक के संशोधित बिल में क्या है नया, जानें 5 अहम बातें
तीन तलाक के संशोधित बिल में क्या है नया, जानें 5 अहम बातें

Updated: July 25, 2019, 1:04 PM IST
ट्रिपल तलाक बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश किया गया. एनडीए की सरकार ने मई में अपना दूसरा कार्यभार संभालने के बाद संसद के इस पहले सत्र में सबसे पहले विधेयक का मसौदा पेश किया था. लोकसभा में इस बिल को पास कराना काफी आसान लग रहा है, लेकिन राज्यसभा में इसे पास कराना सरकार के लिए मुश्किल चुनौती होगी.

केंद्रीय कैबिनेट ने कुछ संशोधनों के साथ इसे पहले भी पारित किया जा चुका है. 29 दिसंबर 2017 को लोकसभा में यह विधेयक पारित हो गया था, जिसमें तुरंत तीन तलाक देने को अपराध की श्रेणी में रखा गया था. आइए जानते हैं कि अगर तीन तलाक बिल को मंजूरी मिल जाती है तो उसमें किस तरह का संशोधन देखने को मिलेगा.

संशोधित बिल से जुड़ी पांच अहम बातें

-- तीन तलाक को अगर मंजूरी मिल जाती है तो कानून 'गैरजमानती' बना रहेगा लेकिन आरोपी जमानत मांगने के लिए सुनवाई से पहले भी मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकते हैं. गैरजमानती कानून के तहत, जमानत थाने में ही नहीं दी जा सकती.

-- यह प्रावधान इसलिए जोड़ा गया है ताकि मजिस्ट्रेट 'पत्नी को सुनने के बाद' जमानत दे सकें. सरकार ने साफ किया है कि, 'प्रस्तावित कानून में तीन तलाक का अपराध गैरजमानती बना रहेगा.'

-- मजिस्ट्रेट तय करेंगे कि जमानत केवल तब ही दी जाए जब पति विधेयक के अनुसार पत्नी को मुआवजा देने पर राजी हो. विधेयक के मुताबिक, मुआवजे की राशि मजिस्ट्रेट द्वारा तय की जाएगी.

--पुलिस केवल तब प्राथमिकी दर्ज करेगी जब पीड़ित पत्नी, उसके किसी करीबी संबंधी या शादी के बाद उसके रिश्तेदार बने किसी व्यक्ति की ओर से पुलिस से गुहार लगाई जाती है.
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-- विधेयक के अनुसार, मुआवजे की राशि मजिस्ट्रेट द्वारा तय की जाएगी. एक अन्य संशोधन यह स्पष्ट करता है कि पुलिस केवल तब प्राथमिकी दर्ज करेगी जब पीड़ित पत्नी, उसके किसी करीबी संबंधी या शादी के बाद उसके रिश्तेदार बने किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस से गुहार लगाई जाती है.

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First published: July 25, 2019, 9:37 AM IST
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