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OPINION: जिन बदलाव की मांग विपक्ष हमेशा से करता रहा, उस पर अब लिया यू-टर्न

OPINION: जिन बदलाव की मांग विपक्ष हमेशा से करता रहा, उस पर अब लिया यू-टर्न

‘चुनाव अधिनियम संशोधन विधेयक’ लोकसभा से पारित किया जा चुका है.. (File pic PTI)

‘चुनाव अधिनियम संशोधन विधेयक’ लोकसभा से पारित किया जा चुका है.. (File pic PTI)

रकारी सूत्रों का कहना है कि 7 अगस्त 2018 में चुनाव सुधारों पर चर्चा करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने इस बात का समर्थन किया था. बैठक में भाग लेने आए दलों ने आयोग से कहा था कि मतदाता के आधार नंबर को उसके चुनाव कार्ड से जोड़ा जाए, जिससे भविष्य में मतदाता सूची में जो भी बदलाव करने हों तो वो काम बेहतर तरीके से हो सके.

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नई दिल्‍ली. लोकसभा में पारित चुनाव सुधार संशोधन बिल, 2021, जिसमें आधार नंबर को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ने की बात कही गई है उसे लेकर अब विपक्ष ने बवाल मचा हुआ है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि 7 अगस्त 2018 में चुनाव सुधारों पर चर्चा करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने इस बात का समर्थन किया था. बैठक में भाग लेने आए दलों ने आयोग से कहा था कि मतदाता के आधार नंबर को उसके चुनाव कार्ड से जोड़ा जाए, जिससे भविष्य में मतदाता सूची में जो भी बदलाव करने हों तो वो काम बेहतर तरीके से हो सके. यहां तक की अप्रैल 2018 में मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर ये मांग कर चुका है कि आधार कार्ड को वोटर पहचान पत्र के साथ जोड़ा जाए, जिससे फर्जी वोटरों की संख्या पर काबू पाया जा सके. यहां तक की शरद पवार की एनसीपी ने भी महाराष्ट्र में मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने की सलाह दी थी, जिसे तब के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने स्वीकार भी कर लिया था. इसलिए सरकार के सूत्र ये दावा करने से नहीं चुक रहे हैं कि चुनाव सुधार की प्रक्रिया में तमाम राजनीतिक दलों से ऐसे कई प्रस्ताव आए, जिनमें आधार कार्ड को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ने का भी प्रस्ताव शामिल था.

चुनाव आयोग के मुताबिक मतदाता सूची में नाम जोड़ा जाना मतदाता पर निर्भर करता है जो ये बताता है वो अपने इलाके में वोटर के तौर पर रजिस्टर होने का अधिकार रखता है. इसलिए सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस बिल में यही प्रावधान है कि मतदाता पहचान पत्र बनवाने का इच्छुक व्यक्ति अपनी मर्जी से अपना आधार नंबर दे सकता है. किसी का भी फॉर्म इस बात पर खारिज नहीं किया जाएगा कि उसने आधार नंबर की जानकारी नहीं दी है. आधार नंबर को मतदाता सूची से जोड़ने से चुनाव आयोग को एक बहुत बड़ी समस्या से मुक्ति मिलेगी. इससे मतदाताओं के डेटाबेस को बेहतर तरीके स मैनेज किया जा सकेगा. अब तक ऐसा होता आ रहा है कि एक ही व्यक्ति कई जगहों पर मतदाता सूची में है. सरकारी सूत्र बताते हैं कि ये फर्जी मतदाताओं के नाम सूची से हटाने में ये बहुत बड़ा कदम साबित होगा.

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सूत्र बताते हैं कि ये इसलिए होता है क्योंकि कई लोग बार-बार घर बदलते रहते हैं और जहां भी जाते हैं वहां की मतदाता सूची में नाम जरूर लिखवा लेते हैं. वो भी पिछले स्थान की मतदाता सूची से अपना नाम हटवाए बिना नई जगह नाम लिख दिया दाता है. इसलिए आधार कार्ड को मतदाता सूची से जोड़ने पर उन मतदाताओं के नाम को काटना आसान हो जाएगा जो कई बार अलग-अलग जगहों पर लिस्ट में होते हैं या फिर एक ही जगह पर दो से तीन बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा लेते हैं. सरकार का मानना है कि एक बार आधार से इसे जोड़ा गया तो भविष्य में अगर कोई अपना नाम बिना हटवाए नई जगह पर डालने की कोशिश करेगा तो मतदाता सूची का सिस्टम तुरंत ही पूरे तंत्र को सतर्क कर देगा. ये मतदाता सूची से फर्जी वोटरों का नाम हटाने से लेकर नई जगहों पर अपना नाम मतदाता सूची में रजिस्टर करवाने में मदद मिलेगी.

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लोकसभा में पेश होने के बाद विपक्षी दलों के सुर भी बदल गए हैं. लोकसभा से पास होने बाद अब बिल को राज्यसभा की परीक्षा से भी गुजरना है. इसलिए जिन चुनाव सुधारों पर चर्चा दशकों से चल रही थी, उनको अमली जामा पहनाने में मोदी सरकार फूंक-फूंककर ही कदम रख रही है.

Tags: Aadhaar, Aadhaar Card, Aadhaar Data, Aadhaar number, Voter List

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