CJI पर सवाल उठाने वाले जस्टिस चेलामेश्वर कौन हैं?

जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ की प्रेस कॉन्फेंस ने देश भर में भूचाल खड़ा कर दिया है. चार जजों ने चीफ चस्टिस ऑफ इंडिया के काम काज पर सवाल उठाए. आखिर कौन हैं जस्टिस जे चेलामेश्वर

News18Hindi
Updated: January 13, 2018, 8:03 AM IST
CJI पर सवाल उठाने वाले जस्टिस चेलामेश्वर कौन हैं?
जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ की प्रेस कॉन्फेंस ने देश भर में भूचाल खड़ा कर दिया है. चार जजों ने चीफ चस्टिस ऑफ इंडिया के काम काज पर सवाल उठाए. आखिर कौन हैं जस्टिस जे चेलामेश्वर
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Updated: January 13, 2018, 8:03 AM IST
जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ की प्रेस कॉन्फेंस ने देश भर में भूचाल खड़ा कर दिया है.  चारों जजों ने चीफ चस्टिस ऑफ इंडिया के काम काज पर सवाल उठाए. जानिए कौन हैं जस्टिस जे चेलामेश्वर...

कहां से पढ़ाई की ?
जस्टिस जे चेलामेश्वर का जन्म 13 जून 1953 को आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में हुआ था. हाई स्कूल तक की शिक्षा मछलीपट्टनम में हुई. इसके बाद चेलामेश्वर ने मद्रास लोयला कॉलेज से फिजिक्स में ग्रेजुएशन पूरी की. 1976 में उन्होंने आन्ध्र विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की.

कब क्या ज़िम्मेदारी मिली?


  • लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1995 में चेलामेश्वर को वरिष्ठ अधिवक्ता के पद पर नियुक्त किया गया.

  • 1995 में ही उन्हें आन्ध्र प्रदेश सरकार में अतिरिक्त एडवोकेट जनरल की ज़िम्मेदारी दी गई.

  • दो साल के अंदर ही चेलामेश्वर को आन्ध्र हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज बना दिया गया.

  • मई 1999 में चेलामेश्वर को आन्ध्र प्रदेश हाईकोर्ट का जज बना दिया गया

  • 2007 में जस्टिस चेलामेश्वर गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनाए गए

  • बाद में इन्हें केरल हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया

  • अक्टूबर 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने


चेलामेश्वर की बेबाक राय और फैसले

नेशनल ज्यूडिशियल अपाइंटमेंट कमीशन (NAJC): न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण का निर्धारण एक कोलेजियम व्यवस्था के तहत होता रहा है. इसमें सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं. बाद में इसे सिफारिश विचार और स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजा जात था. लेकिन साल 2015 में जस्टिस चेलामेश्वर ने इसके खिलाफ जम कर आवाज उठाई उनका मानना था कि इस व्यवस्था के तहत पार्दशिता नहीं रहती. बाद में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति और तबादले के लिए सरकार ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग एक्ट बनाया.

मेडिकिल काउंसिल में घूस कांड: नंवबर 2017 में जस्टिस चेलामेश्वर की बेंच के सामने वकील कामिनी जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज में घूसकांड को लेकर एक याचिका दाखिल की. याचिका में कहा गया पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस की निगरानी में SIT से कराई जाए. इस मामले में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आरोपी हैं और उन पर आरोप है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम पर पैसे लिए.  जस्टिस चेलामेश्वर ने इस मामले को पांच जजों की बेंच को भेज दिया. लेकिन अगले ही दिन जस्टिस चेलामेश्वर के इस फैसले पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने रोक लगा दी.

सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66A-  जस्टिस चेलामेश्वर की बेंच ने ही सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66A को निरस्त किया था. उन्होंने इस विवादास्पद प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया था. इस कानून के तहत कथित रूप से अपमानजनक विवरण वेबसाइट्स पर पोस्ट करने पर व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर सकती थी.

आधार कार्ड- आधार कार्ड के उपयोग पर भी जस्टिस चेलामेश्वर ने कई बार मोदी सरकार की आलोचना की थी.
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