कर्नाटक में अब क्या: BJP की राह मुश्किल, कांग्रेस-JDS गठबंधन पर संकट

फ्लोट टेस्‍ट शुरू होने के पहले ही ये साफ तौर पर दिखने लगा था कि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार अपने विधायकों को मनाने में सफल नहीं हो पाई.

D P Satish | News18Hindi
Updated: July 24, 2019, 7:10 AM IST
कर्नाटक में अब क्या: BJP की राह मुश्किल, कांग्रेस-JDS गठबंधन पर संकट
फ्लोट टेस्‍ट शुरू होने के पहले ही ये साफ तौर पर दिखने लगा था कि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार अपने विधायकों को मनाने में सफल नहीं हो पाई.
D P Satish
D P Satish | News18Hindi
Updated: July 24, 2019, 7:10 AM IST
कर्नाटक का सियासी नाटक मंगलवार शाम थम गया. मंगलवार को कांग्रेस-जेडीएस सरकार फ्लोर टेस्‍ट के बाद अल्पमत के चलते गिर गई. विधानसभा में मंगलवार को एचडी कुमारस्‍वामी ने विश्‍वासमत प्रस्‍ताव पेश किया, हालांकि कुमारस्‍वामी बहुमत साबित नहीं कर पाए. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पक्ष में 99 और बीजेपी के पक्ष में 105 वोट पड़े. कर्नाटक में एचडी कुमारस्‍वामी की सरकार 14 महीने ही चल पाई.

मंगलवार को फ्लोर टेस्‍ट के दौरान कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के 15 बागी विधायक अनुपस्थित रहे. इसके साथ ही कांग्रेस के दो अन्‍य विधायक, एक बसपा विधायक और एक निर्दलीय विधायक भी सदन नहीं पहुंचा. अब राज्‍य के बीजेपी अध्‍यक्ष बीएस येदियुरप्‍पा के चौथी बार मुख्‍यमंत्री बनने का रास्‍ता साफ हो गया है. पिछले साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद मई महीने में बीएस येदियुरप्‍पा ने मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन, बहुमत साबित करने में असफल रहने के कारण 56 घंटे बाद ही उन्‍हें पद छोड़ना पड़ा था. अब उनके फिर मुख्‍यमंत्री बनने की संभावना बन रही है.

चर्चा में ही कुमारस्‍वामी ने दिया था संकेत
मंगलवार को फ्लोर  टेस्‍ट शुरू होने के पहले ही ये साफ तौर पर दिखने लगा था कि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार अपने विधायकों को मनाने में सफल नहीं हो पाई. उनकी सारी कोशिश फेल होती दिख रही थी. शायद कुमारस्‍वामी को पहले ही इसका आभास हो चुका था और वे सीएम पद छोड़ने का फैसला कर चुके थे. विश्‍वास प्रस्‍ताव पर चर्चा में ही कुमारस्‍वामी ने पूर्ण बहुमत खो देने का संकेत दे दिया था.



गठबंधन फ्लोर टेस्‍ट शुरू होने तक किसी चमत्‍कार की उम्‍मीद कर रहा था और अंतिम चार दिनों में उसने कोशिश थी कि विश्‍वास मत से न गुजरना पड़े. लेकिन, जब सारी परिस्थिति उनके खिलाफ हो गई तो कुमारस्‍वामी ने किसी दूसरे विकल्‍प की आशा छोड़ दी.

हालांकि सभी सियासी उठापटक के बीच दलबदल विरोधी कानून की कई खामियां भी सामने आई और विश्‍वास मत के दौरान कांग्रेस-जेडीएस नेताओं ने भी यह बात सदन में रखने की कोशिश की. विधानसभा अध्‍यक्ष ने कांग्रेस और जेडीएस के सभी विधायकों को फ्लोर टेस्‍ट के लिए तीन लाइन में खड़ा किया था. हालांकि गठबंधन फ्लोर टेस्‍ट में फेल रहा.
Loading...

वोटिंग के तुरंत बाद येदियुरप्‍पा की घोषणा
वोटिंग के तुरंत बाद बीजेपी राज्‍य प्रमुख बीएस येदियुरप्‍पा ने राज्‍य सरकार का नेतृत्‍व करने की घोषणा की. हालांकि अगर जमीनी स्‍तर पर देखें तो यह इतना भी आसान नहीं होगा. क्‍योंकि 224 संख्‍याबल वाले विधानसभा में बहुमत हासिल करने के लिए 113 की संख्‍या होनी चाहिए.



वैसे तो बीजेपी सरकार को उपचुनाव तक कोई दिक्‍कत नहीं होगी. लेकिन अगर उपचुनाव में भी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन एक साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं और परिणाम उनके पक्ष में जाता है तो फिर सियासी उठापटक शुरू हो जाएगी.

कांग्रेस-जेडीएस में पहले ही पड़ गई थी दरार
हालांकि अभी ये भी कहना मुश्किल है कि सरकार गिरने के बाद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन जारी रहता है या नहीं. ऐसा इसलिए भी, क्‍योंकि कांग्रेस अपने गठबंधन साथी के साथ सहज नहीं थी और लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद उनकी दरार और बढ़ गई थी.

वहीं अगर वे आज की हार के बाद अलग-अलग रास्‍ता अपनाते हैं तो ये बीजेपी के लिए राहत की खबर होगी. केंद्र में नरेंद्र मोदी की मजबूत सरकार भी राज्‍य में बीजेपी के पक्ष में प्रतिकूल परिस्थितियां बनाने में मदद कर सकती है.



विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पूर्ण बहुमत से बहुत दूर थी. इसके कारण मैसूर क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाली जेडीएस से कांग्रेस ने गठबंधन कर लिया. हालांकि इस गठबंधन में शुरूआत से ही दरार दिख रही थीं. कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया भी गठबंधन सरकार को बचाने में बहुत ज्‍यादा रूचि नहीं ले रहे थे. हालांकि पार्टी आलाकमान ने उन्‍हें अंतिम समय तक मुख्‍य भूमिका निभाने का आदेश दिया था.

राज्‍य कांग्रेस में मजबूत नेता की कमी
इन इसके बीच कांग्रेस को नेताविहीन कहना इसलिए गलत नहीं होगा, क्‍योंकि राज्‍य में पार्टी के पास कोई मजबूत नेता नहीं है. कोई ऐसा नेता भी नहीं है, जो विपक्ष में बैठे पार्टी के नेताओं को मनोबल बढ़ा सके. वैसे तो अगले विधानसभा चुनाव के लिजाह से कांग्रेस से जेडीएस से गठबंधन तोड़ना अच्‍छा होगा, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से अभी एकजुट रहना ही अच्‍छा होगा.

वहीं जेडीएस भी भविष्‍य को लेकर गंभीर होने की सोच रही है. क्‍योंकि उनके कुछ हार्ड-कोर विधायकों ने पार्टी से किनारा कर लिया है. पिछले 12 वर्षों में गौड़ा अपने परिवार के राजनीति इतिहास में सबसे खराब संकट का सामना कर रहे हैं.



ढहा जेडीएस का गढ़
लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने जेडीएस के गढ़ पुराने मैसूर क्षेत्र में अपने प्रत्‍याशी को उतारा. जेडीएस के गढ़ में बीजेपी का प्रदर्शन शानदार रहा. पूर्व पीएम देवगौड़ा को भी हार का सामना करना पड़ा था. वहीं एचडी देवगौड़ा की उम्र और कुमारस्‍वामी का खराब स्‍वास्‍थ्‍य भी पार्टी के लिए चिंता का विषय है.

वहीं कर्नाटक ने 2008 से 2013 के बीच, भाजपा ने येदियुरप्पा सहित तीन मुख्यमंत्रियों को भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाते हुए देखा था. अब देखना ये होगा कि जेडीएस और कांग्रेस में से दो दर्जन दलबदलुओं के साथ बीजेपी राज्‍य को एक स्थिर सरकार प्रदान कर पाएगी.



2018 के चुनावों के बाद फिर मिला मौका
पिछले साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम में किसी को भी पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा था. हालांकि बहुमत के सबसे करीब बीजेपी ही थी. बीजेपी ने 104 सीटें जीतीं और बहुमत से मात्र 9 सीटें दूर रह गई. कांग्रेस को 80 और जेडीएस को 37 सीटों पर जीत मिली थी.

ये भी पढ़ें: केवल 14 महीने 'स्‍वामी' रहे कुमार, अब दावा पेश करेगी BJP

17 मई, 2018 को बीएस येदियुरप्‍पा ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली. हालांकि 113 का संख्‍याबल जुटाने में असफल होने के बाद 19 मई को उन्‍हें इस्‍तीफा देना पड़ा था. लेकिन, मौके की नजाकत देखते हुए कांग्रेस जेडीएस ने गठबंधन कर लिया और 117 संख्‍याबल के साथ सरकार बना ली. 23 मई, 2018 को कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी और कुमारस्‍वामी ने मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली.

ये भी पढ़ें: कर्नाटक: इकलौते बसपा MLA ने भी नहीं सुनी मायावती की बात
First published: July 24, 2019, 7:01 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...