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150 साल से चला आ रहा असम-मिजोरम विवाद अब क्यों हो रहा है हिंसक?

मिजोरम की सीमा असम की बरक वैली तक है और दोनों राज्यों की सीमा बांग्लादेश को छूती है. आज दोनों राज्यों की सीमा करीब 165 किलोमीटर की है, इतिहास में झांके तो मालूम चलता है कि मिजोरम कभी असम का जिला हुआ करता था और इसे लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था.

मिजोरम की सीमा असम की बरक वैली तक है और दोनों राज्यों की सीमा बांग्लादेश को छूती है. आज दोनों राज्यों की सीमा करीब 165 किलोमीटर की है, इतिहास में झांके तो मालूम चलता है कि मिजोरम कभी असम का जिला हुआ करता था और इसे लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था.

मिजोरम की सीमा असम की बराक वैली तक है और दोनों राज्यों की सीमा बांग्लादेश को छूती है. आज दोनों राज्यों की सीमा करीब 165 किलोमीटर की है. इतिहास में झांके तो मालूम चलता है कि मिजोरम कभी असम का जिला हुआ करता था और इसे लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था. इनकी सीमाओं की हदें दो बार तय हुईं. पहली बार 1875 में और दूसरी बार 1933 में. विवाद की जड़ दूसरे वाले सीमांकन में है.

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    नई दिल्ली. सीमा को लेकर असम-मिजोरम का विवाद डेढ़ सदी पुराना है. उत्तर पूर्व के राज्यों के बीच विवादों का नाता नई बात नहीं है, लेकिन असम-मिजोरम के बीच के विवाद का हिंसा में बदलना चौंकाने वाला है. सोमवार को ये हिंसा इतना गहरा गई कि अंतरराज्यीय सीमा पर गोली तक चली और इसमें करीब 6 पुलिसवालों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए. आइए ज़रा इस विवाद के पिछले पन्नों को पलटते हैं और समझते हैं क्या है इस विवाद की जड़ में.

    मिजोरम की सीमा असम की बरीक वैली तक है और दोनों राज्यों की सीमा बांग्लादेश को छूती है. आज दोनों राज्यों की सीमा करीब 165 किलोमीटर की है, इतिहास में झांके तो मालूम चलता है कि मिजोरम कभी असम का जिला हुआ करता था और इसे लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था. इनकी सीमाओं की हदें दो बार तय हुईं. पहली बार 1875 और दूसरी बार 1933 में. विवाद की जड़ दूसरे वाले सीमांकन में है. 1875 का सीमांकन, उसी साल 20 अगस्त को किया गया. इसे बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेग्यूलेशन (बीईएफआर) 1873 के तहत किया गया था. इसने लुशाई हिल्स को असम की बराक घाटी में कछार के मैदानी इलाकों से अलग किया था. ये पूरी प्रक्रिया मिजो प्रमुख को संज्ञान में लेकर की गई थी.

    दो साल बाद गजट में यही इनर लाइन फॉरेस्ट रिज़र्व के सीमांकन का आधार भी बना. बाद में 1933 में लुशाई हिल्स और मणिपुर के बीच सीमारेखा खींची गई, इससे लुशाई हिल्स, कछार जिले और मणिपुर के बीच एक ट्राइ-जंक्शन की शुरुआत हुई. मिजो लोगों ने इस सीमांकन को मानने से इनकार कर दिया क्योंकि इस बार उनके प्रमुख से सीमांकन से पहले कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया.

    मिजोरम की नज़र में कौन सी सीमा सही?
    मिजो नेताओं के मुताबिक बीईएफआर अधिनियम के तहत कछार के दक्षिण सीमा पर 1875 की इनर लाइन का सीमांकन ही स्वीकार्य है (इसमें 1878 में संशोधन किया गया था क्योंकि इसमें असम के मैदानी इलाकों से लुशाई हिल्स की सीमा का सीमांकन करने की मांग की गई थी). मिजोरम के राजनीतिक दलों, एनजीओ और संयुक्त कार्यवाही समिति ने सीमा मुद्दे पर 2018 में एक मेमोरेंडम तैयार करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा था. जिसमें लिखा गया है कि वर्तमान की कथित सीमा 1930 और 1933 में बगैर लुशाई हिल्स के लोगों और वहां के योग्य आधिकारिक संगठनों के मशविरे के मनमाने ढंग से तय की गई थी. इस वजह से लुशाई के बसे बसाए इलाकों जैसे कछार जियोन, तलंगनुम, लाला बाज़ार और बंगा बाज़ार के लोगों को छोड़कर अनुचित रूप से रहना पड़ रहा है.

    मेमोरेंडम में लिखा गया है कि मिजो लोगों को एक काल्पनिक लकीर के ज़रिए 1875 की इनर लाइन के दक्षिण की तरफ आगे और आगे धकेला गया और बाहर से आकर बसे लोग (खासकर बांग्लादेशी) जिन्हें ब्रितानी लेकर आए थे, उनकी सहूलियत के लिए मिजो लोगों को हल्के ढालू और मैदानी इलाकों से वंचित किया गया. दरअसल मेमोरेंडम के मुताबिक ये उस दौर का कानून है जब बांग्लादेश बना भी नहीं था.

    विवाद में कब घुली कड़वाहट?
    विवाद तब से ही पनप रहा था, जब 1972 में मिजोरम केंद्र शासित प्रदेश बना और फिर 1980 में राज्य घोषित हुआ. दोनों राज्यों ने सीमाओं पर नो-मेन्स लैंड की यथास्थिति बरकरार रखेंगे इस सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किए थे. लेकिन दशकों से इसका उल्लघंन होता रहा है और पिछले कुछ महीनों में झ़ड़प लगातार चल रही थी. असम का दावा है कि उसकी सीमाओं पर अतिक्रमण किया जा रहा है. वहीं मिजोरम का कहना है कि असम उनके क्षेत्र में लगातार हस्तक्षेप कर रहा है. पिछले साल जून में मिजोरम ने आरोप लगाया कि असम के अधिकारी ममित जिले में आए और कुछ खेतों में भी गए. वहीं कुछ अपराधी कोलासिब जिले में भी घुसे और खेतों में बने दो झोंपड़े भी जला दिए. साथ ही असम के अधिकारी वैरेंगटे (मिजोरम) और लैलापुर (असम) की सीमा पर सीआरपीएफ की चौकी को पार करके भी अंदर आए थे. मिजोरम का दावा है कि मिजोरम के बुरचेप गांव में असम और मिजोरम के अधिकारियों ने कुछ निर्माण काम किया है और गृह मंत्रालय इस मुद्दे से अवगत है.

    पिछले अक्टूबर में, असम पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर मिजोरम में सैहापुई वी का दौरा किया और अंतर-राज्यीय राजमार्ग को अवरुद्ध करने की धमकी दी थी. इसी महीने के अंत में कुछ लोगों ने असम के लैलापुर में दोनों राज्यों को जोड़ने वाले अंतर-राज्यीय राजमार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया था. नवंबर में मिजोरम के अपर फेनुअम लोअर प्राथमिक विद्यालय में बम विस्फोट हुए थे. दोनों राज्यों के बीच शांति बैठक भी हुई थी. हाल के महीनों में कई झोंपड़े और छोटी दुकानें इस हिंसा की चपेट में आ चुकी हैं. वहीं लैलापुर औऱ वैरांगटे गांव के लोगों के बीच और करीमगंज (असम) और मैमुत (मिजोरम) के लोगों के बीच भी झड़प देखने को मिली.

    असम-मिजोरम विवाद- आखिर क्यों हुआ हिंसक
    सोमवार को वैरांगटे ऑटोरिक्शा स्टैंड पर डीसी, एसपी, और कछार डीएफओ के साथ आईजीपी असम पुलिस के नेतृत्व में करीब 200 पुलिसकर्मी पहुंचे. असम का तर्क था कि वो मामले को सुलझाने के लिए वहां पहुंचे थे. वहीं मिजोरम का कहना था कि वे लोग सुरक्षा चौकियों पर कब्जा जमाने के लिए जबरन घुस आए थे. उनका यह भी कहना था एक व्यक्ति ने ना सिर्फ सीआरपीएफ की चौकी को पार किया बल्कि असम पुलिस ने वैरांगटे और लैलापुर राजमार्ग पर चलने वाले कई वाहनों के साथ भी तोड़फोड़ की. वहीं असम गृहमंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि मिजोरम ने यथास्थिति बरकरार रखने वाले करार का उल्लंघन करते हुए असम की रेंगती बस्ती की ओर सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया था. और लैलापुर में इनर लाइन रिज़र्व फॉरेस्ट को भी तबाह किया जा रहा है. साथ ही मिजोरम ने सीआरपीएफ कैंप के बगल में अपना सशस्त्र बल का कैंप भी वहां लगाया है. असम के पुलिसकर्मी और पुलिस अधिकारी उसी बात का मुआयना करने पहुंचे थे. ना कि वे मिजोरम के साथ यथास्थिति बरकरार रखने की सहमति में हस्तक्षेप करने गए थे.

    बात कहां तक पहुंची?
    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप करते हुए उत्तरपूर्व के मुख्यमंत्रियों के साथ शिलांग में गुप्तवार्ता की और अंतर-राज्यीय विवाद और दूसरे विवादों पर चर्चा की. दोनों ही राज्य अपने बलों को पीछे करने को राजी हो गए हैं. मिजोरम ने अपने बयान में कहा कि असम के साथ सीमा विवाद शांति और आपसी समझ के माहौल में सुलझाया जाना चाहिए. उन्होंने असम को इसके लिए अनुकूल माहौल बनाने की गुज़ारिश भी की. वहीं असम ने मिजोरम से अपने लोगों और पुलिस कर्मियों को प्रचंड हिसा में शामिल होने से रोकने के लिए और शांति बहाल करने के लिए कहा. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मिजोरम में कोई भी हताहत नहीं हुआ यही इस बात का सबूत है कि असम पुलिस ने कितनी शांति के साथ काम किया. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और मिजोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा ने एक दूसरे से शांति स्थापित करने की बात करते हुए अपने ट्वीट में एक दूसरे को टैग भी किया. वहीं कुछ दिनों पहले दोनों के बीच ट्विटर पर घमासान देखने को मिला था.

    और कौन से सीमा विवाद है?
    असम सभी उत्तरपूर्वी राज्यों के साथ सीमा साझा करता है. उनमें से नागालैंड, मेघालय और मिजोरम इसी में से निकले हैं. इनका अपने पड़ोसियों से हमेशा विवाद रहा है. असम और नागालैंड 500 किमी सीमा साझा करते हैं. यहां भी कई हिंसक झड़प देखने को मिली हैं और इसमें कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है. ये विवाद 1965 से जारी हैं. मनोहर पर्रिकर इन्स्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज ने 2008 में इन विवादों पर एक पेपर प्रकाशित किया था. वहीं अरुणाचल प्रदेश असम के साथ 800 किलोमीटर सीमा साझा करता है. यहां पहली बार 1992 में झड़प देखने को मिली थी. हर एक राज्य, दूसरे राज्य पर आपराधिक गतिविधियों और अतिक्रमण करने का आरोप लगाता है. ये मामले सुप्रीम कोर्ट में हैं. इसी तरह मेघालय असम के साथ 884 किलोमीटर सीमा साझा करता है. यहां भी हाल में झड़प हुई थी.

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