राज्यसभा सदस्यता के विवाद पर पूर्व CJI गोगोई- 'वकीलों के दोस्त एक्टिविस्ट जजों से क्यों नहीं पूछते सवाल?'

राज्यसभा सदस्यता के विवाद पर पूर्व CJI गोगोई- 'वकीलों के दोस्त एक्टिविस्ट जजों से क्यों नहीं पूछते सवाल?'
पूर्व CJI रंजन गोगोई ने खुद पर लगे कई आरोपों का जवाब दिया है (फाइल फोटो)

जस्टिस गोगोई (Justice Gogoi) ने 2016 में जारी की गई विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी (Vidhi Centre for Legal Policy) की एक रिपोर्ट का हवाला देकर कहा कि संवैधानिक अदालत के 100 रिटायर हुए जजों में से 70 को कोई न कोई काम सौंपा गया है.

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नई दिल्ली. राज्यसभा (Rajya Sabha) की सदस्यता ग्रहण करने के मामले पर आलोचना झेल रहे पूर्व CJI रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने बुधवार को अपने ही बनाए शब्द "एक्टिविस्ट न्यायाधीशों" (Activist Judges) शब्द के जरिए उन न्यायाधीशों को निशाना बनाया, जो अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) के तुरंत बाद न्यायपालिका पर सवाल उठाना शुरू करते हैं लेकिन कार्यकाल के दौरान चुप रहते हैं.

जस्टिस गोगोई (Justice Gogoi) ने कहा, "ये एक्टिविस्ट जज (Activist Judges) किसके साथ काम कर रहे हैं? ये सब कहने के लिए उन्हें कौन प्लेटफॉर्म दे रहा है? इस पर कोई सवाल नहीं पूछा गया."

'रिटायरमेंट के बाद भी चुनिंदा न्यायाधीश करते रहते हैं कार्य'
जस्टिस गोगोई ने इस बात पर भी जोर दिया कि न्यायाधीशों की एक और श्रेणी है, जो अपने काम के दौरान वकीलों के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करते हैं, और कोई अगर ध्यान दे तो देखेगा कि रिटायरमेंट के बाद भी कुछ चुनिंदा न्यायाधीशों के लिए व्यावसायिक मध्यस्थता कार्य आते रहते हैं.



भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "मध्यस्थता (arbitration works) कैसे और क्यों केवल कुछ न्यायाधीशों के लिए आती है और दूसरों के लिए नहीं? फिर से, इस पर कोई सवाल नहीं पूछा जाता."



'केवल तीसरी श्रेणी के न्यायाधीशों पर उठाए जाते हैं सवाल'
जस्टिस गोगोई ने ये बयान नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (National Law Universities) के पूर्व छात्रों के संघ के जरिए आयोजित एक वेबिनार में दिए. उनके अनुसार, "वास्तव में एक न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति के बाद की नियुक्तियों की तीन श्रेणियां होती हैं, जिसमें एक "एक्टिविस्ट न्यायाधीशों" की है, (दूसरी) जो व्यावसायिक मध्यस्थता कर रहे हैं और (तीसरी) जो अन्य प्रकार के असाइनमेंट को स्वीकार कर रहे हैं.' जस्टिस गोगोई ने पूछा, "केवल यह तीसरी श्रेणी क्यों है जो सभी हमले झेलती है. अन्य दो के बारे में कोई सवाल क्यों नहीं पूछा जाता है?"

'सेवानिवृत्ति के बाद काम करना व्यक्ति विशेष पर निर्भर'
जस्टिस गोगोई ने 2016 में जारी की गई विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी की एक रिपोर्ट का हवाला देकर कहा कि संवैधानिक अदालत के 100 रिटायर हुए जजों में से 70 को कोई न कोई काम सौंपा गया है. न्यायमूर्ति गोगोई ने जोर दिया, "क्या सभी ने समझौता किया था? क्या इसका मतलब है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता किया गया था? यह एक व्यक्तिगत धारणा है. जब तक यह आपके मन में स्पष्ट है, कोई समस्या नहीं है. यदि कोई न्यायाधीश अपने कार्यों में सही है, तो सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद काम करना सही है. यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर रहता है."

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