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RSS की छाप से लेकर जमीनी नेता होने तक: इन वजहों से बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष चुने गए सुकांत मजूमदार

सुकांत मजूमदार साल 2019 में बलूरघाट लोकसभा से चुने गए थे. (तस्वीर: ट्विटर)

सुकांत मजूमदार साल 2019 में बलूरघाट लोकसभा से चुने गए थे. (तस्वीर: ट्विटर)

बंगाल बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद मजूमदार ने News18 से कहा, 'मुझ पर विश्वास जताने के लिए मैं सभी पार्टी नेताओं का आभार प्रकट करता हूं. पार्टी ने मुझे जिम्मेदारी दी है और मैं इसे पूरी क्षमता के साथ निभाने की कोशिश करूंगा. मेरी दिलीप दा से भी बात हुई है. उनके मार्गदर्शन में पार्टी को आगे लेकर जाऊंगा.'

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    सुजीत नाथ
    कोलकाता.
    भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई (Bangal BJP) के अध्यक्ष रहे दिलीप घोष (Dilip Ghosh) ने पिछले महीने दावा किया था कि वह साल 2022 तक इस पद पर बने रहेंगे. हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (JP Nadda) ने सोमवार को लोकसभा सांसद सुकांत मजूमदार (Sukanta Majumdar) को बंगाल इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया. बीते कुछ हफ्तों से मजूमदार और देबोश्री चौधरी समेत बंगाल के कुछ और नेताओं के नाम इस पद के लिए सामने आ रहे थे. साल 2019 में लोकसभा के लिए बलूरघाट संसदीय क्षेत्र से चुने गए मजूमदार ने उस वक्त टीएमसी की प्रत्याशी अर्पिता घोष को 33,293 मतों से हराया था. उस चुनाव में मजूमदार को जहां 5,39,317 वोट मिले थे तो वहीं घोष को 5,06,024 मतों से ही संतोष करना पड़ा था.

    अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद मजूमदार ने News18 से कहा, ‘मुझ पर विश्वास जताने के लिए मैं सभी पार्टी नेताओं का आभार प्रकट करता हूं. पार्टी ने मुझे जिम्मेदारी दी है और मैं इसे पूरी क्षमता के साथ निभाने की कोशिश करूंगा. मेरी दिलीप दा से भी बात हुई है. उनके मार्गदर्शन में पार्टी को आगे लेकर जाऊंगा.’

    साल 2021 की मई में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद राज्य में टीएमसी की बढ़ती ताकत और पार्टी को आगे बढ़ाने की चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, ‘चुनौतियां हैं और मैं उनका सामना करूंगा. मेरी प्राथमिकता बूथों को मजबूत करना और अपने बूथ/पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होना होगा. मुझे विश्वास है कि हम साल 2019 के आम चुनाव की तुलना में साल 2024 लोकसभा में अधिक सीटें जीतेंगे. मेरी काम करने की अपनी शैली है और यह जल्द ही दिखाई देगी.’

    बंगाल को बांटने की मांग पर भी बोले सुकांत
    प्रदेश भाजपा में मतभेद के संदर्भ में मजूमदार ने कहा कि भाजपा जैसे बड़े परिवार में मतभेद होगा ही. उन्होंने कहा- ‘जब तक हम वैचारिक रूप से एकजुट हैं, तब तक मैं इस बारे में चिंतित नहीं हूं. मेरा मानना है कि जो लोग वैचारिक रूप से भाजपा से जुड़े हैं, वे दूसरी पार्टी में शामिल नहीं होंगे.’ बाबुल सुप्रियो के टीएमसी में शामिल होने के फैसले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग चले गए हैं, उनके बारे में उन्हें कुछ नहीं कहना है. उन्होंने कहा, ‘बाबुल दा मुझसे वरिष्ठ हैं और मुझे लगता है कि बेहतर होता कि वह हमारे साथ पार्टी में ही रहते.’

    उन्होंने बंगाल के ‘विभाजन’ पर भाजपा के रुख को स्पष्ट करने का प्रयास किया. बंगाल बीजेपी चीफ ने कहा -‘कुछ सांसद हैं जिन्होंने उत्तर बंगाल से लोगों की शिकायत लाए लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि भाजपा बंगाल के विभाजन में विश्वास नहीं करती है.’

    बचपन से ही संघ के स्वयंसेवक थे मजूमदार
    मजूमदार का पार्टी में बढ़ना कई लोगों के लिए आश्चर्य की बात थी. लेकिन जो दशकों से बंगाल बीजेपी के साथ हैं, वे जानते हैं कि उन्होंने बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य के रूप में देश की सेवा करने की पूर्व राज्य मंत्री देबोश्री चौधरी के पिता देवी दास चौधरी की उम्मीदों पर खरे कैसे उतरे.

    मजूमदार, देबोश्री चौधरी के रिश्तेदार हैं और जब वह दक्षिण दिनाजपुर के खादिमपुर हाई स्कूल, बालुरघाट में पढ़ते थे. इसी दौरान देबोश्री के पिता ने उन्हें एक संघ कार्यकर्ता के रूप में तैयार किया. मजूमदार के पिता सुशांत कुमार मजूमदार एक सरकारी कर्मचारी थे और माता निबेदिता मजूमदार प्राइमरी स्कूल में टीचर थीं. ऐसा माना जाता है कि वे आरएसएस से जुड़े नहीं थे.

    देबोश्री ने कहा- ‘वह मेरे पिता की वजह से आरएसएस की ओर बढ़े. वह मेरे चचेरे भाई हैं और मुझे उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में बंगाल में बीजेपी और आगे बढ़ेगी. मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि वह पार्टी को एक महत्वपूर्ण लक्ष्य की ओर ले जाने में सक्षम हैं.’ RSS की मजबूत छाप के साथ मजूमदार जमीनी नेता हैं.उन्होंने  पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में बीजेपी का वोट शेयर बढ़ाने में मदद की.

    देबी दास चौधरी और परिवार से मिली प्रेरणा
    उनके गुरु देबी दास चौधरी (देबोश्री के पिता), साल 1967 से 1980 तक अविभाजित दिनाजपुर जिले के बालुरघाट में एक हाई स्कूल शिक्षक और भारतीय जनसंघ (बीजेएस) के अध्यक्ष थे .भारतीय जनसंघ, RSS की राजनीतिक इकाई थी. अध्यक्ष के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान, साल 1975 में भारत में आपातकाल घोषित किया गया था और BJS के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया. बंगाल में कांग्रेस और वामपंथी शासन के दौरान बीजेएस नेताओं के लिए काम करना मुश्किल था, लेकिन देबाश्री और उनके परिवार ने पार्टी की सेवा के लिए बहुत संघर्ष किया.  इसने मजूमदार को संघ और बाद में भाजपा के लिए प्रेरित किया.

    मजूमदार ने उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय से बॉटनी में पीएचडी की है और साल 2005 में एमएससी भी किया. 29 दिसंबर, 1979 को जन्मे मजूमदार सितंबर 2019 से सूचना प्रौद्योगिकी और याचिकाओं पर समिति की स्थायी समिति हैं.क्विजिंग और फुटबॉल में उनकी खास रुचि है.

    सुकांत का स्वागत है- घोष
    वहीं बंगाल बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, ‘मैं सुकांत जी का हमारे नए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में तहे दिल से स्वागत करता हूं. मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं.’

    यह पूछे जाने पर कि राज्य भाजपा अध्यक्ष के रूप में यह उनके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था, घोष ने कहा, ‘मैं 2015 में प्रदेश अध्यक्ष बना था और तब भाजपा राज्य की राजनीति में दिखाई नहीं दे रही थी. साल 2019 में सभी ने हमारा प्रदर्शन देखा और 2021 में हम बंगाल में विपक्षी दल के रूप में उभरे. मैं पार्टी के एक समर्पित सिपाही के रूप में काम करता रहूंगा.’

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