जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार ने SC से पूछा वेकेंसी ज़्यादा तो क्यों भेजे इतने कम नाम?

मणिपुर हाईकोर्ट में सात जजों के मुकाबले सिर्फ दो जज, जबकि मेघालय हाईकोर्ट में चार जजों की जगह सिर्फ एक जज काम कर रहे हैं.

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: May 4, 2018, 11:10 PM IST
जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार ने SC से पूछा वेकेंसी ज़्यादा तो क्यों भेजे इतने कम नाम?
मणिपुर हाईकोर्ट में सात जजों के मुकाबले सिर्फ दो जज, जबकि मेघालय हाईकोर्ट में चार जजों की जगह सिर्फ एक जज काम कर रहे हैं.
Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: May 4, 2018, 11:10 PM IST
जजों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और केंद्र सरकार के बीच एक बार फिर से सीधा टकराव देखने को मिला. दरअसल सरकार ने जजों के खाली पदों पर नियुक्तियों के लिए कुछ ही नामों की सिफारिश करने पर सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे पर जस्टिस मदन बी लोकुर और अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के बीच जमकर बहस हुई.

मणिपुर के एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस लोकुर ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि फिलहाल हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर कोलेजियम की कितनी सिफारिश पेंडिंग है? अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मुझे ये जानकारी जुटानी होगी.

अटॉर्नी जनरल ने कहा, ''कोलेजियम को ज्यादा नामों की सिफारिश करनी होगी. कुछ हाईकोर्ट में 40 वेकेंसी हैं और कोलीजियम ने सिर्फ 3 नामों की ही सिफारिश की है और सरकार के बारे में कहा जा रहा है कि हम वेकेंसी को भरने में सुस्त हैं.' वेणुगोपाल ने कहा, ''अगर कोलेजियम की सिफारिश ही नहीं होगी तो कुछ भी नहीं किया जा सकता है.' बेंच ने इस पर अटॉर्नी जनरल को याद दिलाया कि सरकार को नियुक्तियां करनी हैं.

दरअसल कोलेजियम ने 19 अप्रैल को मेघालय हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए जस्टिस एम याकूब मीर और मणिपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए जस्टिस रामलिंगम सुधाकर के नामों की सिफारिश की थी. वेणुगोपाल ने कहा कि दोनों की नियुक्ति के लिए जल्द आदेश जारी होंगे. कोर्ट ने कहा आपका जल्द तीन महीने भी हो सकता है.

मणिपुर हाईकोर्ट में सात जजों के मुकाबले सिर्फ दो जज, जबकि मेघालय हाईकोर्ट में चार जजों की जगह सिर्फ एक जज काम कर रहे हैं. जजों की कमी के कारण वहां के लोगों को दिल्ली आना पड़ता है और उनका मामला दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए इसके लिए उन्हें पैसे खर्च करने पड़ते हैं.

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को काफी अहम माना जा रहा है. दरअसल केन्द्र ने कोलेजियम की सिफारिश के 3 महीने से भी ज्यादा समय बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के. एम. जोसेफ को प्रमोट करके सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश लौटा दी थी.

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First published: May 4, 2018, 10:47 PM IST
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