सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर पर त्रावणकोर शाही परिवार का होगा अधिकार

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर पर त्रावणकोर शाही परिवार का होगा अधिकार
पद्मनाभस्वामी मंदिर के अधिकार पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला.

बता दें कि केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने साल 2011 में पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sri Padmanabhaswamy Temple) के अधिकार और संपत्ति को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए इस पर राज्य सरकार का अधिकार बताया था. केरल हाईकोर्ट के इस आदेश को पूर्व त्रावणकोर शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी थी.

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  • Last Updated: July 13, 2020, 12:26 PM IST
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कोच्चि. केरल (Kerala) के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sree Padmanabhaswamy Temple) के प्रशासन और उसकी संपत्तियों के अधिकारी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट का फैसला पटलते हुए देश के सबसे अधिक संपत्ति वाले मंदिरों में से एक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का प्रबंधन का अधिकार त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार को दिया है. बताया जाता है कि मंदिर के पास करी​ब दो लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है.

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट का 31 जनवरी 2011 का वह आदेश सोमवार को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार से ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की पूंजी और प्रबंधन का नियंत्रण लेने के लिए न्यास गठित करने को कहा गया था. इसी के साथ शीर्ष न्यायालय ने केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन में त्रावणकोर शाही परिवार के अधिकारों को बरकरार रखा.

न्यायमूर्ति यू यू ललित की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अंतरिम कदम के तौर पर मंदिर के मामलों के प्रबंधन वाली प्रशासनिक समिति की अध्यक्षता तिरुवनंतपुरम के जिला न्यायाधीश करेंगे. शीर्ष अदालत ने इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया.इनमें से एक याचिका त्रावणकोर शाही परिवार के कानूनी प्रतिनिधियों ने दायर की थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 8 साल से अधिक समय तक सुनवाई हुई अब इस पर फैसला आना बाकी है. इस मामले में अप्रैल में हुई सुनवाई के बाद स्टिस ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.



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5000 साल पुराना है पद्मनाभस्वामी मंदिर
मंदिर कब बना, इसपर कोई पक्का प्रमाण नहीं मिलता है. इतिहासकार डॉ.एल.के.रवि वर्मा के अनुसार मंदिर लगभग 5000 साल पुराना है, जब मानव सभ्यता कलियुग में पहुंची थी. वैसे मंदिर के स्ट्रक्चर के लिहाज से देखें तो माना जाता है कि केरल के तिरुअनंतपुरम में बने पद्मनाभस्वामी मंदिर की स्थापना सोलहवीं सदी में त्रावणकोर के राजाओं ने की थी. इसके बाद से ही यहां के राजा इस मंदिर को मानते रहे. साल 1750 में महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को पद्मनाभ दास घोषित कर दिया. इसके साथ ही पूरा का पूरा राजघराना मंदिर की सेवा में जुट गया. अब भी शाही घराने के अधीन एक प्राइवेट ट्रस्ट मंदिर की देखरेख कर रहा है.
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