ब्राडेंड दवाइयों का विकल्प जेनरिक दवाइयां क्यों नहीं बन पा रही है?

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: June 25, 2019, 8:30 PM IST
ब्राडेंड दवाइयों का विकल्प जेनरिक दवाइयां क्यों नहीं बन पा रही है?
देश में जेनरिक और ब्रांडेड जेनरिक दवाई के अंतर को लोग समझ नहीं पा रहे हैं.

केंद्र सरकार अब खासतौर पर सरकारी अस्पतालों में जेनरिक की जगह ब्रांडेड जेनरिक दवाइयां लिखने पर सख्त रुख अख्तियार करने वाली है. इसके लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को बता दिया है कि अगर कोई सरकारी या गैरसरकारी अस्पताल जेनरिक दवाई नहीं लिखते हैं तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए.

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देश की सरकारी और गैरसरकारी अस्पतालों में जेनरिक दवाइयों के बदले महंगी ब्रांडेड दवाई लिखने की शिकायत मोदी सरकार को लगातार मिल रही है. केंद्र सरकार खासतौर पर अब सरकारी अस्पतालों में जेनरिक की जगह ब्रांडेड जेनरिक दवाइयां लिखने पर सख्त रुख अख्तियार करने वाली है. इसके लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को बता दिया है कि अगर कोई सरकारी या गैरसरकारी अस्पताल जेनरिक दवाई नहीं लिखते हैं तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए. केंद्र सरकार इसके साथ ही केमिस्ट और दवा कंपनियों पर भी नकेल कसेगी. केंद्र सरकार केमिस्ट और दवा कंपनियों की मिलीभगत को खत्म करने की दिशा में भी काम करना शुरू कर दिया है.

केंद्र सरकार अब जेनरिक दवाओं को लेकर सख्त रुख अख्तियार करने जा रही है


देश की रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने करीब 1050 आवश्यक दवाओं की कीमत को भी नियंत्रित करने का दावा किया है. मंत्रालय का दावा है कि सरकार और भी दवाइयों की कीमतों को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित करेगी. मंत्रालय के मुताबिक, ‘केंद्र सरकार जरूरी दवाइयों की कीमतों पर भी 90% की गिरावट दर्ज करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है. देशभर की 4 हजार 800 से भी अधिक जन औषधि केंद्रों पर मिल रही है.

50-90% कम कीमत पर जेनरिक दवाइयां मिल रही हैं 

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक, देश में इस समय 800 किस्मों की जेनरिक दवाइयां बाजार कीमत से 90% कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं. साथ ही प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के अंतगर्त लंबी बीमारी के इलाज पर होने वाला सालाना खर्च कम करने की दिशा में भी काम चल रहा है. केंद्र सरकार की कोशिश है कि गरीब व्यक्ति अपने निकटतम जन औषधि केंद्र पर जाएं और ब्राडेंड दवाइयों के मुकाबले 50 से 90 प्रतिशत कम दामों में उच्च जेनरिक दवाइयों का लाभ उठाएं.

साल 2020 तक 2500 और जनऔषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य

केंद्र सरकार का कहना है कि 2020 तक देश भर में सस्ती दवाओं की 2 हजार 500 और जन औषधि दुकानें और खोली जाएंगी. केंद्र सरकार ने हर ब्लाक में दवाओं कि ऐसी कम से कम एक दुकान खोलने की योजना तैयार की है, जहां से लोगों को मुनासिब दाम पर अच्छी दवाइयां उपलब्ध हो सकेंगी.
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गरीब मरीजों को दवाएं नहीं मिल पाने की समस्या के सवाल पर पिछले दिनों ही केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि देश की हर जन औषधि केंद्र पर 700 से अधिक दवाएं वितरित हो रही हैं. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि दवाओं की मात्रा कम थोड़ा कम है जिसे बढ़ाया जा रहा है.

देशभर में जनऔषधि केंद्र खोलने पर सरकार लगातार प्रयासरत है.


बता दें कि पीएम मोदी‬ ने 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री जन औषधि योजना शुरू की थी, जिसके तहत सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली जेनरिक दवाईयों के दाम बाजार मूल्य से कम करने की बात की गई थी. केंद्र सरकार ने इसके बाद से ही देश में कई जगहों पर जन औषधि केंद्र बनाने की भी कवायद शुरू की थी. इन केंद्रों पर सरकार की तरफ से लगातार जेनरिक दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं. ये जेनरिक दवईयां ब्रांडेड जेनरिक या फार्मा की दवाइयों के मुकाबले सस्ती होती हैं.

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First published: June 25, 2019, 8:30 PM IST
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