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महाराष्ट्र और केरल में क्यों बढ़ रहे हैं कोरोना वायरस के मामले, IMA अध्यक्ष ने बताई वजह

COVID-19: पाबंदियों में मिली छूट के बाद बेंगलुरु के बाजार में उमड़ी लोगों की भीड़. (पीटीआई फाइल फोटो)

COVID-19: पाबंदियों में मिली छूट के बाद बेंगलुरु के बाजार में उमड़ी लोगों की भीड़. (पीटीआई फाइल फोटो)

Kerala Maharashtra Coronavirus Case: आईएमए के अध्यक्ष डॉ. जेए जयलाल ने कहा कि केरल में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के बावजूद, महामारी से होने वाली मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है.

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    नई दिल्ली. देश में डॉक्टरों की शीर्ष संस्था भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. जेए जयलाल ने मंगलवार को कहा कि केरल और महाराष्ट्र में अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आने एवं काफी अंतरराज्यीय आवाजाही (Interstate Movement) की वजह से इन दोनों राज्यों में कोरोना के मामलों में इजाफा हो रहा है. उन्होंने कहा कि केरल में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के बावजूद, महामारी से होने वाली मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है.


    डॉ. जेए जयलाल ने केरल में कोरोना के बिगड़ते हालात के लिए तालाबंदी को लेकर स्पष्ट नीति नहीं होने को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, 'केरल में सप्ताह में 2 दिन रुक-रुक कर तालाबंदी की जाती है. इससे बाजार क्षेत्रों में भीड़भाड़ रहती है. स्वास्थ्य विभाग और सभी संबंधित पक्षों को चाहिए कि यह एक समान तरीके से लागू हो, जिससे सभी को लाभ पहुंचे.'


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    वहीं, बकरीद के मौके पर केरल सरकार द्वारा कोरोना प्रतिबंधों में राहत दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा फटकारे जाने पर आईएमए अध्यक्ष ने कहा, 'हम यह नहीं कह रहे हैं कि राज्य में संपूर्ण लॉकडाउन लगाना है. इसे एक समान तरीके से किया जाना चाहिए. भीड़ पर नियंत्रण रखने की जरूरत है. हम इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं.'


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    इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 की उच्च संक्रमण दर वाले क्षेत्रों में बकरीद के मौके पर केरल सरकार द्वारा पाबंदी में दी गई छूट को मंगलवार को ‘पूरी तरह से अनुचित’ करार दिया और कहा कि व्यापारियों के दबाव के आगे झुकना ‘दयनीय स्थिति’ को दिखाता है. शीर्ष अदालत ने व्यापारियों के दबाव में बकरीद से पहले ढील देने के लिए केरल सरकार को फटकार लगाई और कहा कि यह ‘माफी योग्य’ नहीं है. साथ ही, राज्य सरकार को आगाह किया है कि अगर इस छूट से संक्रमण का प्रसार होता है तो वह कार्रवाई करेगी.




    न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने कहा कि केरल सरकार ने बकरीद के अवसर पर पाबंदियों में इस तरह की छूट देकर देश के नागरिकों के लिए राष्ट्रव्यापी महामारी के जोखिम को बढ़ा दिया है. न्यायालय ने केरल को चेताया कि अगर पाबंदी में ढील से संक्रमण के मामले बढ़े और कोई व्यक्ति शिकायत लेकर आया तो वह कड़ी कार्रवाई करेगा. पीठ ने कहा, ‘(व्यापारियों के) दबाव समूहों के आगे झुकते हुए पाबंदियों में ढील से देश के नागरिकों के लिए संक्रमण का खतरा बढ़ गया है. पीठ ने कहा, ‘हम केरल सरकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निहित जीवन के अधिकार पर ध्यान देने का निर्देश देते हैं.’ (इनपुट भाषा से भी)

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