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भोजपुरी स्टार निरहुआ को क्यों करना पड़ा अखिलेश के 'अहीर रेजीमेंट' का समर्थन?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: April 10, 2019, 11:13 AM IST
भोजपुरी स्टार निरहुआ को क्यों करना पड़ा अखिलेश के 'अहीर रेजीमेंट' का समर्थन?
भोजपुरी स्टार निरहुआ (file photo)

अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन हुए हैं. कोई भी यादव नेता चाहकर भी इसका विरोध नहीं कर पाता...

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  • Last Updated: April 10, 2019, 11:13 AM IST
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के लिए तैयार किए गए पार्टी के मेनिफेस्टो में 'अहीर बख्तरबंद रेजिमेंट' बनाने का वादा किया है. दूसरी ओर आजमगढ़ से अखिलेश यादव के ही खिलाफ बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे भोजपुरी फिल्मों के हीरो निरहुआ (दिनेश लाल यादव) ने भी इसका समर्थन कर दिया. सवाल ये है कि आखिर बीजेपी उम्मीदवार को अहीर रेजीमेंट का समर्थन क्यों करना पड़ा?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस रेजीमेंट को बनाने की यादव समाज की मांग काफी पुरानी है. कोई भी यादव नेता चाहकर भी इसका विरोध नहीं कर पाता है. जाहिर है कि इस चुनावी मौसम में निरहुआ भी यादव वोटरों से नाराजगी का खतरा मोल नहीं लेना चाहते. उन्हें वहां यादव वोटरों को रिझाने के लिए ही उतारा गया है.  (ये भी पढ़ें: क्या थी चमार रेजीमेंट, जिसकी बहाली की मांग कर रहे हैं भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर)

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यूपी की राजनीति समुदाय और जाति के इर्द-गिर्द घूमती है और पार्टियों के नेता अपने बिखरते-बनते वोट बैंक को सहेजने के लिए दांव चलते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश का अहीर रेजिमेंट के गठन का वादा यादव वोटबैंक और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की चमार रेजीमेंट की मांग दलित वोटबैंक को रिझाने को लेकर है. ऐसे में निरहुआ की ओर से भी अहीर रेजीमेंट का समर्थन यादव वोटरों को रिझाने के लिए ही किया गया है.

सीएसडीएस ने एक सर्वे किया था जिसके मुताबिक 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यूपी में छह फीसदी यादव वोट हासिल किया था, जो 2014 में बढ़कर 27 फीसदी तक पहुंच गया. 2009 में सपा को यादवों का 73 फीसदी वोट मिला था जो घटकर 2014 में सिर्फ 53 फीसदी रह गया. इस सर्वे को देखें तो यादव वोटबैंक सपा से खिसकता नजर आ रहा है. बीजेपी ने इस वोटबैंक में सेंध लगाई है. इसीलिए उसने अखिलेश यादव के सामने एक यादव को ही उतारा है.

यूपी में ओबीसी की आबादी करीब 54 फीसदी है. जिसमें से सर्वाधिक करीब 20 फीसदी यादव हैं. जबकि कुल आबादी में यादवों की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत है. मुलायम सिंह यादव जब राजनीति में उभरे तो यादव सपा के पक्के वोटर हो गए. लेकिन बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस वोटबैंक में पैठ बनाना शुरू किया.

'24 अकबर रोड' के लेखक रशीद किदवई कहते हैं, “यादव वोटबैंक में सेंध लगाने में बीजेपी इसलिए कामयाब है क्योंकि यादवों की हिंदू धर्म में गहरी आस्था है. वे श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं, ऐसे में बीजेपी धर्म और आस्था के बल पर आसानी से उनके नजदीक हो जाती है. ग्वाल, ढढोर को लेकर जो स्पेस बन रहा है उसमें भी वो सेंध लगा रही है. एक और बड़ा तर्क ये है कि मुलायम सिंह और अखिलेश पूरे यूपी के यादवों को बराबरी की नजर से शायद नहीं देख पाए. इसलिए वो यादव बीजेपी की तरफ गए.”Ahir Regiment, अहीर रेजीमेंट, समाजवादी पार्टी, samajwadi party, अखिलेश यादव, akhilesh yadav,manifesto, घोषणापत्र, Mulayam Singh Yadav, मुलायम सिंह यादव, dinesh lal yadav, दिनेश लाल यादव, nirahua, निरहुआ, Azamgarh lok sabha, आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र, Ministry of Defence, रक्षा मंत्रालय, यादव वोटबैंक, yadav vote bank, chamar regiment, चमार रेजिमेंट, lok sabha election 2019, 2019 लोकसभा चुनाव, भीम आर्मी, bhim army, Chandrashekhar Azad, चंद्रशेखर आजाद, indian army, चमार रेजिमेंट, भारतीय सेना       दरकता यादव वोटबैंक

इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सभाजीत यादव कहते हैं कि 1996 में जब मुलायम सिंह यादव रक्षामंत्री थे तभी बना सकते थे अहीर रेजीमेंट. जब वे पद पर थे तो बनाया नहीं, अब सत्ता से बाहर हैं तो वादा करके यादवों को गुमराह कर रहे हैं. सपा का आधार वोटबैंक यादव रहा है, जिसमें कई पार्टियों ने सेंध लगा ली है, यह वादा इस बिखरते वोटबैंक को बचाने के लिए है.

सभाजीत यादव के मुताबिक, "यादव महासभा की बैठकों में अहीर रेजीमेंट का प्रस्ताव पास होता रहा है, मुलायम सिंह यादव इससे अच्छी तरह वाकिफ हैं." यादव कल्याण सभा रेवाड़ी की ओर से अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन किया गया है. सभा के नेता कहते रहे हैं कि यह रेजिमेंट यादव समाज की मांग ही नहीं बल्कि हक भी है.

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First published: April 9, 2019, 9:00 AM IST
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