• Home
  • »
  • News
  • »
  • nation
  • »
  • आज विशेष समारोह में असम सरकार क्‍यों जला रही गैंडे की 2500 सींग, यहां जानिये

आज विशेष समारोह में असम सरकार क्‍यों जला रही गैंडे की 2500 सींग, यहां जानिये

गैंडे की सींग की होती है तस्‍करी. (File pic)

गैंडे की सींग की होती है तस्‍करी. (File pic)

Assam: यह समारोह काजीरंगा नेशनल पार्क के बोकाखाट में आयोजित होगा. इसमें असम के मुख्‍यमंत्री हिमंत बिस्‍व सरमा बतौर चीफ गेस्‍ट शामिल होंगे. असम के वाइल्‍डलाइफ वार्डन एमके यादव का कहना है कि यह शिकारियों और तस्‍करों को खास संदेश होगा कि इन वस्‍तुओं की कोई कीमत नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

    गुवाहाटी. असम (Assam) की सरकार 22 सितंबर को वर्ल्‍ड राइनो डे (World Rhino Day) के मौके पर आयोजित विशेष समारोह में गैंडों की 2500 सींग (Rhino Horns) के भंडार को जलाने जा रही है. राज्‍य कैबिनेट ने यह घोषणा पिछले हफ्ते वन विभाग की ओर से कई दिनों तक गैंडों की सींग का दोबारा वेरिफिकेशन किए जाने के बाद की.

    यह समारोह काजीरंगा नेशनल पार्क के बोकाखाट में आयोजित होगा. इसमें असम के मुख्‍यमंत्री हिमंत बिस्‍व सरमा बतौर चीफ गेस्‍ट शामिल होंगे. उनके अलावा भी कई राजनीतिक लोग इसमें मौजूद रहेंगे. यहां सार्वजनिक तौर पर गैंडों को बचाने का प्रचार किया जाएगा. असम के वाइल्‍डलाइफ वार्डन एमके यादव का कहना है कि यह शिकारियों और तस्‍करों को खास संदेश होगा कि इन वस्‍तुओं की कोई कीमत नहीं है. हालांकि अवैध बाजार में इन सींग की कीमत अधिक हो सकती है.

  • गैंडों पर अवैध शिकार का खतरा

    वन विभाग की ओर से कहा गया है कि पारंपरिक चीनी इलाज में गैंडे के सींग का इस्‍तेमाल कैंसर से लेकर कई अन्‍य बीमारियों में होता है. वियतनाम में गैंडे का सींग रखना स्टेटस सिंबल माना जाता है. इन देशों में मांग के कारण गैंडों पर अवैध शिकार का खतरा हमेशा बना रहता है.

    आरानयक एनजीओ के सेक्रेटरी जनरल और गैंडों को बचाने की दिशा में काम करने वाले बिबहाब तालूकदार का कहना है कि भारत कन्‍वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इनडेंजर्ड स्‍पे‍शीज ऑफ वाइल्‍ड फ्लोरा एंड फौना का हस्‍ताक्षरित सदस्‍य है. देश में क‍हीं भी सींग बेचना गैर कानूनी है. खजाने में इसके सड़ने न देने से इसे जलाने का फैसला साफ संदेश देता है कि यह कोई दवा नहीं है.

  • ये सींग इन सालों में कहां रखे थे?

    दशकों से राज्य भर के कोषागारों में सींगों का भंडार किया गया है. प्राकृतिक कारणों से या अवैध शिकार के कारण एक गैंडे के मरने के बाद उसके सींग राज्य के कोषागार में वन विभाग की देखरेख में रखा जाता है.
  • अगस्त और सितंबर के दौरान वन विभाग ने सात वन्यजीव क्षेत्रों (मोरीगांव, मानस, मंगलदाई, गुवाहाटी, बोकाखाट, नगांव और तेजपुर) में फैले कोषागारों में ‘हॉर्न रीवेरिफिकेशन’ किया और 2,500 से अधिक सींगों की जांच की. यह कई चरण की प्रक्रिया थी, जिसमें एक विशेषज्ञ समिति ने अन्य चीजों के अलावा, प्रत्येक सींग के आनुवंशिक नमूने के लिए डीएनए की जांच, टैग, तौल, माप की. इस समिति में डीएफओ, वन्यजीव विशेषज्ञ, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और तकनीशियन शामिल थे. इसका उद्देश्य सींगों को फिर से गिनना और फिर से सत्यापित करना था. जबकि 5 फीसदी सींगों, जिनमें विशेषताएं थीं, उन्‍हें अलग रख लिया गया. यह वेरिफिकेशन 12 सितंबर को खत्‍म हुआ.

  • क्या ऐसा पहले हुआ है?

    पहले कभी भी सींगों को इस तरह से कभी भी सार्वजनिक रूप से नष्ट नहीं किया गया है. 2016 में एक आरटीआई कार्यकर्ता दिलीप नाथ के आरोपों के बाद एक दोबारा वेरिफिकेशन या सत्‍यापन की प्रक्रिया शुरू हुई थी. आरोप था कि वन विभाग के कर्मचारियों का एक वर्ग अवैध रूप से कोषागारों में सींग का व्यापार कर रहा था और उन्हें नकली सींगों के साथ बदल रहा था. हालांकि वेरिफिकेशन में पाया गया कि पांच सींगों को छोड़कर सभी असली थे.
  • अवैध शिकार कितना गंभीर खतरा है?

    2013 और 2014 तक के साल में गैंडों के अवैध शिकार के कई मामले सामने आए. इन दो वर्षों में एक दशक में सबसे अधिक घटनाएं हुईं. हर साल करीब 27. 2015 में यह घटकर 17, 2016 में 18, 2017 और 2018 में 6-6 और 2019 में 3 हो गई है.
  • तालुकदार ने कहा, ‘2020-21 में, यह थोड़ा कम हो गया है, दो-तीन गैंडों का शिकार किया जा रहा है – फिर भी, यह एक सुव्यवस्थित अपराध है और हमें अपने घेरे को कम नहीं होने देना चाहिए.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज