कांग्रेस से क्यों इतनी खफा हैं मायावती, क्या बदल रही है BSP की पॉलिटिक्स?

कांग्रेस से क्यों इतनी खफा हैं मायावती, क्या बदल रही है BSP की पॉलिटिक्स?
इन दिनों कांग्रेस पर हमलावर हैं बसपा प्रमुख मायावती

यूं ही नहीं कांग्रेस से नाराज हैं मायावती. राजस्थान में अशोक गहलोत बीएसपी के 6-6 विधायकों का दो बार कांग्रेस में विलय करवा चुके हैं. क्या मायावती के ट्वीट से बीजेपी को मिल रही संजीवनी

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नई दिल्ली. कभी बीजेपी (BJP) के लिए सबसे बड़ा खतरा रही बहुजन समाज पार्टी (BSP) इस वक्त कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. पार्टी प्रमुख मायावती कांग्रेस शासित राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रही हैं. जो घटना बीजेपी के शासन में हो रही है उसमें भी वो कांग्रेस को लपेट रही हैं. आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि मायावती बीजेपी से अधिक कांग्रेस को निशाने पर लेने लगीं? 2012 से सत्ता से बाहर रह रहीं मायावती क्या अपने पुराने राजनीतिशास्त्र में कुछ बदलाव कर रही हैं. उनका झुकाव कहीं बीजेपी की तरफ तो होता हुआ नजर नहीं आ रहा? या फिर वाकई वो अपने राजस्थानी विधायकों के कांग्रेस में विलय पर सियासी बदला ले रही हैं?

पिछले दो सप्ताह के उनके ट्वीट को देखिए और राजनीतिक हवा किधर से किधर बह रही है इसका अंदाजा लगाइए. फिलहाल, कांग्रेस (Congress) महासचिव प्रियंका गांधी ने बसपा को भाजपा का अघोषित प्रवक्ता करार दिया है. कई राजनीतिक विशेषज्ञों का भी कहना है कि मायावती के बयान राजस्थान में कांग्रेस-बीजेपी के बीच चल रही जंग में बीजेपी नेताओं को हौसला देते नजर आ रहे हैं.






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इस बारे में हमने 'बहनजी: द राइज एंड फॉल ऑफ मायावती' नामक किताब के लेखक अजय बोस से बातचीत की. बोस ने कहा-“मायावती एक ओर कांग्रेस से बदला लेना चाहती हैं तो दूसरी ओर इस बहाने उन्हें भाजपा तंग नहीं करेगी. वैसे भी बीजेपी ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की तरह उन्हें कभी परेशान नहीं किया. भाजपा के साथ नरमी दिखाने के अलावा उनके पास अब कोई चारा नहीं है. मुझे लगता है कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन भी बीजेपी के दबाव में ही तोड़ा होगा. यह सब उनके कोर वोटरों दलित और मुस्लिम को भी दिख रहा है. इससे मायावती (Mayawati) को ही नुकसान होगा.”

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कभी कांग्रेस-बसपा में दोस्ती की ऐसी तस्वीर भी आती थी (File Photo)


बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय का कौन जिम्मेदार?
वरिष्ठ पत्रकार बोस कहते हैं, “बसपा का लगातार पतन हो रहा है. यूपी ही नहीं अन्य राज्यों में भी उसके वोट प्रतिशत में तेजी से गिरावट आई है. दूसरे राज्यों में जहां काफी दलित वोट है वहां पर उसका कोई मजबूत लीडर नहीं है. कोई क्षत्रप नहीं है. इसलिए विधायकों को रोकने वाला कोई था. उन्होंने अपना रास्ता तलाश लिया. हो सकता है कि वो किसी के इशारे पर ही अब अपने 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय के इतने दिन बाद कोर्ट जा रही हों लेकिन इसमें उन्हें फायदा नहीं मिलेगा. क्योंकि सारे विधायक चले गए हैं.”

इसलिए भी कांग्रेस से नाराज हैं मायावती
कांग्रेस से उन्हें इस बात की भी चिढ है कि वो अंदरखाने चंद्रशेखर आजाद को प्रमोट कर रही है. चंद्रशेखर दलित युवाओं का आईकॉन है. उसकी नए तरह की राजनीति है. वो उभरा तो बसपा को बहुत नुकसान होगा. यूपी में प्रियंका गांधी भी बसपा के कोर वोटबैंक दलित-मुस्लिम में ही पैठ बनाने की लगातार कोशिश कर रही हैं. इसलिए मायावती का गुस्सा जायज है लेकिन इससे किसे फायदा होगा, यह उन्हें देखना चाहिए.

गहलोत ने बसपा को दो बार दी राजनीतिक चोटञऑ
मायावती कांग्रेस से यूं ही नाराज नहीं हैं. अशोक गहलोत ने मायावती की पार्टी के विधायकों को कोई पहली बार कांग्रेस में नहीं शामिल करवाया है. वो दो बार बसपा के 6-6 विधायकों का अपनी पार्टी में विलय करवा चुके हैं. 2008 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 96 और बीजेपी को 78 सीटें मिली थीं. तब भी गहलोत ने बसपा के विधायकों का कांग्रेस में विलय करा लिया था. इस बार भी 6 विधायक शामिल करवा लिए. राजस्थान में 17.83 फीसदी दलित वोट हैं और 1998 में उसे 7.6 फीसदी वोट मिले थे.

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अशोक गहलोत ने दो बार तोड़े बसपा के 6-6 विधायक


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बीजेपी का कोई लेनादेना नहीं: बसपा प्रवक्ता
उधर, बसपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने कहा कि कोई दो-दो बार हमारी पार्टी के विधायकों को तोड़ ले और हम बोलें भी नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है. राजस्थान में बसपा के कार्यकर्ता हैं, संगठन है. बसपा अपने कार्यकर्ताओं के लिए लड़ाई लड़ रही है. इससे बीजेपी का कोई लेनादेना नहीं. कांग्रेस ने बसपा को धोखा दिया है उसे इसका सबक सिखाया ही जाना चाहिए. बसपा ने कोई रणनीति नहीं बदली है. वो मिशन वाली पार्टी है और अपने कार्यकर्ताओं के हितों को देखते हुए फैसले कर रही है.


भाजपा-कांग्रेस दोनों दलित विरोधी
दलित एक्टिविस्ट डॉ. सतीश प्रकाश कहते हैं कि देश में बीजेपी आगे बढ़ रही है तो इसकी वजह कांग्रेस की नाकामी है. दलितों (Dalit) ने कभी बीजेपी को नहीं बढ़ाया. बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपर कास्ट का प्रतिनिधित्व करते हैं. दोनों को दलितों से नफरत है. कांग्रेस तो जन्मजात दलित विरोधी है. कांग्रेस जिन दलितों के सहारे सत्ता में आती है बाद में उन्हीं को धोखा दे देती है. राजस्थान में गहलोत ने ऐसा ही किया है. जब वो इतने कमजोर हालात में भी दलितों की पार्टी के विधायक तोड़ ले रही है तो सोचिए कि पावरफुल होने के बाद क्या करेगी. इसलिए यह कहना उचित नहीं है कि बसपा बीजेपी को फायदा पहुंचा रही है. बसपा तो अपनी लड़ाई लड़ रही है.
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