हनुमान टोक क्यों है सिक्किम में भारत चीन सीमा पर अहम कड़ी

सिक्किम का हनुमान टोक क्‍यों है सेना के लिए महत्‍वपूर्ण.
सिक्किम का हनुमान टोक क्‍यों है सेना के लिए महत्‍वपूर्ण.

India China Border Dispute: कंचनजंगा पर्वत श्रृंखला के पास होने की वजह से हनुमान टोक से चीन की गतिविधियों पर नजर रखने में सुरक्षाबलों को काफी ज्यादा मदद मिलती है. इसीलिए ये जगह बहुत महत्वपूर्ण है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 10:25 PM IST
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नई दिल्‍ली. सीमा विवाद के बीच सिक्किम (Sikkim) में भारत-चीन सीमा (India China Border) पर क्या हालात हैं. न्‍यूज 18 इंडिया देश का पहला न्‍यूज चैनल है जो सिक्किम में भारत चीन सीमा नाथुला के नजदीक हनुमान टोक पर पहुंचा. घने कोहरे के बीच मौसम की परवाह न करते हुए पास ही के गांव फोर्थ माइल के कुछ स्थानीय निवासी लगातार हनुमान टोक पोस्ट पर आर्मी की मदद करते हैं. स्थानीय निवासी ड्राइवर, खाने के सामान की सप्लाई व अन्य काम में सेना का सहयोग करते हैं. घने कोहरे के बीच सिक्किम के सेना का कवच बन रहे हैं. दरअसल, नाथुला जाते वक्त हनुमान टोक सेना की महत्वपूर्ण पोस्ट है, जहां से उनकी जरूरत का सारा सामान जाता है.

कंचनजंगा पर्वत श्रृंखला के पास होने की वजह से हनुमान टोक से चीन की गतिविधियों पर नजर रखने में सुरक्षाबलों को काफी ज्यादा मदद मिलती है. इसीलिए ये जगह बहुत महत्वपूर्ण है. सिक्किम के फोर्थ माइल गांव के लोग सेना की मदद के लिए लगातार तत्‍पर रहते हैं. ये लोग घने कोहरे के बीच अपने गांव से यहां आकर सेना की मदद कर रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि लद्दाख में चीन ने जो कोशिश की है सिक्किम में भी उसने ऐसा ही करने की कोशिश की थी. लेकिन, उसको भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया. सिक्किम में डोकलाम का प्रकरण इसका उदाहरण था. यहां के स्‍थानीय लोग हर परिस्थितियों में देश के जवानों और सीमा के साथ हैं.

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हनुमान टोक प्राचीन मंदिर है और पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक रामायण काल में जब लक्षणजी मूर्छित हुए थे तो हनुमान जी संजीवनी ले जाते वक्त यहां रुके थे, ये जगह नाथुला से करीब 40 किलोमीटर दूर है. ये जगह भारत-चीन सीमा के अंतिम सिविलियन पॉइंट्स में से एक है. आर्मी इस मंदिर के रखरखाव और सुरक्षा का जिम्मा संभालती है. ये जगह कंचनजंगा पर्वत श्रृंखला के पास है, जहां पर भारत चीन सीमा के महत्वपूर्ण पोस्ट हैं.
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