Rajasthan : कांग्रेस आलाकमान की वजह से नहीं, गहलोत की दूरदर्शिता से बची सरकार

Rajasthan : कांग्रेस आलाकमान की वजह से नहीं, गहलोत की दूरदर्शिता से बची सरकार
दिल्ली में सचिन और उनके समर्थकों की कांग्रेस आलाकमान के साथ मुलाकात और जयपुर में शर्मा-गहलोत की मीटिंग के साथ ही राजस्थान में 32 दिनों से चली आ रही सियासी रार खत्म हो गई.

राजस्थान (Rajasthan Politocal Crisis) में लगभग तीन दशकों तक बीजेपी के भैरव सिंह शेखावत और हरदेव जोशी, कांग्रेस से शिवचरण माथुर का वर्चस्व था. 1998 में कांग्रेस में नेता के रूप में उभरे अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और 2003 में बीजेपी की वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के साथ यह सिलसिला समाप्त हुआ. इन दोनों के हाथ ही दो दशकों से अधिक समय तक राजस्थान की सत्ता की कमान गई है.

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  • Last Updated: August 11, 2020, 12:16 PM IST
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(सुमित पांडे)

नई दिल्ली/जयपुर. राजस्थान की सरकार (Rajasthan Politocal Crisis) पर मंडराते खतरे के बादल अब छंटते दिखाई दे रहे हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की मुखालफत करने वाले बागी विधायकों में से भंवरलाल शर्मा (Bhanwar Lal Sharma) जयपुर लौट आए हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की. इस मुलाकात में शर्मा ने अपने गिले शिकवे दूर होने की बात कही है. भंवर लाल शर्मा राजस्थान की राजनीति में कई तख्तापलट के गवाह रहे हैं. उन्होंने दिसंबर 1996 में भैरों सिंह शेखावत की भी मुखालफत की थी. हालांकि, इस बगावत के बाद भी शेखावत की सरकार बच गई थी. लेकिन, तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक गहलोत की कड़ी आपत्ति के बाद भी आखिरकार जाट नेता शीश राम ओला की मदद से शर्मा की राजस्थान कांग्रेस में एंट्री हो गई थी.

हालांकि, इस बार समीकरण पहले जैसे नहीं थे. सोमवार को गहलोत के साथ अपने लंबे समय के मतभेदों के कारण भंवर लाल शर्मा को पता था कि राज्य की राजनीति में बने रहने के लिए उन्हें आवेदन कहां करना है. इसलिए जब सचिन पायलट के नेतृत्व में अन्य विद्रोही विधायक प्रियंका गांधी और अहमद पटेल के साथ फोटो खिंचवा रहे थे, तब भंवर लाल शर्मा जयपुर में मुख्यमंत्री गहलोत से मिल रहे थे. उन्होंने गहलोत से मिलकर बिना शर्त वफादारी और समर्थन का वादा किया.



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बेशक सचिन पायलट समेत अन्य लोगों के पास दिल्ली जाकर डैमेज कंट्रोल करने का विकल्प हो सकता है, लेकिन शर्मा अच्छी तरह से जानते हैं कि उनका राजनीतिक करियर जयपुर तक ही है. इसलिए उन्होंने दिल्ली जाने के बजाय गहलोत से मिलना ज्यादा पसंद किया.

दिल्ली में सचिन और उनके समर्थकों की कांग्रेस आलाकमान के साथ मुलाकात और जयपुर में शर्मा-गहलोत की मीटिंग के साथ ही राजस्थान में 32 दिनों से चली आ रही सियासी रार खत्म हो गई. हालांकि, इस सियासी ड्रामे में दोनों नाटककार के व्यक्तित्व और पटकथा कांग्रेस की स्थिति के बारे में बहुत कुछ बताते हैं.

राजस्थान सरकार केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किसी भी हस्तक्षेप के कारण नहीं बची है. गहलोत और बागी विधायकों की लंबी लड़ाई में गहलोत की सूझबूझ के कारण ही सत्ता बच गई है. भीतरघात का सामना करते हुए गहलोत बीजेपी के खिलाफ एक कठोर राजनेता और सत्ता में बने रहने के दृढ़ संकल्प के माध्यम से यहां तक पहुंच पाए हैं. सोमवार शाम तक कांग्रेस के नेताओं ने ट्वीट कर कांग्रेस नेतृत्व को बधाई दी, लेकिन हर कोई जानता था कि ये सब गहलोत की सियासी समझ के कारण ही हो पाया है.

बेशक सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की पार्टी में वापसी हो गई है, लेकिन इस वापसी की शर्तों और पुनर्मूल्यांकन को विस्तार से नहीं बताया गया है. सुझाव हैं कि दिल्ली में संगठनात्मक जिम्मेदारी के साथ पायलट को नियुक्त किया जा सकता है. फिलहाल उन्हें डिप्टी सीएम और पीसीसी का पद नहीं दिया जाएगा. वहीं, आने वाले दिनों में गहलोत अपनी कैबिनेट में कुछ फेरबदल कर बागी विधायकों को रिप्लेस भी कर सकते हैं.

पिछले सप्ताह जैसलमेर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में बागी विधायकों की वापसी के किसी भी प्रयास का साफ तौर पर विरोध नहीं किया गया. प्रभारी मंत्री और गहलोत के सहयोगी शांति धारीवाल का सुझाव था कि बागी नेता सचिन पायलट को AICC में व्यस्त रखें. राजस्थान के प्रमुख संगठनात्मक व्यवस्था में सभी पायलट वफादारों को पिछले एक महीने में बदल दिया गया है. गहलोत ने हालांकि अपने विधायकों को "लोकतंत्र को बचाने" के लिए भारी हार्दिकता के साथ स्वीकार करने की बात कहकर सियासी घमासान को खत्म करने की बात कही.

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उधर, बताया जा रहा है कि पायलट सशर्त पार्टी में अपनी वापसी कर रहे हैं और ऐसे में अब कांग्रेस सुप्रीमो या गांधी परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मनाना है. सूत्रों के अनुसार पार्टी आलाकमान अब 14 अगस्त को विधानसभा सत्र से पहले गहलोत को मनाने में जुटा है. वहीं, बीजेपी भी प्रस्तावित विधानसभा सत्र को लेकर व्हिप जारी करने जा रही है.
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