पश्चिम बंगाल में अपनों के बीच फंसी BJP, तथागत रॉय की एंट्री के बाद उठे सीएम कैंडिडेट पर सवाल

पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पास कई ऐसे चेहरे हैं जो खुद को सीएम पद का उम्मीदवार मानते हैं.

West Bengal Assembly elections 2021: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले इस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि बीजेपी की ओर से सीएम कैंडिडेट कौन होगा. इधर, पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय की एंट्री ने राज्य की राजनीति में नई सरगर्मियों को जन्म दे दिया है.

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    आशिका सिंह
    कोलकाता.
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति से विदा लेकर पहले त्रिपुरा फिर नागालैंड और मेघालय के राज्यपाल रहे तथागत रॉय (Tathagata Roy) पश्चिम बंगाल की राजनीति में लौट चुके हैं और आने के पहले ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद तक में रुचि दिखा दी है. ऐसे में पहले ही गुटबाज़ी झेल रही राज्य बीजेपी में एक और धड़ा उभर आया है. पहले से ही राज्य बीजेपी की कमान संभालने वाले दिलीप घोष (Dilip Ghosh) को सीएम पद का भी उम्मीदवार माना जा रहा है जिन्हें टीएमसी बाहरी बताती है.

    वहीं आसनसोल से सांसद और केंद्रीय मंत्री बने बाबुल सुप्रियो का धड़ा भी उन्हें भावी सीएम के रूप में प्रस्तुत करता है. इस बीच टीएमसी से भाजपा में आये ममता के करीबी रहे मुकुल रॉय का अपना धड़ा है तो अभिनेत्री से नेता बनीं सांसद लॉकेट चटर्जी के करीबी भी उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल मानते हैं.

    तथागत रॉय  ने सक्रिय राजनीति में लौटने की बात कही 
    वहीं इस बीच रविवार को कोलकाता पहुंचे तथागत रॉय का स्वागत कोलकाता एयरपोर्ट पर कई पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से किया. जिसके बाद उन्होंने न सिर्फ सक्रिय राजनीति में लौटने की बात कही बल्कि ये भी माना की बीजेपी में गुटबाज़ी है और उम्र के लिहाज़ से वे ही पश्चिम बंगाल बीजेपी में सबसे वरिष्ठ नेता हैं.

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में एंट्री लेने की पुष्टि खुद तथागत रॉय ने की है. उन्होंने कहा, 'मैं लौट चुका हूं सक्रिय राजनीति में आज कैलाश जी से मिलने जा रहा हूं. गुटबाज़ी किस दल में नहीं होती है? सीएम कौन होगा चुनाव के बाद तय होगा. उम्र के हिसाब से मैं सबसे वरिष्ठ नेता हूं.'

    बीजेपी में सभी कार्यकर्ता, कोई सीएम कैंडिडेट नहीं
    रॉय के इस बयान के बाद बीजेपी नेता शिशिर बाजोरिया का कहना है, कोई गुटबाज़ी नहीं है, सब एक हैं. तथागत दा लौट आये हैं वे भी एक कार्यकर्ता की तरह काम करेंगे जैसे सब करते हैं. बीजेपी में सभी कार्यकर्ता ही हैं. कोई कैंडिडेट नहीं होगा.

    अपना गढ़ बचाने में जुटी TMC
    एक तरफ बीजेपी आपस की गुटबाजी में फंसी हुई है तो दूसरी तरफ टीएमसी दूर से नजारा देखने और राजनीति को भांपने में लगी हुई है. टीएमसी अपने गढ़ को बचाने की कवायद में बीजेपी की ये गुटबाज़ी पार्टी को रास आ रही है. टीएमसी नेता मदन मित्रा ने कहा, 'तथागत रॉय का नाम अवसरवादी रॉय होना चाहिए था.' मदन मित्रा ने कहा कि तथागत रॉय मौकापरस्त हैं. बीजेपी में तो ये भी नेता हैं वो भी नेता हैं और सभी सीएम बनना चाहते हैं, पर बंगाल का चेहरा सिर्फ ममता बनर्जी हैं.

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