युवा चेहरों पर भरोसा करने से क्यों डरती है कांग्रेस

जिन नेताओं के भी नाम आगे आ रहे हैं वे सभी उम्र के सातवे दशक को पार कर चुके हैं, राज्यों के ज्यादातर मुख्यमंत्री भी साठ के उपर के है

Anil Rai | News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 3:14 PM IST
युवा चेहरों पर भरोसा करने से क्यों डरती है कांग्रेस
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Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 3:14 PM IST
कांग्रेस में राहुल गांधी के उत्तराधिकारी की तलाश अपने अंतिम मुकाम पर है. अब तक जो नाम मीडिया में जो नाम आ रहे हैं उनमें मल्लिकार्राजुन खड़गे और सुशील कुमार शिदें का नाम प्रमुख रूप से लिया जा रहा है. सुशील कुमार शिंदे 77 साल के हो चुके हैं जबकि मल्लिकारज्ल खड़गे 76 साल के है, ये दोनों नेता 75 साल की उम्र पार कर चुके हैं. इसके पहले जिस नाम की चर्चा हुई थी वो नाम था राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत का. गहलोत भी 68 साल के हो गए है.

कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों की औसत आयु भी 72 के पार

ऐसा पहली बार नहीं हो रहा कि कांग्रेस अपने नेता चुनने में युवा जोश से ज्यादा अनुभव पर भरोसा कर रही हो, 2004 में जब यूपीए-1 की सरकार बनी तो सोनिया गांधी ने अनुभव को तरजीह दी और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री चुना गया उस समय मनमोहन सिंह 72 साल के थे. यही नहीं कांग्रेस की राज्य सरकारों की बात करे तो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह 77 साल के हैं. जबकि मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री कमलनाथ 72 साल का पड़ाव पार कर चुके हैं और राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 68 साल के हैं. राजस्थान और मध्य प्रदेश में इन दोनों को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला कांग्रेस नेतृत्व ने उस हालात में लिया जब उसके पास राज्यों में सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवा और मजबूत विकल्प मौजूद थे और राज्य के विधानसभा चुनावों में उनकी भूमिका भी अहम थी .

अनुभव और जोश पर वफादारी भारी

कांग्रेस को नजदीक से जानने वाले बताते है कि कांग्रेस में किसी महत्वूर्ण पद पर चुने जाने के लिए अनुभव और जोश से ज्यादा जरुरी है गांधी परिवार के प्रति वफादारी और कम महत्वाकांक्षी होना और यही वो कारण रहा जिसके कारण यूपीए-1 के समय प्रधानमंत्री के पद पर पी चिदंबरम, प्रणव मुखर्जी, अर्जुन सिंह जैसे दिग्गजों को मात देकर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस की पहली पसंद बन गए. कुछ यही हाल यूपीए-1 की सरकार में राष्ट्रपति के चुनाव के समय भी हुआ , कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए प्रतिभा पाटिल राष्ट्रपति बन गई क्योंकि उस दौर में जो भी राष्ट्रपति पद की दौड़ में था उसमें प्रतिभा देवी सिंह पाटिलसे वफादार कोई भी नहीं था .

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First published: July 3, 2019, 3:14 PM IST
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