हफ्ते में 55 घंटे तक काम पड़ रहा है 'दिल' पर भारी, हल्के में न लें WHO की चेतावनी

WHO ने लंबे वक्त तक काम करने को लेकर चेतावनी दी.

WHO ने लंबे वक्त तक काम करने को लेकर चेतावनी दी.

दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण ने बहुत कुछ एक झटके में बदलकर रख दिया. हमारी जीवनशैली, काम करने का तरीका और काम करने के घंटे भी. इसी बदलाव से जुड़ी WHO और लेबर ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि हफ्ते में 55 घंटे तक अगर आप काम करते हैं, तो ये आपकी सेहत पर बेहद बुरा असर डाल रहा है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के आने के बाद दुनिया भर में लोगों की लाइफस्टाइल काफी बदली है. सबसे बड़ा बदलाव है वर्क फ्रॉम होम और टार्गेट का प्रेशर. पहले जहां दफ्तर में जाकर कर्मचारी 8-9 घंटे तक काम करते थे, वहीं अब घर से काम करते हुए उन्हें करीब-करीब दोगुना वक्त तक काम करना पड़ता है. इसी मुद्दे पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि हफ्ते में 55 घंटे या इससे ज्यादा काम करने वाले की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है. यूनाइटेड नेशन में हुए एक अध्ययन से ये बात निकल कर आई है कि एक हफ्ते में 55 घंटे से ज्यादा काम करने से आपको दिल की बीमारी और स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय मजदूर संगठन एजेंसी की ये रिपोर्ट दुनिया भर में लंबे वक्त तक काम करने के तरीके में बदलाव ला सकता है.

क्या कहती है WHO और लेबर ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट?

विश्व स्वास्थ्य संगठन और मजदूर संगठन की इस रिपोर्ट लंबे वक्त तक काम करने के खतरों को बताता है. इस रिपोर्ट में वैश्विक आकलन पेश किया गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और स्वास्थ्य विभाग की निदेशक मारिया नेयरा का कहना है कि अब वक्त आ चुका है कि सरकार, नियोक्ता और कर्मचारी इस बात को गंभीरता से लें कि ज्यादा वक्त तक काम करना जिंदगी को खतरे में डालना है. उन्होंने कहा शोध से मिले तथ्‍यों के जरिये हम उन श्रमिकों की जान बचाना चाहते हैं, जो अब भी लंबे समय तक काम में जुट रहते हैं. बता दें कि डब्‍ल्‍यूएचओ और अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन का यह शोध 194 देशों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है. शोध में 2000 से लेकर 2016 तक के आंकड़े जुटाए गए हैं. WHO और लेबर ऑर्गेनाइजेशन की संयुक्त रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि 2016 में सिर्फ लंबे वक्त तक काम करने की वजह से 7 लाख 45 हजार लोग स्ट्रोक और इस्केमिक हार्ट डिजीज़ के चलते जान गंवा चुके हैं. यह संख्या साल 2000 के मुकाबले करीब 30 फीसदी ज्‍यादा थी.

क्यों खतरनाक है '55 घंटे वाला काम'?
अध्ययन बताता है कि हफ्ते में 55 घंटे या ज्यादा काम करने से दिल के दौरे का खतरे में 35 फीसदी इज़ाफा हो जाता है, वहीं दिल की बीमारी से मौत की आशंका 17 फीसदी बढ़ जाती है. अध्ययन से मालूम चला कि 2016 में 55 घंटे काम करने की वजह से 3 लाख 98,000 लोगों की मौत स्ट्रोक से हुई और 3 लाख 47,000 दिल की बीमारी की वजह से चल बसे. 2000 से 2016 के बीच दिल की बीमारी से मरने वालों में 42 फीसद का इज़ाफा देखने को मिला. ये दुनिया भर के वर्किंग लोगों के लिए खतरे की घंटी है.

महामारी ने बढ़ाई टेंशन, WFH ने काम ने घंटे

कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में जहां लोगों पर वर्क फ्रॉम होम के दौरान घंटों लैपटॉप पर नजरें गड़ाए बैठे रहते हैं, वहीं तमाम कंपनियों पर खुद को दोबारा खड़ा करने का प्रेशर है. ऐसे में काम की अवधि भी बढ़ी है और तनाव भी. शोध में कहा गया है कि हर हफ्ते 35-40 घंटे काम करने वालों की तुलना में 55 घंटे या उससे ज्‍यादा काम करने वालों में 35 फीसदी लोग स्ट्रोक का शिकार हुए और 17 फीसदी लोगों की जान जोखिम में होती है. लंबे समय तक काम करने के साइड इफेक्ट्स से चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया के कर्मचारी सबसे ज्‍यादा प्रभावित हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सप्‍ताह में 55 घंटे से ज्यादा काम करने वाली आदत में सुधार को बेहद जरूरी बताया है. डब्‍ल्‍यूएचओ के प्रमुख टूड्रॉस एडनॉम घेब्रेसियस ने कहा कि महामारी के दौरान अनुमान के तौर पर 9 फीसदी लोग लंबे समय तक काम कर रहे हैं. ऐसे लोगों में स्ट्रेस से होने वाली बीमारियों के लक्षण काफी बढ़े हैं.



सरकार और कंपनियां निकालें समाधान

विश्व स्वास्थ्य संठगन का मानना है कि इसके लिए सरकार, नियोक्ता और कर्मचारी को ही रास्ता निकालना होगा. जिससे काम भी हो और किसी के स्वास्थ्य पर असर भी ना पड़े. वरना बदलती जीवनशैली और 360 डिग्री पलट चुके परिदृश्य में लोगों की सेहत उनकी उम्र 10 साल तक कम रही है.

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