कोलकाता में पुल हादसे के लिए ज़िम्मेदार कौन?

कोलकाता के दक्षिण भाग में स्थित माजेरहाट ब्रिज का एक अंश मंगलवार शाम 4.40 बजे गिर गया. अब तक के आंकड़ों के मुताबिक एक व्यक्ति की मौत हो गई है और 24 घायल बताए जा रहे हैं.

मोहम्मद शफी शम्सी | News18Hindi
Updated: September 5, 2018, 8:31 PM IST
कोलकाता में पुल हादसे के लिए ज़िम्मेदार कौन?
कोलकाता में पुल हादसे के लिए ज़िम्मेदार कौन? (image credit: PTI)
मोहम्मद शफी शम्सी
मोहम्मद शफी शम्सी | News18Hindi
Updated: September 5, 2018, 8:31 PM IST
कोलकाता के दक्षिण भाग में स्थित माजेरहाट ब्रिज का एक अंश मंगलवार शाम 4.40 बजे गिर गया. अब तक के आंकड़ों के मुताबिक एक व्यक्ति की मौत हो गई है और 24 घायल बताए जा रहे हैं. सवाल उठता है कि पुल गिरने की घटना के लिए ज़िम्मेदार कौन है?

माजेरहाट ब्रिज कोलकाता को दक्षिण बंगाल से जोड़ता है. इसे कोलकाता के ट्रैफिक सिस्टम की रीढ़ कहना गलत नहीं होगा. यही नहीं, इसके नीचे से एक महत्वपूर्ण रेलवे लाइन गुजरती है जिसका हज़ारों लोग इस्तेमाल करते हैं. अब ये बात सामने आ रही है की बंगाल सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग में मरम्मत के लिए टेंडर तो आमंत्रित किए गए, लेकिन ढीले रवैये के कारण मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया.

स्पॉट पर 5 गाड़ियां और 3 मोटरसाइकलें भी गिरीं. क्रेन गाडियां लाई गईं और मंगलवार रात भर काम चला. एनडीआरएफ सहित कई एजेंसियां राहत कार्य में शामिल हुए. हालांकि मलबा साफ होने में अभी कुछ समय लगेगा क्योंकि भारी कॉन्क्रीट के टुकड़े पड़े हुए हैं. पास एक गंदे पानी का नाला गुज़रता है, ब्रिज की दूसरी ओर मेट्रो रेल का एक प्रोजेक्ट भी है जो दक्षिण कोलकाता को मध्य से जोड़ेगा.

पुल गिरने पर राजनीति कई बार पहले भी देखी गई है. देश के विभिन्न स्थानों पर पुल गिरने की घटनाएं पहले भी हुई हैं. माजेरहाट पुल गिरने से बंगाल में क्या कोई राजनीतिक लाभ किसी को मिलेगा? 2016 में उत्तर कोलकाता में एक पुल गिरा था. आज भी उसके मरम्मत का काम पूरा नहीं हो पाया है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा की जांच होगी. बीजेपी के चंद्र बोस ने न्यूज़18 वेब से कहा की सीबीआई जैसी कोई केंद्रीय एजेंसी इस हादसे की जांच करे. वहीं सीपीएम के नेता फवाद हालिम ने न्यूज़18 वेब से कहा की केवल जांच ना हो, जो भी दोषी पाए जाएं उन्हें दंड दिया जाए.

इस हादसे के लिए किसी ना किसी को ज़िम्मेदार ठहराया ही जाएगा. स्वाभाविक है. लेकिन कोलकाता जैसे पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर वाले शहर में एक बड़े पैमाने पर नवीनीकरण की आवश्यकता है. नए प्रोजेक्ट्स तो बहुत हो गए, पुराने इलाकों की हालत खस्ता है. बड़ा बाज़ार और मध्य कोलकाता में ऐसी इमारतें हैं जिनमें सैंकड़ों लोग रह रहे हैं. जब कोई इमारत गिरती है, जलती है, तो इल्ज़ाम खड़े होते हैं.

सिटी ऑफ जॉय इन सारे दुखों के साथ रहती रही है और संभवतः आगे भी रहेगी. पर इसका मतलब ये नहीं की हर हादसे के बाद सबक ना लिया जाए. कोलकाता का नवीनीकरण कोई इच्छा मात्र प्रोजेक्ट नहीं, एक प्राथमिकता है.
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