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BSF Day: क्या आप जानते हैं कैसे बनी बीएसएफ? जानें पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने वाली इस फोर्स का इतिहास

BSF Day: क्या आप जानते हैं कैसे बनी बीएसएफ? जानें पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने वाली इस फोर्स का इतिहास

जनवरी 1965 में गुजरात के कंजरकोट क्षेत्र पाकिस्‍तान की नापाक हरकतों को देखने के बाद पहली बार केंद्रीय एजेंसियों को महसूस हुआ कि सरहद की सुरक्षा राज्‍य पुलिस बल के बस की बात नहीं रही है. सरहदों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक समर्पित बल का गठन करना होगा. ि‍जसके बाद, तत्‍तकालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री ने सेना प्रमुख और उप-सेना प्रमुख के नेतृत्‍व में दो अध्‍ययन समूहों का गठन किया. इन दोनों अध्‍ययन समूहों की रिपोर्ट के आधार पर 1 दिसंबर 1965 को बीएसएफ के गठन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई और मध्‍य प्रदेश के तत्‍कालीन आईजीपी केएफ रुस्‍तमजी को बीएसएफ का पहला महा‍निदेशक नियुक्‍त किया गया.

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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के गठन से पहले अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा स्‍थानीय राज्‍य पुलिस के जिम्‍मेदारी थी. आपात स्थिति में राज्‍य पुलिस के जवानों की मदद के लिए भारतीय सेना या केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) को अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर भेजा जाता था. भारतीय सेना और सीआरपीएफ की यह तैनाती आपात स्थिति निपटने तक अस्‍थाई तौर पर होती थी. अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तैनात ये राज्‍य पुलिस बल पशु चोरी, अपहरण, हत्या, तस्करी, भूमि विवाद और विदेशी सैनिकों द्वारा की गई घुसपैठ जैसे सीमापार अपराधों से निपटते थे.

शुरूआती दौर में, अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा की यह व्‍यवस्‍था भले ही सबको ठीक लगी हो, लेकिन समय के साथ सरहदों पर सुरक्षा का स्‍तर लगातार गिरता चला गया. हालात यहां तक पहुंच गए कि सूबों की सरकारें अपने दायरे में आने वाली सरहदों की सुरक्षा के लिए पर्याप्‍त संख्‍या में सुरक्षाकर्मी भी उपलब्‍ध नहीं करा पाए. सूबों की तरफ से उपलब्‍ध कराए गए सुरक्षाकर्मियों में बड़ी संख्‍या उम्रदराज थी. ये उम्रदराज सुरक्षाकर्मी आवश्‍यक शारीरिक फिटनेस और मानसिक सतर्कता के पैमानों पर भी खरे नहीं उतरते थे. सरहद पर तैनात इन सुरक्षाकर्मियों को न ही आवश्‍यक प्रशिक्षण दिया गया था और न ही उन्‍हें उपयुक्‍त ह‍थियार मुहैया कराए गए थे.

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सीमा सुरक्षा के लिए नाकाबिल हुए राज्‍यों के तमाम सुरक्षा बल
अंतर्राष्ट्रीय सीमा पुलिस बल की इन तमाम खामियों का खामियाजा देश को 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत पाकिस्‍तान युद्ध में उठाना पड़ा. 1965 के भारत-पाक युद्ध की बात करें तो उस समय गुजरात के कंजरकोट क्षेत्र में स्‍टेट रिजर्व फोर्स को सरहद की चौकसी के लिए तैनात किया गया था. जनवरी 1965 में पाकिस्‍तानी सेना ने इसी क्षेत्र से घुसपैठ की शुरूआत की थी. उस समय, गुजरात स्‍टेट रिजर्व फोर्स दुश्‍मन के खिलाफ बेहद कमजोर साबित हुई थी. जिसके चलते, केंद्रीय रिजर्व पुलिस (सीआरपी) की कुछ कंपनियों को स्थिति से निपटने के लिए ऑपरेशन के क्षेत्र में भेजा गया था.

सुरक्षा समीक्षा के लिए उप-सेना प्रमुख के नेतृत्‍व में कमेटी का गठन
जनवरी 1965 में सरहद पर उत्‍पन्‍न हुई परिस्थितियों को देखते हुए तत्‍कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री ने भारतीय सेना के उप-प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल कुमारमंगलम की अध्‍यक्षता में एक इमरजेंसी कमेटी ऑफ सेकेट्रीज का गठन किया. इस कमेटी को सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षाबलों की बहुलता को सुव्यवस्थित करने की संभावनाओं का अध्‍ययन करने की जिम्‍मेदारी दी गई थी. लेफ्टिनेंट जनरल कुमारमंगलम के नेतृत्व में इस अध्ययन समूह ने अप्रैल 1965 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद भारत की सीमा सुरक्षा को लेकर मौजूद समस्‍याओं को खत्‍म करने के लिए एकल केंद्रीय बल के निर्माण के लिए नीतिगत पहल शुरू हो गई थी.

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उप-सेना प्रमुख की रिपोर्ट के आधार पर बना बीएसएफ का ब्‍लू प्रिंट
लेफ्टिनेंट जनरल कुमारमंगलम की रिपोर्ट के आधार पर जनरल जेएन चौधरी और तत्‍कालीन गृह सचिव एलपी सिंह ने बीएसएफ के स्‍थापना का ब्‍लू प्रिंट तैयार किया. वहीं, कच्‍छ के रण में पाकिस्‍तानी आक्रमण के तुरंत बाद सरहद की सुरक्षा व्‍यवस्‍था के समन्‍वय और नियंत्रण की समीक्षा के लिए दूसरी उच्‍चस्‍तरीय कमेटी का गठन किया गया. इस कमेटी में तत्‍कालीन थल सेनाध्‍यक्ष, गृह मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव और स्‍पेशल ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस महानिरीक्षक को शामिल किया गया था. मई 1965 में प्रधानमंत्री शास्‍त्री ने सभी राज्‍यों के गृह मंत्रियों और पुलिस प्रमुखों की एक बैठक बुलाई, जिसमें सीमा की सुरक्षा के लिए समर्पित एक नए केंद्रीय बल के गठन का अंतिम फैसला ले लिया गया.

केएफ रुस्‍तम बने बीएसएफ के पहले महानिदेशक
नए केंद्रीय बल के गठन के फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए 16 नवंबर 1965 को ग्रुप ऑफ सेकेट्रीज की पहली बैठक दिल्‍ली में हुई. बैठक में दोनों स्‍टडी ग्रुप की रिपोर्ट की विस्‍तृत समीक्षा की गई. समीक्षा के दौरान सामने आए निष्‍कर्षों के आधार पर बीएसएफ के गठन का आधार तय कर दिया गया. 1 दिसंबर 1965 को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के गठन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई. सीमा की सुरक्षा के लिए समर्पित इस बल के गठन और नेतृत्‍व की जिम्‍मेदारी मध्‍य प्रदेश के तत्‍कालीय आईजीपी केएफ रुस्‍तमजी को सौंपी गई. इसी के साथ, बेहद तेज तर्रार और सुलझे हुए व्‍यक्ति की छवि रखने वाले आईपीएस अधिकारी केएफ रुस्‍तमजी को बीएसएफ का पहला महा‍निदेशक नियुक्‍त कर दिया गया.

Tags: BSF, Indian army, Know your Army

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