स्मार्ट डिजिटल सर्टिफिकेट पर काम कर रहा WHO, जानें वैक्सीन पासपोर्ट से कैसे होगा अलग

विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना से बचाव के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है. (फाइल फोटो)

विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना से बचाव के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है. (फाइल फोटो)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक अधिकारी हैंस क्लूगे ने कहा है कि हम चाहते हैं कि वैक्सीन प्राप्त कर चुके लोग डॉक्यूमेंट को जरूर तैयार करवाएं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ये वैक्सीन पासपोर्ट (Vaccine Passport) से अलग है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 10:46 PM IST
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नई दिल्ली. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस वक्त स्मार्ट डिजिटल सर्टिफिकेट (Smart Digital Certificate) पर काम कर रहा है. संगठन के एक अधिकारी हैंस क्लूगे ने कहा है कि हम चाहते हैं कि वैक्सीन प्राप्त कर चुके लोग डॉक्यूमेंट जरूर तैयार करवाएं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ये वैक्सीन पासपोर्ट से अलग है.

क्लूगे ने कहा कि ये सर्टिफिकेट वैक्सीन पासपोर्ट से अलग होगा. हम इस वक्त ये नहीं कह सकते हैं कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए वैक्सीनेशन होना आवश्यक है. अभी ऐसी शर्त नहीं रखी जा सकती. लेकिन उनका कहना है कि वैक्सीनेशन के बाद लोगों का डॉक्यूमेंटेशन होना चाहिए चाहे वो डिजिटल फॉर्मेट में हो या फिर दस्तावेज के रूप में. हालांकि उन्होंने डिजिटल फॉर्मेट को ज्यादा प्राथमिकता दी है.

वैक्सीन पासपोर्ट की श्रेणी में न रखने के पीछे सबसे अहम वजह है वैक्सीन की कमी 

तकनीकी तौर पर वैक्सीन पासपोर्ट और डिजिटल सर्टिफिकेट को अलग-अलग रखने के पीछे क्लूगे ने वैक्सीन की कमी को कारण बताया है. उनके मुताबिक अगर इस वक्त वैक्सीनेशन को यात्रा का आधार बना दिया गया तो इससे दुनिया में वैक्सीन वितरण में अन्याय होगा. और इसका सबसे पहला असर कमजोर लोगों पर होगा. उन्होंने कहा कि हमने महामारी में जो एक बात सीखी है वो ये है कि इस दौरान सबसे ज्यादा असर कमजोर लोगों पर पड़ा है.
वैक्सीन पासपोर्ट की दिशा में काम कर रहे कई देश

गौरतलब है कि इस वक्त दुनियाभर में फ्लाइट्स की व्यवस्था नॉर्मल करने की कोशिश की जा रही है. ऐसे में यात्रियों के लिए अपने देशों से वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट और यात्रा की अनुमति के परमिशन जैसे कागजात अनिवार्य किए जा सकते हैं. कई देशों में इस प्रक्रिया की शुरुआत हो भी चुकी है. ये कागजात ई-फॉर्मैट या डिजिटल फॉर्मैट में होंगे. इन्हें ही वैक्सीन पासपोर्ट कहा जा रहा है. इजरायल सबसे पहला देश है, जिसने ऐसी व्यवस्था लागू की. वहां इसे ग्रीन पासपोर्ट कहा जा रहा है.
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