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OPINION: एक दूसरे से अलग नहीं हो सकते हैं कांग्रेस और DMK, जानें क्यों

News18Hindi
Updated: January 19, 2020, 7:59 PM IST
OPINION: एक दूसरे से अलग नहीं हो सकते हैं कांग्रेस और DMK, जानें क्यों
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन की फाइल फोटो

तमिलनाडु (Tamil nadu) में मौजूदा राजनीतिक स्थिति के बीच डीएमके (DMK) और कांग्रेस (Congress) एक दूसरे से गठबंधन तोड़ने का खतरा मोल नहीं ले सकते हैं.

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  • Last Updated: January 19, 2020, 7:59 PM IST
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वीरराघव टीएम
कांग्रेस (Congress) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) अपने बीच के मतभेदों को सुलझाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं. दोनों दलों ने अपने बीच सार्वजनिक बयानबाजी को भी नियंत्रित करना शुरू कर दिया है. शनिवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के विश्वास पात्र और पुडुचेरी (Puducherry) के सीएम वी नारायणसामी (V Narayansami) ने डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन (MK Stalin) से मुलाकात करने के लिए चेन्नई (Chennai) पहुंचे.

दोनों सहयोगियों के बीच उस वक्त मतभेद सामने आए जब तमिनलाडु (Tamilnadu) के कांग्रेस अध्यक्ष केएस अलगिरी ने नगर निगम चुनावों में कांग्रेस ने पदों के बंटवारे को लेकर नाराजगी जाहिर की. इसके जवाब में वरिष्ठ डीएमके नेता दुराई मुरुगन ने कहा कि कांग्रेस अगर गठबंधन तोड़ भी दे तब भी उनकी पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

CAA पर बैठक से भी बनाई दूरी

हालांकि यह बात सिर्फ यहीं नहीं रुकी. बीते दिनों संसोधित नागरिकता कानून के मुद्दे पर बुलाई गई एक बैठक से भी डीएमके ने किनारा कर लिया. यह DMK की ओर से एक बड़ी गलती थी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खिलाफ सामान्य रूप से एक मजबूत स्थिति में है और सीएए के विरोध में सबसे आगे रही है.

CAA के खिलाफ विपक्ष की बैठक में DMK का हिस्सा ना लेना एक शर्मनाक घटना थी और संघ सरकार के खिलाफ सबसे शक्तिशाली आंदोलन में से एक के लिए, एक वैचारिक स्तर पर, पार्टी की प्रतिबद्धता को कमजोर करने की कोशिश लगी. यहां तक ​​कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी लगता है कि उन्हें इस बैठक में शामिल होने के लिए कांग्रेस से चल रहे अंतर्विरोधों को सामने नहीं आने देना था.

कांग्रेस के छोटे वोट शेयर की भी DMK को जरूरत!अगर तमिलनाडु के चुनावी गणित की बात करें तो आगामी विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए डीएमके के लिए कांग्रेस का साथ जरूरी है. वास्तव में इस बात की संभावना भी है कि चुनाव समय से पहले हो सकते हैं ऐसे में डीएमके के लिए करो या मरो की स्थिति है.

फिलहाल राज्य में डीएमके के पास एक मजबूत जनाधार है. मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी की अगुवाई में AIADMK विधानसभा सीटों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुई है. ऐसे में डीएमके के लिए कांग्रेस का छोटा वोट शेयर भी जरूरी है ताकि वह विधानसभा चुनाव में कड़ी लड़ाई से पार पा सके.

दूसरी ओर गठबंधन में खटास केवल विपक्षी वोट को विभाजित करेगी और भाजपा के लिए वैचारिक विरोध में दरार पैदा करेगी. जाहिर है, DMK हारने का परिणाम स्वीकार नहीं कर पाएगी और कांग्रेस अपने सबसे शक्तिशाली सहयोगी को जाने नहीं दे सकती. यही कारण है कि दोनों पक्ष एक दूसरे से आसानी से अलग नहीं हो सकते.

मौजूदा घटनाक्रम में समझ के परे...
यह स्पष्ट नहीं है कि इस स्तर पर दोनों दलों के नेताओं के बीच इस तरह के सार्वजनिक बयानबाजी का क्या
कारण है. द्रमुक-कांग्रेस के संबंध के इतिहास को देखते हुए - एमके स्टालिन ने भी राहुल गांधी को गठबंधन के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया. उन्होंने राहुल और सोनिया गांधी के प्रति  प्रतिबद्धता भी दिखाई थी, ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम में समझ के परे है.

यह भी स्पष्ट है कि डीएमके ने सार्वजनिक बयानबाजी या सीएए बैठक का बहिष्कार नहीं बिना स्टालिन की मंजूरी के नहीं किया होगा. यही कारण है कि दोनों दलों के बीच मौजूदा परिस्थिति को समझना थोड़ा कठिन है.

दोनों दलों के बीच मौजूदा परिस्थिति पर एक बड़े तबके का मानना ​​है कि यह अगले विधानसभा चुनावों के लिए सीट शेयरिंग से जुड़ी बातचीत शुरू करने से पहले अपनी स्थिति को मजबूत करने की एक कोशिश है लेकिन इस स्तर पर गठबंधन को खतरे में डालना स्वस्थ रणनीति तो नहीं ही हो सकती है.

वहीं एक दूसरे के बीच पैदा हुई दरार के कारणों की परवाह किये बिना दोनों दलों का कहना है कि वह गठबंधन टूटने का जख्म नहीं उठा सकते हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी.

(यह लेखक के निजी विचार हैं.)

यह भी पढ़ें:  कांग्रेस की बैठक में क्यों शामिल नहीं हुई DMK, क्या स्टालिन थे कारण?

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First published: January 19, 2020, 3:32 PM IST
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