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कठुआ गैंगरेप के फैसले पर जज ने सबसे ऊपर लिखा मिर्जा ग़ालिब का ये शेर, जानें क्यों?

कठुआ गैंगरेप के फैसले पर जज ने सबसे ऊपर लिखा मिर्जा ग़ालिब का ये शेर, जानें क्यों?

कठुआ में 10 जनवरी, 2018 को एक आठ साल की बच्ची का अपहरण कर उसका रेप किए जाने के मामले में सोमवार सजा सुनाई गई.

    कठुआ में 10 जनवरी, 2018 को एक आठ साल की बच्ची का अपहरण कर उसका रेप किए जाने के मामले में आज सजा सुनाई गई है. इस मामले में 6 लोगों ने बच्ची का अपहरण कर उसे हफ्ते भर नशीले पदार्थों की ओवरडोज देकर उसके साथ रेप किया था. जिसके बाद उन्होंने बच्ची को मार दिया था. इतना ही नहीं बच्ची पूरी तरह मर गई है, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने कई बार उसके सिर पर पत्थर से प्रहार भी किए.

    मामले में पठानकोट की एक विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए मामले के मास्टरमाइंड सांझी राम, प्रवेश और दीपक खजूरिया को उम्रकैद की सजा सुनाई है और एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इन तीनों को मौत तक जेल में रहना होगा. वहीं तीनों पुलिसकर्मियों, जिन्होंने सबूत मिटाने में मदद की थी, उन्हें 5-5 साल कैद की सजा सुनाई गई है. साथ ही उन पर 50-50 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. लेकिन इस विशेष अदालत के जज ने सजा सुनाते हुए सबसे ऊपर एक शेर लिखा-
    पिन्हां था दाम-ए-सख़्त क़रीब आशियान के
    उड़ने न पाए थे कि गिरफ़्तार हम हुए

    क्या है इस शेर का मतलब
    इस शेर का मतलब है, 'घर के पास ही जंजीरें छिपी हुई थीं, जिससे हम उड़ने से पहले ही उनमें फंसकर बंदी बन गए.' यह शेर मिर्ज़ा ग़ालिब का है. दरअसल कठुआ मामले में जज ने फैसला सुनाने से पहले इस बात पर दुख जाहिर किया है कि कैसे एक छोटी चिड़िया अपनी पहली उड़ान भरने से पहले ही शिकारी के जाल में फंस गई.

    फैसला के पन्ने की तस्वीर जिस पर जज ने लिखा ये शेर


    इससे पहले अदालत ने 7 आरोपियों में से 6 को इस मामले में दोषी ठहराया था. इस मामले में चार्जशीट के मुताबिक रेप और मर्डर के इस मामले में देवीस्थान मंदिर (जहां बच्ची को छिपाया गया था) के पुजारी सांझी राम को मास्टरमाइंड बताया गया था. इसके अलावा विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया, सुरेंद्र वर्मा और उसके दोस्त परवेश कुमार उर्फ मन्नू, भतीजे राम किशोर और पुजारी के बेटे विशाल जंगोत्रा उर्फ शम्मा को आरोपी बनाया गया था. अदालत ने अपने फैसले में मंदिर के पुजारी सांझी राम के बेटे विशाल जंगोत्रा को आरोपमुक्त कर दिया है.

    क्या था पूरा मामला?
    मामले में दाखिल पुलिस चार्जशीट के मुताबिक इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता सांझी राम बकरवाल समुदाय के अपने इलाके में बसने के खिलाफ था. वह कई बार इस समुदाय को लेकर गांव के लोगों को भड़का चुका था. वह लोगों से कहता था कि इस समुदाय के लोग गो हत्या और ड्रग्स की तस्करी करते हैं और इनके यहां बसने से गांव के बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा. इसके अलावा उसने समुदाय के लोगों को भी धमकियां दी थीं. मामला इस हद तक बढ़ चुका था कि कई बार दोनों समुदाय एक दूसरे के खिलाफ स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायतें दर्ज करा चुके थे.

    इसी दौरान रची गई साजिश
    इसी दौरान सांझी राम ने बकरवाल समुदाय की इस बच्ची की साजिश रची और उसका अपहरण करने के बाद उसे एक मंदिर में ले गया. वहां उसे नशा देकर, एक सप्ताह में उसके साथ कई बार रेप किया गया. कई बार बच्ची को नशे की ओवरडोज भी दी गईं, जिससे वह कोमा में चली गई. यहां तक कि दोषियों ने उसे मारने से पहले भी उसके साथ रेप किया और बच्ची को मारने से पहले कहा कि रुको पहले रेप कर लेते हैं. रेप करने के बाद आरोपियों ने मिलकर बच्ची को मार दिया और बच्ची मर गई है, यह सुनिश्चित करने के लिए कई बार उसके सिर पर पत्थर से वार किया. इतना ही नहीं आरोपियों ने बच्ची की मौत को छिपाने के लिए पुलिसवालों को रिश्वत भी दी.

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    Tags: Gang Rape, Gangrape and murder, Jammu and kashmir, Kathua Rape, Kathua rape case

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