काजीरंगा में मिला भारत का अकेला 'गोल्डन टाइगर', हमारे लिए गर्व और चिंता दोनों की बात क्यों?

काजीरंगा में मिला भारत का अकेला 'गोल्डन टाइगर', हमारे लिए गर्व और चिंता दोनों की बात क्यों?
दुर्लभ गोल्डेन टाइगर की काजीरंगा में पाए जाने की तस्वीर वायरल हुई थी (फोटो- ट्विटर/ प्रवीण कसवान)

काजीरंगा पर्यावास (Kaziranga habitat) में मिला बाघ क्षेत्रीय व्यवहार के तरीके (territorial behavioural pattern) में बाकी दुनिया से अलग है क्योंकि इससे उनका अध्ययन (study) और भी रोचक और चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

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(निलोय भट्टाचार्जी)

गुवाहाटी (असम). कोविड-19 लॉकडाउन (Covid-19 Lockdown) के दौर में 'काज़ी 106एफ' (Kazi 106F) अपनी जबरदस्त दहाड़ के बजाए ट्वीट के चलते इन दिनों वायरल (Viral) हो रहा है. देश का एकमात्र गोल्डन टाइगर (Golden Tiger) बताया जाने वाला काज़ी 106F एक सोशल मीडिया सनसनी बनकर सामने आया है, जिसकी तस्वीर IFS अधिकारी प्रवीण कसवान ने ट्वीट की थी, जो वायरल हो गई. कसवान ने इस वायरल फोटो (Viral Photo) को ट्वीट करते हुए लिखा था, क्या आप जानते हैं, भारत में हमारे पास गोल्डन टाइगर भी है? जो कि इस बिग कैट (Big Cat) का 21वीं शताब्दी में धरती पर मिला एकमात्र साक्ष्य है."

इस एकमात्र धारीदार बाघ या स्ट्राबेरी बाघ की तस्वीरें, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर (Wildlife Photographer) मयूरेश हेंद्रे ने असम के विश्व विरासत घोषित काज़ीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) में ली थीं. शोध अधिकारी रबींद्र शर्मा के मुताबिक इस प्रसिद्ध नेशनल पार्क की एलीफैंट ग्रास के बीच बैठे इस गोल्डन टाइगर को लोकप्रिय रूप से काज़ी 106F के नाम से जाना जाता है. नेशनल पार्क में ऐसे चार बाघ हैं, सभी की तस्वीरें ली जा चुकी हैं. चिंतित शर्मा कहते हैं, इसे खोजा जाना कोई जश्न का मौका नहीं है, बल्कि जनसंख्या में गिरावट की गंभीर समस्याओं में से एक को रोकने के लिए बाघों की बिखरी हुई आबादी के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के बारे में विचार करने का हमारे लिए एक संकेत है, जिससे प्रजनन हो सके.”



पहली बार 2014 में ली गई थी इन गोल्डन टाइगर की तस्वीर
काज़ी 106F नाम की बाघिन का रंग हल्का पीला है, जिस पर काली धारियां हैं और पेट-मुंह पर ज्यादा सफेद बाल हैं. इन बातों का पता 2014 में तब चलता था, जब उसे ऑल इंडिया मॉनीटरिंग की प्रक्रिया की दौरान पहली बार देखा गया था. उसे 2015 में भी कैमरे में कैद किया गया था. 2016 में उसे एक और बाघ के साथ कैमरे में कैद किया गया. उसे हाल फिलहाल में फिर 2017 में कैमरे में कैद किया गया था. इस समय तक वह अपनी कम उम्र यानी 4-5 साल के पड़ाव को पार कर चुकी थी.

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दो अलग जीन की वजह से होता है पीला रंग और काली धारियां
न्यूज18 से बात करते हुए शर्मा ने कहा कि काजीरंगा पर्यावास में मिला बाघ क्षेत्रीय व्यवहार के तरीके में बाकी दुनिया से अलग है क्योंकि इससे उनका अध्ययन और भी रोचक और चुनौतीपूर्ण हो सकता है. उन्होंने व्याख्या करके बताया कि, बाघ का रंग (अन्य से अलग) हल्का पीला है, जिस पर काली धारियां हैं और पेट पर ज्यादा सफेद इलाका हैं.

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यह पीले रंग की पृष्ठभूमि को 'अगाउटी जीन' और उनके जेनेटिक तत्व के एक समूह के जरिए नियंत्रित किया जाता है और काले रंग की धारियों को 'टैबी जीन' और उनके जेनेटिक तत्व के जरिए नियंत्रित किया जाता है. इनमें से किसी भी जीन के कम होने से बाघ में रंग भिन्नता हो सकती है.
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