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क्‍या है दुर्लभ बीमारी गौचर, जिससे पीड़ि‍त बच्‍ची के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने दिए हैं ₹1 करोड़

गौचर रोग उन लोगों को होता है, जिनके माता-पिता में एक विशेष जीन पैटर्न विकसित हो जाता है. (canva.com)

गौचर रोग उन लोगों को होता है, जिनके माता-पिता में एक विशेष जीन पैटर्न विकसित हो जाता है. (canva.com)

गौचर एक ऐसा आनुवांशि‍क रोग है जो पूर्वी और मध्य यूरोपीय मूल के यहूदी लोगों में सबसे ज्यादा पाया जाता है. इसके लक्षण किस ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

आनुवांशि‍क रोग गौचर पूर्वी और मध्य यूरोपीय मूल के यहूदी लोगों में सबसे ज्यादा पाया जाता है.
इसके लक्षण किसी भी उम्र में सामने आ सकते हैं.
गौचर का एक प्रकार बचपन में शुरू होता है. जिसमें 2 वर्ष की उम्र तक रोगी की मौत हो जाती है.

नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश की सरकार ने एक दुर्भल आनुवांशि‍क बीमारी गौचर रोग (Gaucher disease) से ग्रस्त बच्‍ची के इलाज के ल‍िए 1 करोड़ रुपये की रकम को मंजूरी दी है. इसके इलाज के लिए कुल 52 इंजेक्‍शनों की जरूरत होती है, ज‍िनको 15 द‍िनों में एक बार लगाया जाता है. जबकि हर इंजेक्‍शन का दाम 1.25 लाख रुपये है. गौचर एक ऐसा आनुवांशि‍क रोग है जो पूर्वी और मध्य यूरोपीय मूल के यहूदी लोगों में सबसे ज्यादा पाया जाता है. इसके लक्षण किसी भी उम्र में सामने आ सकते हैं.

गौचर रोग उन लोगों को होता है जिनके माता-पिता में एक विशेष वंशानुक्रम पैटर्न विकसित हो जाता है, जिसे ऑटोसोमल रिसेसिव (Autosomal recessive) कहा जाता है. किसी भी बच्चे में गौचर रोग तभी पाया जाता है, जबके उसके माता और पिता दोनों ही गौचर जीन के वाहक हों. गौचर रोग में शरीर के कुछ अंगों विशेष रूप से तिल्ली और लीवर (spleen and liver) में कुछ वसायुक्त पदार्थों का निर्माण होता है. इससे ये अंग बड़े हो जाते हैं और उनके कार्य में बाधा आती है. ये वसायुक्त पदार्थ हड्डी के ऊतकों में भी जमा हो सकते हैं. जिससे हड्डी कमजोर हो सकती है और फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ सकता है.

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अगर अस्थि मज्जा पर असर होता है, तो यह खून के थक्के जमने की क्षमता को कम कर सकता है. इसके इलाज के लिए अक्सर एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी इस्तेमाल होती है. गौचर के कारण रोगियों में एनीमिया बढ़ती है, जिससे गंभीर थकान हो सकती है. कभी-कभी गौचर रोग दिमाग पर भी असर करता है. इससे मांसपेशियों में कठोरता आती है और निगलने में कठिनाई होती है. गौचर रोग दौरे का कारण भी बन सकता है. गौचर रोग का एक दुर्लभ प्रकार बचपन में ही शुरू होता है. जिसमें आमतौर पर 2 वर्ष की उम्र तक रोगी की मौत हो जाती है.

Tags: Andhra Pradesh, Andhra Pradesh Government, Genetic diseases

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