COVID-19 Test: आखिर क्यों कोरोना के कुछ टेस्ट फॉल्स पॉजिटिव आते हैं?

क्या है फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट की वजह

क्या है फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट की वजह

COVID-19 Test: कोरोना संक्रमण की जांच के लिए दो तरह के टेस्ट होते हैं- आरटी-पीसीआर और एंटीजन टेस्ट. दुनिया भर के डॉक्टर आरटी-पीसीआर को सबसे अच्छा मानते हैं.

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नई दिल्ली. पिछले दिनों मेलबर्न से जुड़े कोरोना के दो केस को अब फॉल्स पॉजिटिव (False Positive) की श्रेणी में डाल दिया गया है. इसे सरकारी आंकड़ों से हटा दिया गया है. कोरोना यानी SARS-CoV-2 को टेस्ट करना का सबसे कारगर तरीका RT-PCR टेस्ट है. अगर किसी को कोरोना का संक्रमण नहीं है तो इसकी पूरी संभावना है कि रिपोर्ट नेगेटिव आएगी. इसके अलावा इस टेस्ट में संक्रमित लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने भी पूरी गारंटी होती है. हालांकि कुछ केस में ऐसा भी होता है कि संक्रमण न होने के वाबजूद कुछ लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है. इसे फॉल्स पॉजिटिव कहा जाता है.

कोरोना संक्रमण की जांच के लिए दो तरह के टेस्ट होते हैं- आरटी-पीसीआर और एंटीजन टेस्ट. दुनिया भर के डॉक्टर आरटी-पीसीआर को सबसे अच्छा मानते हैं. आरटी-पीसीआर का मतलब है रियल टाइम रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन. इस टेस्ट में नाक या गले से एक नमूना (स्वैब) लिया जाता है. मरीज़ की नाक या गले से स्वैब लेने के बाद उसे टेस्ट के लिए लैब में भेजा जाता है.

क्या है फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट की वजह?

इसकी सबसे बड़ी वजह है लैबोरेट्रीज एरर और ऑफ-टारगेट रिएक्शन हैं. यानी परीक्षण किसी ऐसी चीज के साथ क्रॉस-रिएक्शन करना जो SARS-CoV-2 नहीं है. लैब में कलर्कियल एरर. गलत सैंपल का परीक्षण. इस अलावा कोई व्यक्ति जिसे COVID-19 हुआ है और वह ठीक हो गया है, वह भी फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट परिणाम दिखा सकता है.


कितना कॉमन है फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट?

फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट के लिए हमें ये देखना होगा कि कितनी फीसदी ऐसी रिपोर्ट आ रही है. एक अध्ययन से पता चला है कि फॉल्स पॉजिटिव की रेट 0-16.7 फीसदी है. फॉल्स निगेटिव रेट की संख्या 1.8-58 फीसदी रहती है. हर 1 लाख लोग जिन्हें संक्रमण नहीं रहता है उनमें 4 हजार फॉल्स पॉजिटिव रिजल्ट भी आते हैं.

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