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इनसाइड स्टोरी: कौन है उमर खालिद, क्यों रहा विवादों में?

इनसाइड स्टोरी: कौन है उमर खालिद, क्यों रहा विवादों में?

जेएनयू विवाद में अगर किसी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है तो वो है उमर खालिद। आखिर कौन है उमर खालिद और किन-किन विवादों से उसका नाता रहा है, यही जानने की कोशिश की आईबीएनखबर ने।

नई दिल्ली।  जेएनयू विवाद में अगर किसी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है तो वो है उमर खालिद। आखिर कौन है उमर खालिद और किन-किन विवादों से उसका नाता रहा है, यही जानने की कोशिश की है आईबीएनखबर ने। साथ ही ये पड़ताल भी कि खालिद और उसके साथियों के अचानक सामने आने की वजह क्या रही, सरेंडर की बजाय ये गिरफ्तार क्यों होना चाहते हैं, और इस विवाद पर क्या कहते हैं जेएनयू के छात्र।

‘मेरा नाम उमर खालिद ज़रूर है, लेकिन मैं आतंकी नहीं हूं’, इन शब्दों के साथ जब उमर खालिद ने अपनी सफाई दी तो एक सवाल जरूर सबके सामने आया कि अगर उसने कुछ गलत नहीं किया तो फिर इतने दिनों तक छिप कर क्यों रहा। यही नहीं, खालिद की वापसी से कैंपस में इन आरोपियों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। क्या खालिद अपने साथियों के साथ कैंपस में ही कहीं छिपा था। सूत्र बताते हैं कि ये किसी खास मौके की तलाश में थे ताकि सामने आ सकें।

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खालिद और उसके साथियों का कहना है कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ करके पूरे मामले में फंसाया जा रहा है, लेकिन जेनयू के कई लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं है कि जब खालिद ने इस तरह के नारे लगाए हों, लेकिन उसके आतंकियों से संबंध की बात गलत है। आरोप है कि जेएनयू के साबरमती ढाबे पर अफजल गुरु की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन (डीएसयू) के छात्रनेता उमर खालिद ने भी देशविरोधी नारे लगाए थे। इस कार्यक्रम के बाद से ही खालिद अपने साथियों के साथ गायब हो गया था। इसी मामले में छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया देशद्रोह के आरोप अभी भी जेल में है।

जेएनयू के एक प्रोफेसर नाम न जाहिर करने के शर्त पर कहते हैं कि कन्हैया को मिल रही सहानुभूति ने खालिद को बाहर आने पर मजबूर कर दिया है। इस समय लोगों में खालिद की छवि आतंकी की तरह बनती जा रही है, जबकि कन्हैया को लोगों का साथ मिल रहा है और उसके बाहर निकलने की संभावना है। ऐसे में उमर खालिद के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता था।

कौन है उमर खालिद?


करीब तीन दशक पहले खालिद का परिवार महाराष्ट्र के अमरावती के तालेगांव से दिल्ली आया था। उमर खालिद अपने परिवार के साथ जाकिरनगर में रहता है। लेकिन उमर को यहां शायद ही कभी देखा जाता हो। कहा जाता है कि खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास दिल्ली में ही ऊर्दू की मैगजिन ‘अफकार-ए-मिल्ली’ चलाते हैं। उमर खालिद जेएनयू में स्कूल ऑफ सोशल साइंस से इतिहास में पीएचडी कर रहा है। जेएनयू से वो पहले हिस्ट्री में एमए और एमफिल कर चुका है।

उमर खालिद को जेएनयू के ताप्ती छात्रावास में कमरा नंबर 168 मिला हुआ है। उमर को छात्रावास की सुविधा देने पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। छात्रावास को लेकर जेएनयू के दिशा निर्देशों के मुताबिक दिल्ली में रहने वालों छात्रों को यह सुविधा तभी दी जाएगी जब छात्रावास उपलब्ध हो, लेकिन छात्रावास के अभाव में कई बाहरी छात्रों को कैंपस के बाहर रहना पड़ता है, बावजूद इसके खालिद को यह सुविधा दी गई। खालिद जिस संगठन डीएसयू से जुड़ा है, उसे सीपीआई माओवादी समर्थित छात्र संगठन माना जाता है।

9 फरवरी को देश विरोधी नारे लगाने के आरोप के बाद से अचानक गायब हुए उमर खालिद को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस ने जगह जगह छापेमारी की। खबरें उड़ीं कि उमर खालिद का संबंध अलगाववादियों या किसी आतंकी संगठन से है। हालांकि अब तक पुलिस ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। उमर खालिद और डीएसयू के बारे में दिल्ली पुलिस सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले ही आगाह कर चुकी थी। खबरें ये भी चलीं कि खालिद कई विश्वविद्यालयों में आतंकी अफजल गुरु का गुणगान करवाना चाहता था। जेएनयू जैसे कार्यक्रम की उसने देश के 18 विश्वविद्यालयों में करने की योजना बनाई थी।

हालांकि जेएनयू छात्र ऐसा नहीं मानते। जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंध में पीएचडी कर रहे आशीष कहते हैं कि इस कैंपस में खुलकर विचार रखने की आजादी है और खालिद भी उन्ही में से एक है। आशीष कहते हैं कि यहां सत्ता विरोधी नारे आए दिन लगते रहते हैं लेकिन देश विरोधी नारे नहीं लगते। एक के बाद एक वीडियो के आने के बाद आशीष कहते हैं कि इससे सच्चाई सामने आना मुश्किल है और जांच एजेंसिंयों के जांच के बाद ही सब सामने आ पाएगा। आशीष कहते हैं कि खालिद को आतंकी बताना काफी हैरान करने वाली बात है लेकिन जल्द ही सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।

कई विवादों में आया नाम

जेएनयू छात्रों के मुताबिक उमर खालिद ने अपने साथियों के साथ कैंपस में हिंदू देवी देवताओं की आपत्तिजनक तस्वीरें लगाकर नफरत पैदा करने की कोशिश की थी। यही नहीं उमर खालिद उस समारोह में भी शामिल था जब आतंकी अफजल गुरु की फांसी पर जेएनयू कैंपस में मातम मनाया गया था। खालिद इससे पहले कई मौकों पर कश्मीर की आजादी की मांग करता रहा है। 2010 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ जवानों की हत्या पर जश्न मनाने वाले लोगों में उमर खालिद भी शामिल था और इसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पिछले साल गृह मंत्रालय को भी एक रिपोर्ट भेजी थी। पर न तो उमर खालिद के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही डीएसयू पर।

26 जनवरी, 2015 को ‘इंटरनेशनल फूड फेस्टिवल’ के बहाने कश्मीर को अलग देश दिखाकर उसका स्टाल लगाया गया। जब नवरात्रि के दौरान पूरा देश देवी दुर्गा की आराधना कर रहा था, उसी वक्त जेएनयू में दुर्गा का अपमान करने वाले पर्चे, पोस्टर जारी कर न सिर्फ अशांति फैलाई गई बल्कि महिषासुर को महिमामंडित कर महिषासुर शहादत दिवस का आयोजन किया गया। इन कई आयोजनों से उमर खालिद पहले भी सवालों के घेरे में आ चुका है।

‘तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा’ ‘भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी...’ ‘कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी...’ ‘अफजल के अरमानों को मंजिल तक ले जाएंगे...’ ‘बंदूक के बल पर... आजादी...’ ‘ अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं....’ जैसे नारों को छात्र कितना सही मानते हैं। जेएनयू से एमए कर रहे अनुराग कहते हैं कि जेएनयू हमेशा से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए जाना जाता रहा है और कहा जाता है कि यहां समाज में छुपा लिए जाने वाले मुद्दों पर सीमा से आगे बढ़कर बहस की जाती रही है। चाहे वो समलैंगिकता की स्वतंत्रता पर बहस हो या महिलाओं को स्वछंद रहने और काम करने की आजादी का मुद्दा, यहां हर मुद्दे पर गंभीर बहस का आयोजन होता है। अनुराग कहते हैं कि इसी वैचारिक खुलेपन को खत्म करने के लिए अतिवादियों का आड़ लेकर सरकार यहां एजेंडा भी चलाना चाहती है।

 

 

 

Tags: Jnu, Pakistan

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