सचिन पायलट-अशोक गहलोत विवाद पर क्यों खुलकर बैटिंग कर रही है कांग्रेस की युवा ब्रिगेड?

सचिन पायलट-अशोक गहलोत विवाद पर क्यों खुलकर बैटिंग कर रही है कांग्रेस की युवा ब्रिगेड?
सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस ने अपनी सभी डिस्ट्रिक्ट कमेटी भंग करने का ऐलान कर दिया है (File Photo PTI)

राजस्थान में चल रही कांग्रेस की कलह कथा के बीच राहुल गांधी खेमे से आने वाले कांग्रेस के युवा नेता एक-एक करके अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. इन नेताओं के ट्विट में कांग्रेस नेतृत्व के लिए संदेश भी है.

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नई दिल्ली. राजस्थान में कांग्रेस (Congress) की कलह कथा के बहाने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) खेमे से आने वाले युवा नेता भी अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. पार्टी के निर्णयों को लेकर सवाल उठाते इनके बोल कुछ कहते हैं. उनकी टोन बता रही है कि असंतोष तो कई राज्यों में फैला हुआ है. संजय निरूपम (Sanjay Nirupam), प्रिया दत्त, कुलदीप बिश्नोई और जितिन प्रसाद (Jitin prasad) जैसे नेताओं ने खुलकर सचिन पायलट के पक्ष में आवाज उठाई है. कपिल सिब्बल, शशि थरूर और कार्ति चिदंबरम समेत कई नेताओं ने पायलट को लेकर बयान दिया और कहा कि केंद्रीय नेतृत्व को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए.

राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदौरिया का कहना है कि जिन नेताओं ने सचिन पायलट (Sachin Pilot) और अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) विवाद के बहाने आवाज उठाई है वो सभी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्हें अपने भविष्य की चिंता है. जो भविष्य में कांग्रेस की पहली पंक्ति का नेता बनने की लाइन में हैं उन्हें लगता है कि जब पार्टी खत्म होती जाएगी तो वे उसमें रहकर क्या करेंगे. पार्टी में राज्यों के ये क्षत्रप चाहते हैं कि पहले कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व स्पष्ट हो और वो अपने निर्णयों में स्पष्टता लाए. नेताओं के बीच शक्ति संतुलन बैठाए.
इसे भी पढ़ें: कब खत्म होगी कांग्रेस के बुजुर्ग और युवा नेताओं की जंग?आईए जानते हैं किसने क्या कहामहाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय निरूपम ने कहा-''बेहतर होगा, पार्टी सचिन पायलट को समझाए और रोके. शायद पार्टी में कुछ लोग यह सोच रहे हैं कि उसे जाना है तो जाए, हम नहीं रोकेंगे. यह सोच आज के संदर्भ में गलत है. माना कि किसी एक के जाने से पार्टी खत्म नहीं होती. लेकिन एक-एक कर सभी चले गए तो पार्टी में बचेगा कौन?''कांग्रेस नेत्री प्रिया दत्त ने खुलकर सचिन पायलट का समर्थन करते हुए कहा 'एक और दोस्त ने पार्टी छोड़ दी. साचिन और ज्योतिरादित्य सहकर्मी और अच्छे दोस्त थे. दुर्भाग्य से हमारी पार्टी ने 2 दिग्गज युवा नेताओं को खो दिया है. मैं नहीं मानती कि महत्वाकांक्षी होना गलत है. उन्होंने सबसे कठिन समय में कड़ी मेहनत की है.'हरियाणा के कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई ने भी कांग्रेस पार्टी को अपनी सोच बदलने की नसीहत दी. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस हाईकमान से प्रार्थना है, जैसे सिंधिया चले गए, उससे पार्टी को जबरदस्त नुकसान हुआ. मैंने उस वक्त भी कहा था. कांग्रेस पार्टी को हर हालत में सचिन को मनाना चाहिए. सचिन एक कद्दावर नेता हैं, उनके जाने से पार्टी को नुकसान होगा. ऐसे ही बहुत से नेता है, जो कांग्रेस पार्टी को मजबूती देना चाहते हैं. कांग्रेस को उनको आगे लेकर आना चाहिए. कांग्रेस को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी.ये भी पढ़ें: सियासी संकट का एपिसेंटर क्यों बनता है गुरुग्राम?

मनमोहन सिंह सरकार (Manmohan singh government) में मंत्री रहे यूपी के कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद भी सचिन पायलट के साथ खड़े नजर आए. प्रसाद ने ट्वीट किया- "सचिन पायलट सिर्फ मेरे साथ काम करने वाले नहीं बल्कि मेरे दोस्त भी हैं. इस बात को कोई नकार नहीं सकता कि उन्होंने पूरे समर्पण के साथ पार्टी के लिए काम किया है. उम्मीद करता हूं कि ये स्थिति जल्द सही हो जाएगी. ऐसी नौबत आई इससे दुखी भी हूं."
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