NCSC में 100 दिन से अधिकारियों का राज, आखिर कौन सुनेगा अनुसूचित जाति की फरियाद?


अनुसूचित जाति पर होने अत्याचारों के खिलाफ काम करने वाली संस्था का हाल

अनुसूचित जाति पर होने अत्याचारों के खिलाफ काम करने वाली संस्था का हाल

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में 31 मई से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य कोई नहीं है. आयोग में शिकायतों का अंबार लग गया है. कैसे होगी प्रताड़ना के मामलों की सुनवाई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 9, 2020, 9:15 PM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (National Commission for Scheduled Castes) के ऑफिस में इस वक्त शिकायती ख़तों का अंबार है. उनमें दबे-कुचले लोगों की उम्मीदें बंद हैं. लेकिन, इन उम्मीदों पर सुनवाई करने वाला कोई नहीं है. 31 मई से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य सभी के पद खाली हैं. इसके सदस्यों को सिविल कोर्ट की पावर होती है, इसलिए प्रताड़ना के मामलों में इस वर्ग के लोगों को यहां से फौरन न्याय मिल जाता है. लेकिन आयोग में इन दिनों सिर्फ अधिकारियों का राज है, जिनके पास न तो अधिकार हैं और न अनुसूचित जाति के लोगों को न्याय दिलाने का माइंडसेट.

आयोग में कितने केस?

सूत्रों का कहना है कि रामशंकर कठेरिया से पहले चेयरमैन रहे पीएल पूनिया के वक्त आयोग में अनुसूचित जातियों के करीब 40 हजार केस पेंडिंग थे. उनके बाद भी काफी दिनों तक यह पद खाली था. बाद के सदस्यों ने अभियान चलाकर केस निपटाए. फिर भी करीब 10 हजार मामले रह गए थे. बताया गया है कि आयोग में देश भर से हर रोज करीब 80 से 90 कंप्लेंट आती रहती हैं. जिनमें लोग अत्याचार से बचाने के लिए फरियाद कर रहे होते हैं. लेकिन यहां के अधिकारियों से कोई प्रताड़ित व्यक्ति न्याय की उम्मीद कैसे करे.

पीड़ितों को यहां से रहती है न्याय की उम्मीद
अनुसूचित जाति के लोग अपने उत्पीड़न (Atrocities against SC) के खिलाफ काम करने वाली सबसे बड़ी संवैधानिक संस्था NCSC में तब फरियाद करते हैं जब सिस्टम से विश्वास उठ जाता है. जब पुलिस (Police), प्रशासन सब भेदभाव करने लगते हैं, लोकसेवक अपने कर्तव्य का पालन नहीं करते तब भी लोग इस आयोग से उम्मीद रखते हैं. आज के हालात में आयोग में सबसे बड़ी हैसियत में उसके सचिव हैं.

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फरियाद के ख़त (File Photo)




सिविल जज की पावर

लेकिन सूत्रों का कहना है कि किसी प्रताड़ना की शिकायत पर सुनवाई तभी हो सकती है जब कोई सदस्य मौजूद हो. सचिव न तो कोई निर्देश दे सकता है और न तो एक्शन ले सकता है. किसी अधिकारी को तलब करने, समन, वारंट जारी करने और इंस्ट्रक्शन देने का अधिकार सिर्फ चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों के पास है. यह एकमात्र आयोग है जिसके सदस्यों को सिविल जज (Civil judge) की पावर है.

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बीजेपी (BJP) अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रभारी रह चुके शांत प्रकाश जाटव का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द इन पदों को भरना चाहिए ताकि फ़रियादियों में न्‍याय की उम्‍मीद जगे. जब पद ही खाली रहेंगे तो उत्‍पीड़न के शिकार लोग कहां जाएंगे.

आयोग के खाली पद कब भरे जाएंगे इस बारे में कई बार केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत, राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और रतनलाल कटारिया से बात करने की कोशिश की गई लेकिन किसी के यहां से कोई टिप्पणी नहीं मिली. इनमें से किसी का पक्ष मिलते ही उसे अपडेट कर दिया जाएगा.
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