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'महाराजा' के लिए 160 बार हुई थी पूछताछ, फिर भी नहीं मिला कोई खरीदार

एयर इंडिया
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मंत्रालय ने कहा, 'लेनदेन सलाहकार ने सूचित किया है कि एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के लिए निकाले गए रुचि पत्र (ईओआई) के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.' बयान में कहा गया है कि इस पर आगे की कार्रवाई उचित तरीके से तय की जाएगी. ईओआई को इस प्रक्रिया के लिए लेनदेन सलाहकार नियुक्त किया गया था.

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केंद्र सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की एयरवेज कंपनी 'एयर इंडिया' यानी 'महाराजा' के रणनीतिक विनिवेश के लिए कोई बोली नहीं मिली है. घाटे में चल रही 'महाराजा' की बिक्री के लिए नागर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) से 160 बार पूछताछ की गई थी. कई मशहूर बायर्स ने एयर इंडिया को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन 31 मई को डेडलाइन खत्म होने तक 'महाराजा' को कोई खरीदार नहीं मिला.

मंत्रालय ने कहा, 'लेनदेन सलाहकार ने सूचित किया है कि एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के लिए निकाले गए रुचि पत्र (ईओआई) के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.' बयान में कहा गया है कि इस पर आगे की कार्रवाई उचित तरीके से तय की जाएगी. ईओआई को इस प्रक्रिया के लिए लेनदेन सलाहकार नियुक्त किया गया था.

बता दें कि सरकार ने राष्ट्रीय विमानन कंपनी में 76 प्रतिशत इक्विटी शेयर पूंजी की बिक्री का प्रस्ताव किया है. इसके मुताबिक, एयर इंडिया का मैनेजमेंट कंट्रोल भी निजी कंपनी को दिया जाएगा. इस सौदे के तहत एयर इंडिया के अलावा उसकी कम लागत वाली यूनिट एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की भी बिक्री की जाएगी.



एयर इंडिया को खरीदार नहीं मिलने के कई कारण हैं. खासतौर पर इस एयरलाइन का घाटे में होना. कई एयर-कवरेज नेटवर्क और लॉन्ग टर्म वफादार कर्मचारियों के बावजूद इस कंपनी को घाटे से बाहर निकालना मुमकिन नहीं था. संभावित बायर्स या बोली लगाने वालों ने कंपनी में 24% हिस्सेदारी बनाए रखने के केंद्र के फैसले पर नाखुशी जाहिर की. क्योंकि, इससे कर्मचारियों को रिटेन करने और हायरिंग पॉलिसी को लेकर भ्रम पैदा होता.

जानकारों का यह भी मानना है कि बायर्स के लिए एक निश्चित समय तक एयर इंडिया ब्रांड को रिटेन करना केंद्र सरकार की मार्केटिंग स्ट्रैटजी के खिलाफ होता. कई मीडिया रिपोर्ट्स का सुझाव है कि उच्च लागत की वजह से डोमेस्टिक कैरियर्स के पेमेंट में देरी होती है, जिससे टैरिफ बढ़ता है. टैरिफ की ऊंची दर से मैनपावर की उपयोगिता पर भी असर पड़ेगा.

वहीं, पिछले दो महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में 14% की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले साल की कुल कीमत में 50% तक ज्यादा है. इसके चलते एयरलाइन के स्टॉक्स में भी गिरावट आती है.

एयर इंडिया की तुलना में जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड के शेयर इस साल आधे बढ़े फिर इसमें गिरावट दर्ज की गई. पिछले साल, जेट एयरवेज के लिए ईंधन का खर्च कुल लागत का 29% हिस्सा रहा. जबकि, इंडिगो के ईंधन का खर्च कुल लागत का 39 फीसदी रहा.


बता दें कि एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज एयर इंडिया और सिंगापुर की एसएटीएस लिमिटेड का संयुक्त उद्यम है. इससे पहले इसी महीने सरकार ने ईओआई जमा करने की तारीख को बढ़ाकर 31 मई किया था. पहले यह समयसीमा 14 मई थी. पात्र बोलीदाताओं को 15 जून तक सूचित किया जाना था.

सरकार एयरलाइन में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखेगी. 28 मार्च को जारी ज्ञापन के अनुसार बोली जीतने वाली कंपनी को कम से कम तीन साल तक एयरलाइन में अपने निवेश को कायम रखना होगा. मार्च, 2017 के अंत तक एयरलाइन पर कुल 48,000 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था.
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