कोवैक्सीन को इमर्जेंसी यूज़ की मंजूरी देने के लिए WHO ने भारत बायोटेक से मांगी अधिक जानकारी

कई सारे देश अपने यहां आवागमन के लिए टीकाकरण को अनिवार्य बना रहे हैं. फाइल फोटो

कई सारे देश अपने यहां आवागमन के लिए टीकाकरण को अनिवार्य बना रहे हैं. फाइल फोटो

फिलहाल इस सूची में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड, मॉडर्ना, फाइजर, एस्ट्राजेनेका (2), जेनसेन (अमेरिका और नीदरलैंड्स) और सिनोफार्म/बीबीआईपी का नाम शामिल है.

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नई दिल्ली. विश्व स्वास्थ्य संगठन की इमरजेंसी यूज लिस्टिंग (EUL) में शामिल होने की कोशिश में लगी कोवैक्सीन के सामने नई परेशानी आ गई है। WHO ने इस वैक्सीन को सूची में शामिल करने के लिए भारत बायोटेक से और अधिक जानकारी की मांग की है। हैदराबाद की कंपनी ने 19 अप्रैल को संगठन के सामने 'एक्सप्रेशन और इंट्रेस्ट' दाखिल किया था। फिलहाल इस सूची में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड, मॉडर्ना, फाइजर, एस्ट्राजेनेका (2), जेनसेन (अमेरिका और नीदरलैंड्स) और सिनोफार्म/बीबीआईपी का नाम शामिल है.

सूत्रों ने जानकारी दी है कि भारत बायोटेक ने सरकार को बता दिया है कि कंपनी की तरफ से WHO को 90 प्रतिशत डॉक्यूमेंट्स दिए जा चुके हैं. कंपनी ने केंद्र सरकार को जानकारी दी है कि बचे हुए कागजात जून तक दाखिल किए जाने का अनुमान है. भारत बायोटेक ने एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट जमा किया है, लेकिन इसके संबंध में अभी 'और जानकारी की जरूरत है.' डब्ल्युएचओ ने कहा था कि मीटिंग मई-जून में तय है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद कंपनी को एक डोजियर दाखिल करना होगा. इस डोजियर के स्वीकार किए जाने के बाद कोवैक्सीन को अपनी सूची में शामिल करने से पहले डब्ल्युएचओ की तरफ से आंकलन किया जाएगा. इसके बाद वैक्सीन के EUL में शामिल किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. अब इस दौरान हर स्तर पर हफ्तों का समय लग सकता है.

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भाषा के अनुसार, एजेंसी ने कहा कि यदि मूल्यांकन के लिए पेश हुआ प्रोडक्ट सूची में शामिल किए जाने के के मानदंडों को पूरा करता है, तो डब्ल्यूएचओ बड़े स्तर पर इसके परिणाम प्रकाशित करेगा करेगा. EUL प्रक्रिया की अवधि वैक्सीन निर्माता की तरफ से प्रस्तुत किए गए आंकड़ों की गुणवत्ता और डब्ल्यूएचओ के मानदंडों को पूरा करने वाले आंकड़ों पर निर्भर करती है.




विदेश जाने की नहीं है अनुमति!

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, WHO के EUL में शामिल नहीं होने के कारण कोवैक्सीन प्राप्त करने वालों को अन्य देश में प्रवेश करने में परेशानी हो सकती है. कहा जा रहा है कि कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए पॉलिसी जारी की हैं. इनके तहत कई देश उन्हीं वैक्सीन को अनुमति दे रहे हैं, जिन्हें उनके नियामकों की तरफ से मंजूरी मिल चुकी हो या वे WHO की सूची में शामिल हों.

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