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  • चांद पर कहां और किस हालत में है चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम, 3 दिन बाद उठेगा रहस्य से पर्दा

चांद पर कहां और किस हालत में है चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम, 3 दिन बाद उठेगा रहस्य से पर्दा

लैंडर विक्रम चांद पर कहां और किस हालत में है, 3 दिन बाद उठेगा रहस्य से पर्दा

लैंडर विक्रम चांद पर कहां और किस हालत में है, 3 दिन बाद उठेगा रहस्य से पर्दा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसरो (ISRO) के वैज्ञानिक 3 दिन बाद चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के लैंडर विक्रम को ढूंढ निकालेंगे. दरअसल जहां से लैंडर विक्रम का संपर्क टूटा था, उसी जगह से आर्बिटर को पहुंचने में तीन दिन का समय लगेगा.

  • News18Hindi
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    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानी इसरो (ISRO) का चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) के लैंडर विक्रम से चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के ठीक पहले संपर्क टूट गया. तब से इसका कुछ पता नहीं चल पाया है, हालांकि इसे लेकर वैज्ञानिकों की उम्मीद अभी खत्म नहीं है. शुक्रवार देर रात चांद (Moon) पर उतरने से पहले विक्रम का धरती (Earth) पर स्थित स्टेशन से संपर्क टूट गया था, उस वक्त लैंडर विक्रम चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था. लैंडर विक्रम के साथ क्या हुआ और वो अब कहां और किस हालत में है, अभी तक इसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है. हालांकि वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि तीन दिन के अंदर इस रहस्य से पर्दा उठ जाएगा. दरअसल ऑर्बिटर पर लगे अत्याधुनिक उपकरणों के सहारे जल्द ही इन सभी सवालों के जवाब ढूंढे जा सकते हैं.

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसरो के वैज्ञानिक 3 दिन बाद लैंडर विक्रम को ढूंढ निकालेंगे. दरअसल जहां से लैंडर विक्रम का संपर्क टूटा था, उस जगह पर आर्बिटर को पहुंचने में तीन दिन का समय लगेगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक, टीम को लैंडिंग साइट की पूरी जानकारी है. आखिरी समय में लैंडर विक्रम रास्ते से भटक गया था, इसलिए अब वैज्ञानिक ऑर्बिटर के तीन उपकरणों के जरिये उसे ढूंढने की कोशिश करेंगे.'

    आपको बता दें कि आर्बिटर में SAR (सिंथेटिक अपर्चर रेडार), IR स्पेक्ट्रोमीटर और कैमरे की मदद से 10 x 10 किलोमीटर के इलाके को छाना जा सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक लैंडर विक्रम का पता लगाने के लिए उन्हें उस इलाके की हाई रेजॉलूशन तस्वीरें लेनी होंगी.

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    वैज्ञानिकों ने लैंडर विक्रम से संपर्क उस समय खोया जब वह चंद्रमा के धरातल के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड होने वाला था और धरातल से मात्र 2.1 किलोमीटर दूर था.


    वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर लैंडर विक्रम ने क्रैश लैंडिंग की होगी तो वह कई टुकड़ों में टूट चुका होगा. ऐसे में लैंडर विक्रम को ढूंढना और उससे संपर्क साधना काफी मुश्किल भरा होगा. लेकिन अगर उसके कंपोनेंट को नुकसान नहीं पहुंचा होगा तो हाई-रेजॉलूशन तस्वीरों के जरिए उसका पता लगाया जा सकेगा. इससे पहले इसरो चीफ के. सिवन ने भी कहा है कि अगले 14 दिनों तक लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिशें जारी रहेंगी. इसरो की टीम लगातार लैंडर विक्रम को ढूंढने में लगी हुई है. इसरो चीफ के बाद देश को उम्मीद है कि अगले 14 दिनों में कोई अच्छी खबर मिल सकती है.

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    इसरो का चंद्रयान-2 सॉफ्ट लैडिंग नहीं कर पाया


    अगले 14 दिनों तक प्रयास करते रहेंगे वैज्ञानिक
    इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने दूरदर्शन को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि हालांकि हमारा चंद्रयान 2 के लैंडर से संपर्क टूट चुका है, लेकिन वो लैंडर से दोबारा संपर्क स्थापित करने के लिए अगले 14 दिनों तक प्रयास करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि लैंडर के पहले चरण को सफलता पूर्वक पूरा किया गया. जिसमें यान की गति को कम करने में एजेंसी को सफलता मिली. हालांकि अंतिम चरण में आकर लैंडर का संपर्क एजेंसी से टूट गया.

    7.5 सालों तक काम करेगा ऑर्बिटर
    सिवन ने आगे कहा कि पहली बार हम चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र का डाटा प्राप्त करेंगे. चंद्रमा की यह जानकारी विश्व तक पहली बार पहुंचेगी. चेयरमैन ने कहा कि चंद्रमा के चारों तरफ घूमने वाले आर्विटर के तय जीवनकाल को सात साल के लिए बढ़ाया गया है. यह 7.5 सालों तक काम करता रहेगा. यह हमारे लिए संपूर्ण चंद्रमा के ग्लोब को कवर करने में सक्षम होगा.

    ये भी पढ़ें- ISRO चीफ का ऐसा रहा सफर, कॉलेज में आकर पहली बार पहने थे सैंडल, करते थे खेती

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