तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित कराने के लिए इन महिलाओं ने लड़ी जंग

इस मामले में छह लोगों ने याचिका दायर कीं. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण याचिका 36 साल की शायरा बानो ने दाखिल की थी. शायरा बानो के पति ने 15 साल पहले उनके पति ने उन्हें तीन तलाक दे दिया था.

News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 10:03 PM IST
तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित कराने के लिए इन महिलाओं ने लड़ी जंग
इस मामले में छह लोगों ने याचिका दायर कीं. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण याचिका 36 साल की शायरा बानो ने दाखिल की थी. शायरा बानो के पति ने 15 साल पहले उनके पति ने उन्हें तीन तलाक दे दिया था.
News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 10:03 PM IST
संसद के दोनों सदनों में तीन तलाक बिल पास हो गया है. इसे केंद्र की मोदी सरकार की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. यह बिल 16वीं लोकसभा में निचले सदन में पास हो गया था लेकिन राज्यसभा में यह पास नहीं हो सका था. 17वीं लोकसभा में इस बिल के लिए गुरुवार को वोटिंग हुई जिसमें 303 सांसदों ने इस बिल के पक्ष में वोट दिया वहीं 82 सांसदों ने इस बिल के विपक्ष में वोट दिया.

मंगलवार को इस बिल पर राज्यसभा में चर्चा हुई जहां इस बिल के पक्ष में 99 वोट पड़े वहीं इस बिल के विपक्ष में 84 वोट पड़े. इस बिल को लेकर काफी लंबी लड़ाई चली. इसके लिए विरोध में कई लोगों ने याचिकाएं दाखिल कीं.

शायरा बानो-
इस मामले में छह लोगों ने याचिका दायर कीं. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण याचिका 36 साल की शायरा बानो ने दाखिल की थी. शायरा बानो के पति ने 15 साल पहले उनके पति ने उन्हें तीन तलाक दे दिया था.

कई गर्भपात के बाद कई बीमारियों से जूझ रही बानो को अपने माता-पिता के साथ उत्तराखंड के काशीपुर में रहने के दौरान डाक के ज़रिए तलाकनामा मिला.

अपनी याचिका में बानो ने दलील दी कि मुस्लिम पति द्वारा तीन बार तलाक लेने के लिए कहने का अधिकार पूरी तरह से एकतरफा और निरपेक्ष है और इसका कोई औचित्य नहीं है. ये मुस्लिम संस्कृति और मुस्लिम कानून का हिस्सा नहीं है. मैं जानता हूं कि यह कोई धर्म या योग्य धर्म या संरक्षण नहीं है.

इशरत जहां
Loading...

30 साल की इशरत जहां के पति ने फोन पर तीन तलाक दे दिया और चार बच्चों को उनसे ले लिया गया. साथ ही उसे हावड़ा में अपने विस्तारित परिवार की दया पर छोड़ दिया गया था.

इशरत जहां के वकील वीके बीजू ने अदालत के फैसले से पहले कहा- मैंने उन्हें आगे आने के लिए कहा, मुझे नहीं पता था कि वह ऐसा कर पाएंगी या नहीं. कभी-कभी उन्हें संपर्क करने में मुश्किल होती थी. उन्होंने अपने चार बच्चों को खो दिया और पति ने उन्हें एक फोन कॉल के ज़रिए तलाक़ दे दिया. वह अपनी दूसरी शादी को बचाने के लिए लड़ीं. उन पर हमला हुआ जिसने उन्हें कलकत्ता मेडिकल कॉलेज पहुंचा दिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर


बीएमएमए
एक तीसरी याचिका, जिसका शीर्षक मुस्लिम वीमेन क्वेस्ट फॉर इक्वैलिटी ’था, इसे भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) द्वारा दायर की गई थी. कोर्ट में, बीएमएमए ने तर्क दिया कि अल्लाह कहता है कि पुरुष और महिला समान हैं. उन्होंने कहा हमने तलाक को लेकर कुरान की आयतें पढ़ीं, वार्ता और यह 90 दिनों में कैसे कम से कम होना चाहिए, इसके बारे में बताया. उनका दूसरा तर्क लैंगिक न्याय के बारे में था. भारत के संविधान में इसे लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है उसके हिसाब से सभी नागरिकों को समान अधिकार हैं.

गुलशन परवीन, आफरीन रहमान, अतिया साबरी

गुलशन परवीन और आफरीन रहमान इस मामले में दो अन्य याचिकाकर्ता हैं. इस फैसले से पहले उनके वकीलों ने कहा कि वे महिलाओं से कॉन्टैक्ट नहीं कर सके. लेकिन वे चाहते थे कि वे इस बड़े दिन पर अदालत में उपस्थित रहें. परवीन रामपुर से हैं जबकि रहमान जयपुर से हैं. सहारनपुर की रहने वाली आतिया साबरी इस मामले में आखिरी याचिकाकर्ता हैं.

इस बीच, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अदालत को ट्रिपल तालक की प्रथा में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए क्योंकि यह आस्था का विषय है. उन्होंने कहा जैसे माना जाता है कि राम का जन्म अयोध्या में हुआ था यह भी वैसा की मामला है, आस्था को संवैधानिक नैतिकता से नहीं जोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में पिछले 1,400 साल से ट्रिपल तलाक का प्रचलन है, इसे गैर-इस्लामी नहीं कहा जा सकता है.

ये भी पढ़ें-
राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास, PM बोले- आज ऐतिहासिक दिन

राज्यसभा के अंदर सरकार ने यूं जीती तीन तलाक पर 'जंग'

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 30, 2019, 9:49 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...