अपना शहर चुनें

States

किसान आंदोलन से अलग हुए वीएम सिंह मेनका गांधी के हैं ममेरे भाई, उनके ही खिलाफ लड़ा था चुनाव

वीएम सिंह मेनका गांधी के विशेष सचिव भी रह चुके हैं. (Photo-ANI)
वीएम सिंह मेनका गांधी के विशेष सचिव भी रह चुके हैं. (Photo-ANI)

Who is VM Singh: राष्‍ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेता वीएम सिंह ने मंगलवार को ट्रैक्टर परेड में हुए हंगामे के बाद अपने संगठन को किसान आंदोलन से अलग कर लिया है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमीर नेताओं में शुमार वीएम सिंह मेनका गांधी के ममेरे भाई लगते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 5:03 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर निकाली गई किसान ट्रैक्टर रैली (Kisan Tractor Rally) के दौरान मचे बवाल और हिंसा के बाद राष्‍ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेता वीएम सिंह ने खुद को किसान आंदोलन से अलग कर लिया है. वीएम सिंह ने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मैं ऐसे आंदोलन का हिस्सा नहीं बन सकता जिसकी दिशा अलग हो. वीएम सिंह ने कहा कि हम यहां एमएसपी के लिए आए थे गुंडागर्दी के लिए नहीं. वीएम सिंह ने ट्रैक्टर परेड के दौरान उपद्रव करने वालों के खिलाफ एक्शन की भी मांग की. वीएम सिंह उत्तर प्रदेश के करोड़पति किसानों की फेहरिस्त में शुमार हैं.

कौन हैं वीएम सिंह
वीएम सिंह भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के मामा के बेटे लगते हैं. हालांकि वह 2004 में अपनी बहन मेनका और 2009 में भांजे वरुण गांधी के खिलाफ चुनाव में खड़े हो चुके हैं. हालांकि दोनों ही बार वीएम सिंह को हार का सामना करना पड़ा था. पीलीभीत से विधायक रह चुके वीएम सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमीर राजनेता और किसान नेताओं में गिने जाते हैं. राष्ट्रीय किसान मज़दूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए सफल कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी.


ये भी पढ़ें- दो यूनियनों ने खुद को किया आंदोलन से अलग, संयुक्‍त मोर्चा ने कहा- हमने उन्हें पहले ही निकाल दिया था


चुनाव जीतने में की थी मेनका गांधी की मदद
वीएम सिंह ने 2016 में एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके और मेनका के बीच घनिष्ठ संबंध थे. उन्होंने यह भी दावा किया था कि जब 1989 में मेनका गांधी जनता दल की उम्मीदवार के तौर पर पीलीभीत से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं तब उन्होंने मेनका की चुनाव जीतने में मदद की थी. चुनाव जीतने के बाद मेनका केंद्रीय पर्यावरण और वन राज्य मंत्री बनीं और तब वीएम सिंह उनके विशेष सचिव बने. वीएम सिंह ने 1993 में जनता दल के टिकट पर पीलीभीत से चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें जीत मिली.

1996 में वीएम सिंह और मेनका के रास्ते अलग हो गए. इन दोनों के ही परिवारों ने करीब तीन दशकों तक संपत्ति के लिए लड़ाई लड़ी जो कि 2005 में खत्म हुई. वीएम सिंह ने बताया कि जब यह लड़ाई चल रही थी तब भी उनके बीच सौहार्दपूर्ण संबंध थे.

20 सालों से लगातार हार रहे चुनाव
वीएम सिंह को पिछले 20 साल से चुनावों में लगातार हार का सामना करना पड़ा है. 2002 में वीएम सिंह ने पूरनपुर से निर्दलीय चुनाव लड़ा. 2004 में कांग्रेस के टिकट पर मेनका गांधी के खिलाफ संसदीय चुनाव लड़ा. 2007 में एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर पूरनपुर से चुनाव लड़ा. 2009 में वीएम सिंह मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी के खिलाफ कांग्रेस के टिकट में मैदान में उतरे. 2012 विधानसभा चुनाव में वह उत्तर प्रदेश के बरखेड़ा से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े. इन सभी चुनावों में वीएम सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा.

एक इंटव्यू में वीएम सिंह ने बताया था कि बंटवारे के समय उनके दादा और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने भारत और पाकिस्तान में अपनी जमीनों की अदला-बदली कर ली थी. जिसके चलते उन्हें मुजफ्फरनगर में 1200 एकड़ जमीन और उत्तर पश्चिमी दिल्ली के पंजाब खोर में 300 एकड़ जमीन मिली थी. पंजाब खोर में अभी भी वीएम सिंह के पास 200 एकड़ जमीन है.

ये भी पढ़ें- कृषि कानूनों के विरोध में अभय सिंह चौटाला ने हरियाणा विधानसभा से दिया इस्तीफा

वीएम सिंह दावा करते हैं कि 1967-68 में शुरू हुई हरित क्रांति उनके दिल्ली वाले खेत से ही शुरू हुई थी. वीएम सिंह यह भी दावा करते हैं उनके दादा और मेनका गांधी के नाना सर दातार सिंह ने साहीवाल गाय की ब्रीड की खोज की थी.

2009 में 632 करोड़ रुपये आंकी गई थी संपत्ति
2009 के चुनावों में वीएम सिंह ने 632 करोड़ रुपये की संपत्ति की घोषणा की थी. उनके चुनावी एफिडेविट के मुताबिक उनके पास 400 करोड़ रुपये की कीमत की खेती योग्य भूमि और 200 करोड़ रुपये की कीमत वाली गैर-खेती योग्य भूमि है. उनके घर समेत सारी संपत्ति की कीमत 632 करोड़ रुपये आंकी गई थी.

वीएम सिंह ने 2017 विधानसभा चुनावों से पहले 2015 में राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी की शुरुआत की थी. उनके 21 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे और सभी की जमानत जब्त हो गई थी. 2019 के आम चुनावों में वह कांग्रेस से टिकट मिलने की उम्मीद कर रहे थे हालांकि उन्हें टिकट नहीं दिया गया.

वीएम सिंह कई बार मेनका गांधी के पशुओं के प्रति प्रेम को लेकर सवाल उठा चुके हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज