कोरोना को लेकर भारत को चिंतित करने वाली खबर, अलग-अलग शहरों में अलग वक्त पर आएगा पीक!

डॉ. अनंत भान कहते हैं कि भारत के अलग-अलग शहरों में कोरोना वायरस का पीक अलग-अलग समय पर आएगा.
डॉ. अनंत भान कहते हैं कि भारत के अलग-अलग शहरों में कोरोना वायरस का पीक अलग-अलग समय पर आएगा.

Coronavirus: अब तक देश भर में 22674 लोगों की मौत हो चुकी है. हर दिन औसतन ढाई लाख सैंपल की जांच हो रही है. सवाल उठता है कि क्या भारत जैसे देश में मेडिकल सुविधाएं पर्याप्त हैं?

  • AP
  • Last Updated: July 12, 2020, 10:52 AM IST
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नई दिल्ली. देश भर में कोरोना वायरस (Coronavirus) का संक्रमण लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है. जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दिनों भारत सिर्फ 3 हफ्ते के दौरान ही कोरोना के कुल मरीजों के मामले में छठे से तीसरे नंबर पर पहुंच गया. सरकार की तरफ से कोरोना मरीजों के लिए बेड की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है. इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा टेस्ट भी हो रहे हैं. लेकिन सवाल उठता है कि क्या 130 करोड़ लोगों की आबादी वाले भारत जैसे देश में उनके लिए ये सारी मेडिकल सुविधाएं पर्याप्त हैं?

कब आएगा कोरोना का पीक?
सबसे पहले अगर कोरोन के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो रविवार तक भारत में 8,49,553 लोग इस खतरनाक वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. अब तक देश भर में 22674 लोगों की मौत हो चुकी है. हर दिन औसतन ढाई लाख सैंपल की जांच हो रही है. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में कोरोना का पीक अभी आने वाला है. यानी वो दिन अभी आना बाकी है, जब एक दिन में सबसे अधिक केस आएंगे. लेकिन डॉक्टर अनंत भान का कहना है कि भारत में एक नहीं कई पीक आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली और मुंबई में पीक आ चुका. अब देश के छोटे शहरों में भी कोरोन का पीक दिखने लगा है. डॉक्टर भान का मानना है कि देश में अभी ज्यादा से ज्याद टेस्ट की जरूरत है.

डेटा पर संदेह
पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी कहा था कि टीवी पर दिखाया जा रहा है कि कोरोना के कुल मामलों में भारत तीसरे नंबर पर पहुंच गया है. लेकिन ये भी देखना चाहिए कि जनसंख्या के मामले में हम दूसरे नंबर पर हैं. हमारे यहां हर 10 लाख लोगों पर सिर्फ 538 मामले आ रहे हैं, जबकि दुनिया में ये औसत 1453 है. वेल्लोर में क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जयप्रकाश मुलियाल का कहना है कि भारत में कोरोना संक्रमण की वास्तविक संख्या को जानना 'बिल्कुल असंभव' है, क्योंकि किसी भी तरह की मृत्यु के लिए ज्यादातर जगहों पर कोई रिपोर्टिंग तंत्र नहीं है.



केंद्र के साथ कॉर्डिनेशन की कमी
भारत में स्वास्थ्य सेवाएं राज्य सरकार देखती है. केरल में कोरोना के मरीजों को बड़े ही शानदार तरीके से देखरेख की गई. आज कोरोना के इलाज को लेकर केरल दूसरे राज्यों के लिए मॉडल बन गया है. वहीं दूसरी और दिल्ली की जमकर आलोचना की गई. यहां सारे मरीजों के ठीक तरीके से टेस्ट भी नहीं हो रहे थे. बाद में केंद्र सरकार के दखल देने के बाद यहां हालात सुधरे. जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के एक प्रोफेसर जिष्णु दास के मुताबिक, भारत में राज्यों की केंद्र के साथ कॉर्डिनेशन की कमी है. यहां डेटा का सही इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.


भारत की कोरोना से लड़ने की क्षमता

भारत में कोरोना से लड़ने के लिए इन दिनों दिनों सात अलग-अलग वैक्सीन पर काम हो रहा है. जिसमें से दो कंपनियों की वैक्सीन की ह्यूमैन ट्रायल हो रही है. उम्मीद की जा रही है कि अगले साल तक ये तैयार हो जाएगा. पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है. नीति आयोग के मुताबिक भारत हर रोज लगभग 1,000 वेंटिलेटर और 600,000 पीपीई किट बनाता है.
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