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संसद में हेमा मालिनी के साथ इसलिए नहीं बैठ पाएंगे सनी देओल

सनी देओल व हेमा मालिनी. फाइल फोटो.

सनी देओल व हेमा मालिनी. फाइल फोटो.

एक फॉर्मूला के तहत लोकसभा में बैठक व्यवस्था की जाती है और हर सांसद को तय नियमों के आधार पर बेंच का आवंटन होता है. लोकसभा चुनाव एवं शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के बाद 6 जून से सत्र शुरू हो सकता है.

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    बॉलीवुड की पूर्व स्टार और दो बार सांसद रह चुकीं हेमा मालिनी के बस में नहीं होगा कि वो संसद में अपने सौतेले बेटे सनी देओल के साथ बैठ सकें या संसद की कार्रवाई को लेकर सनी को कोई समझाइश दे सकें. दोनों ही भाजपा के टिकट पर चुने हुए सांसद हैं लेकिन दोनों को अलग और दूर-दूर बैठना होगा, जब संसद का सत्र 6 जून को शुरू होगा.

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    देश में हाल ही हुए आम चुनाव के बाद 17वीं लोकसभा का गठन होगा, जिसमें करीब 300 सांसद पहली बार संसद पहुंचेंगे, यानी नए चेहरे होंगे. सनी देओल इनमें से एक हैं, जो पहली बार सांसद चुने गए हैं. पहली बार सांसद चुने गए चेहरों में कुछ प्रमुख नाम गायक हंसराज हंस, क्रिकेटर गौतम गंभीर, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, अभिनेता रवि किशन, मिमी चक्रवर्ती और नुसरत जहां शामिल हैं.

    सीनियर सांसद और डेब्यू सांसद
    हालांकि ये सभी सांसद अपने पुराने पेशे में विशेषज्ञ या पुराने हो चुके हैं लेकिन आधिकारिक नियमों के हिसाब से वरिष्ठ सांसदों की तुलना में सभी नए सांसदों को संसद में पिछली सीटें ही मिलेंगी. उदाहरण के लिए हेमा मालिनी दूसरी सांसद चुनकर संसद में पहुंचेंगी इसलिए उन्हें बैठक व्यवस्था के अनुसार बीच की किसी बेंच पर जगह मिलेगी जबकि उनके सौतेले बेटे सनी देओल, चूंकि पहली बार संसद पहुंचेंगे इसलिए उन्हें बैकबेंचरों के साथ पीछे की तरफ बैठना होगा.

    गौरतलब है कि हेमा मालिनी मथुरा लोकसभा सीट से और देओल गुरदासपुर सीट से संसद पहुंचे हैं और दोनों ही भाजपा के सांसद हैं. उनके अलावा विवादों में​ घिर चुकीं भाजपा की पहली बार की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भी पीछे की तरफ ही किसी बेंच पर बैठना होगा. सांसद अनुराग ठाकुर भले ही इन डेब्यू कर रहे सांसदों से उम्र में छोटे हों, लेकिन चूंकि वो चौथी बार सांसद बने हैं, इसलिए उन्हें आगे की पंक्तियों में सीट मिलेगी.

    ये है बैठक व्यवस्था का फॉर्मूला
    एक फॉर्मूला के तहत सभी चुने गए सांसदों को संसद में सीट का आवंटन किया जाता है. इस फॉर्मूला के अनुसार ही स्पीकर के दाहिने तरफ सत्ता पक्ष के सांसद बैठते हैं जबकि विपक्ष के सांसदों को स्पीकर के बाएं तरफ की सीटें आवंटित की जाती हैं.

    सबसे आगे की बैठक पंक्ति प्रधानमंत्री सहित उनकी कैबिनेट के कुछ सदस्य और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के लिए आवंटित की जाती है. बाएं तरफ की सबसे पहली पंक्ति में नेता प्रतिपक्ष सहित विपक्ष की प्रमुख पार्टियों के वरिष्ठ नेता बैठते हैं.

    पहली बार चुने गए सांसदों के लिए सबसे पीछे बैठक व्यवस्था होती है, लेकिन अगर इनमें से किसी को कैबिनेट पोर्टफोलियो यानी कोई मंत्रालय मिलता है, तो बैठक व्यवस्था में बदलाव संभव होता है.

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