13 तारीख का शुक्रवार और उससे जुड़ा ख़ौफ़!


Updated: October 13, 2017, 3:10 PM IST
13 तारीख का शुक्रवार और उससे जुड़ा ख़ौफ़!
जानिए दुनियाभर में क्यों अशुभ माना जाता है 13वीं तारीख का शुक्रवार?

Updated: October 13, 2017, 3:10 PM IST
एक और शुक्रवार 13 तारीख पर आया है. मगर घबराएं नहीं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इस दिन को आप चाहे जितना मनहूस मानें, ज़्यादातर ये दिन सुरक्षित होता है.

पॉपुलर कल्चर में 13 तारीख का शुक्रवार बेहद बुरा माना गया है. यहां तक कि इस पर किताबें, फ़िल्में और आर्ट पीस भी देखने को मिल जाएंगे. कुछ लोग तो शुक्रवार 13 तारीख वाले दिन इतने ख़ौफ़ज़दा होते हैं कि वो ख़ुद को घर में बंद कर लेते हैं. कई नया घर नहीं खरीदते, कुछ हवाई यात्रा नहीं करते. अमरीका में तो एक आंकड़े के मुताबिक़ इस दिन 800 से 900 मिलियन डॉलर बिज़नेस का नुक़सान तक हो जाता है क्योंकि लोग इस दिन शेयर में पैसा भी नहीं लगाते.

ऐसा क्यों है कि दुनिया भर के तकरीबन हर देश में 13 का अंक अशुभ हैं? इन बातों के लिए विज्ञान में कोई जगह नहीं. चूंकि इनमें से ज़्यादातर अंधविश्वासों के पीछे किसी दैवीय या शैतानी ताक़तों की बात कही जाती है, इसलिए बहुत से अंधविश्वास धर्म का सहारा लेते हैं.



मिसाल के लिए 13 का अंक बाइबिल में बताए गए लास्ट सपर से जुड़ा है. जीज़स क्राइस्ट की गिरफ़्तारी और उनका क्रूसिफ़िकेशन शुक्रवार को ही हुआ था और उस दिन थी 13 तारीख.

उनकी गिरफ़्तारी से ठीक पहले उन्होंने अपने 12 शिष्यों के साथ भोजन किया था. नतीजा ये हुआ कि 13 तारीख और शुक्रवार दोनों के एकसाथ होने को पूरी तरह मनहूस माना जाने लगा. किसी मेज़ पर 13 लोगों की मौजूदगी को ही दुर्भाग्यपूर्ण कहा गया.

अब 13 के अंक का डर यानी Triskaidekaphobia इतना फैल चुका है कि दुनिया की कई इमारतों में 13वां फ्लोर ही नहीं होता. जहां 12वें के बाद सीधे 14वां फ़्लोर होता है. या यूं कहें कि फ्लोर तो होता है, लेकिन उसे 13वें नंबर नहीं दिया जाता.

13 तारीख को ही अगर शुक्रवार पड़ जाता है तो इसे और भी बुरा माना जाता है. इस डर का नाम है – Friggatriskaidekaphobia या Paraskevidekatriaphobia. हालांकि न्यूमरोलॉजिस्ट्स 13 से ठीक पहले वाले अंक 12 को कंप्लीट नंबर यानी पूर्ण अंक मानते हैं.

तो क्या अंधविश्वासों का कोई आधार है. विज्ञान की नज़र में इसका जवाब है- नहीं. मगर बहुत से लोगों के लिए अंधविश्वास कल्चर में शामिल दूसरी आदतों की तरह होते हैं, जिनका उन्हें ख़ुद भी अहसास नहीं होता.
First published: October 13, 2017
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