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तमिलनाडु की राजनीति में क्यों है AIADMK और DMK का बोलबाला

पलानीसामी ने प्राइवेट कॉलेजों से कहा कि 7.5 प्रतिशत कोटा वाले बच्चों को एडमिशन से मना ना किया जाए. फाइल फोटो
पलानीसामी ने प्राइवेट कॉलेजों से कहा कि 7.5 प्रतिशत कोटा वाले बच्चों को एडमिशन से मना ना किया जाए. फाइल फोटो

देश में तमिलनाडु (Tamilnadu) उन चंद राज्यों में है, जहां की राजनीति बीजेपी, कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के इर्द गिर्द ना घूमकर द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के आसपास घूमती है. आखिर क्या कारण हैं कि इस राज्य में राष्ट्रीय पार्टियां अब तक इन दलों का पर्याय नहीं बन सकी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2020, 7:24 PM IST
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नई दिल्ली. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव (Tamilnadu Assembly Election) से पहले सत्तासीन अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने एमबीबीएस और बीडीएस में सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया और. ये बताता है कि तमिलनाडु की पार्टियों में जन कल्याणकारी योजनाओं को लेकर कितनी प्रतिस्पर्धा है और यही राज्य की द्रविड़ियन राजनीति को परिभाषित करती हैं.

1967 से तमिलनाडु में द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक का शासन है. आरक्षण, कावेरी जल विवाद और श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दों पर दोनों पार्टियां आंख में आंख डालकर बात करती हैं. अन्नाद्रमुक ने 7.5 प्रतिशत कोटे का ऐलान किया तो डीएमके ने छात्रों की पूरी फीस देने की घोषणा की.

दरअसल नीट के मुद्दे पर घिरी राज्य सरकार ने विपक्ष के आक्रमण को भोथरा करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस कलैयारासन की अगुवाई में ज्यूडिशियल कमिटी का गठन किया. कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में एमबीबीएस और बीडीएस कॉलेजों में 10 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की. हालांकि कुछ कारणों के चलते इसे 7.5 प्रतिशत कर दिया और बिल विधानसभा में पेश कर दिया. बाद में राज्यपाल के पास भेजा गया, लेकिन राज्यपाल ने कानूनी सलाह लेने की बात कर दी.



तमिलनाडु के 3,050 सरकारी स्कूलों में 3.44 लाख स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं. हालांकि राज्य में मेडिकल की 4 हजार से ज्यादा सीटें हैं और पिछले तीन सालों में सिर्फ 14 सीटें ही सरकारी स्कूलों के छात्रों को मिली हैं.
सियासी तौर पर अन्नाद्रमुक के फैसले में देरी होते देख डीएमके ने मोर्चा खोला और इसे बड़ा सियासी मुद्दा बना दिया. पलानीसामी सरकार ने एग्जीक्यूटिव रूट पकड़ा और 29 अक्टूबर को सरकारी आदेश जारी कर दिया. राज्य सरकार के फैसले को देखते हुए राज्यपाल ने भी अपनी सहमति दे दी.

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राज्यपाल के फैसले के बाद एमबीबीएस कोर्स में चयनित सरकारी स्कूलों के 313 बच्चों में से 225 को मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन मिला. 15 को डेंटल कॉलेज में एडमिशन मिला तो 85 छात्रों को प्राइवेट कॉलेज मिले. सरकारी कॉलेजों में सालाना फीस 20 हजार से कम है, लेकिन प्राइवेट कॉलेजों में एक साल की फीस 3.5 लाख से 4.5 लाख तक है.

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प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले बच्चों को फीस देने में आ रही दिक्कतों पर जैसे ही खबरें आईं डीएमके ने ऐलान कर दिया कि सरकारी स्कूलों के सभी बच्चों, जिन्होंने प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन लिया है, उनकी फीस पार्टी देगी. इस होड़ में अन्नाद्रमुक पीछे ना रह जाए इसलिए पलानीसामी सरकार ने भी उसी दिन ऐसा ही ऐलान कर दिया. साथ ही प्राइवेट कॉलेजों से कहा कि 7.5 प्रतिशत कोटा वाले बच्चों को एडमिशन से मना ना किया जाए.

अन्नाद्रमुक और द्रमुक पार्टियां जब अपने सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए आपस में होड़ कर रही थीं, दूसरी पार्टियां मुंह बाए तमाशा देख रही थीं. यही वजह है कि 1967 के बाद से ही तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और द्रमुक का शासन है.
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