लाइव टीवी

डिजिटल प्राइम टाइम: आखिर कांग्रेस में क्यों बढ़ रही है इतनी गुटबाजी?

Anil Rai | News18Hindi
Updated: February 17, 2020, 8:55 PM IST
डिजिटल प्राइम टाइम: आखिर कांग्रेस में क्यों बढ़ रही है इतनी गुटबाजी?
कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी के बाद भी अभी तक शीर्ष नेताओं ने कोई एक्शन नहीं लिया है. (फाइल फोटो)

क्या दिल्ली और देश के दूसरे राज्यों में कांग्रेस (Congress) में पनप रही गुटबाजी कांग्रेस के पतन का कारण बन रही है? क्या कांग्रेस आलाकमान के पास इसका वाकई कोई तोड़ नहीं है? पढ़िए पूरा विश्लेषण

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 17, 2020, 8:55 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. दिल्ली चुनाव (Delhi Assembly Election) के बाद कांग्रेस में शुरू हुआ बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा. वैसे तो दिल्ली में कांग्रेस की जैसी हार हुई है उसके बाद पार्टी को मंथन करना चाहिए और हार के कारण तलाशने चाहिए. क्योंकि जिस दिल्ली में काग्रेस ने 15 साल तक सरकार चलाई आज उसी दिल्ली में 5 सीटों पर भी अपनी जमानत नहीं बचा पाई. लेकिन इस आत्ममंथन के दौर में कांग्रेस के नेता एक दूसरे पर हमला करने में जुटे हुए हैं.

पी चिदंबरम और शर्मिष्ठा मुखर्जी के बीच शुरू हुआ टि्वटर वॉर अब मुंबई बनाम दिल्ली कांग्रेस हो गया है. मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा और दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन अब आमने-सामने हैं. मिलिंद देवड़ा ने आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक विडियो जारी कर बधाई क्या दी अजय माकन ने उनसे आम आदमी पार्टी में जाने का सवाल ही पूछ लिया.

हर राज्य में कांग्रेस में हैं कई गुट
लेकिन लड़ाई सिर्फ दिल्ली में ही नहीं है. मध्य प्रदेश में भी सिंधिया गुट और कमलनाथ गुट में 36 का आंकड़ा है. हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन की बात करते हैं और कमलनाथ जवाब में उनको मनाने की बजाय धरना प्रदर्शन जारी रखने का सलाह देते हैं. कुछ यही हाल पंजाब का भी है. पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब कांग्रेस के दिग्गज नेता नवजोत सिंह सिद्धू के बीच के राजनीतिक समीकरण किसी से छुपे नहीं हैं. गाहे-बगाहे दोनों नेता एक दूसरे के खिलाफ हमलावर होते रहते हैं.



राजस्थान में भी सचिन पायलट और अशोक गहलोत अक्सर आमने-सामने आ जाते हैं. उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कटघरे में खड़ा करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते. साफ है कि कांग्रेस में अंतर्कलह हर राज्य में है चाहे पार्टी सत्ता में हो, या सत्ता से बाहर. बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में भी जहां पार्टी अपना वजूद बचाने की कोशिश कर रही हो.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की बंपर जीत के बाद कांग्रेस नेता अजय माकन और मिलिंद देवड़ा के बीच ट्विटर वॉर शुरू हो गया है.


लोकसभा चुनाव के पहले से कांग्रेस नेता कर रहे हैं AAP की वकालत
बात करें दिल्ली की तो लोकसभा चुनाव से ही पार्टी में गुटबाजी चरम पर है. लोकसभा चुनाव में जहां पार्टी का एक धड़ा आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कर रहा था, वहीं दूसरा धड़ा अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहा था.

साफ है आम आदमी पार्टी सरकार के पक्ष में भले ही कांग्रेस नेता आज खुल कर बोल रहे हों लेकिन पार्टी का एक बड़ा धड़ा लंबे समय से केजरीवाल के साथ जाने की वकालत कर रहा है और अब जब कांग्रेसी एकदम हासिए पर पहुंच गई है और केजरीवाल ने 70 में से 62 सीटें जीतकर राजनीति में नया एजेंडा सेट किया है, तो कांग्रेस का वही धड़ा जो लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ जाना चाहता था वह खुल कर बोल रहा है और अरविंद केजरीवाल की तारीफ कर रहा है.

हर राज्य में गुटबाजी की अपनी-अपनी वजह
मध्य प्रदेश की बात करें तो ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट आने वाले राज्यसभा चुनाव के पहले अपने आप को मजबूत दिखाना चाहता है. ऐसा पहली बार हुआ है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया किसी सदन के सदस्य नहीं है ऐसे में उनकी नजर राज्यसभा सीट पर होना लाजमी है. क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें उनका गुट मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री देखना चाहता था लेकिन आलाकमान के आगे उनकी एक न चली. राजस्थान में भी सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने के सपने पर दिल्ली ने पानी फेर दिया.

मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कमलनाथ सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतना का ऐलान कर चुके हैं. (फाइल फोटो)


क्या कमजोर पड़ गया है कांग्रेस नेतृत्व?
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और दिल्ली में बैठे आला नेताओं को पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी दिख नहीं रही है या हालात ऐसे हो गए हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष समेत दिल्ली में बैठे कांग्रेस के दिग्गज नेता इन हालातों को संभाल नहीं पा रहे हैं. वर्तमान हालात और आंकड़े बता रहे हैं कि कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है. पार्टी एक के बाद एक राज्य में अपना जनाधार खोती जा रही है. ऐसे में सवाल है राष्ट्रीय अध्यक्ष के सिर्फ एक इशारे पर मुख्यमंत्री तक बदल देने वाली कांग्रेस लगातार कई राज्यों में दो गुटों में बंटी अपनी पार्टी को एक साथ क्यों नहीं ला पा रही है.

ये है गुटबाजी की असली वजह
जानकारों की मानें तो इसके पीछे पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली ही असली वजह है. पार्टी में जनाधार वाले नेताओं की बजाय उन नेताओं का को पद दिया गया जो केंद्रीय नेतृत्व के करीब हैं लेकिन धरातल पर उनके पास अपना वोट बैंक नहीं है. ऐसे में भले ही केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा पाकर पार्टी के ये नेता संगठन और सरकार में मुख्य पदों पर बैठ गए हों लेकिन जमीन पर उनकी पकड़ वो नहीं है जो उनके खिलाफ बोलने वाले नेताओं की है. जो नेता पार्टी नेताओं के खिलाफ बोल रहे हैं उनका अपना जनाधार है. ऐसे में कुछ गिने-चुने व्यक्तियों के खिलाफ बोलने वाले इन नेताओं के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई की जाती है तो रहा सहा जनाधार भी खिसक सकता है, जो फिलहाल पार्टी के पास है. यही बड़ा कारण है कि पार्टी उन नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं कर पा रही है जो लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जिसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जा सकता है.

ये भी पढ़ें:- 

शादी के 7 दिन बाद पति को कमरे में बंद कर भागी नवेली दुल्हन ने प्रेमी से रचाई शादी

73 का दूल्हा, 67 की दुल्हन! लिव इन रिलेशनशिप में रहे 50 साल, अब बच्चों ने करवाई शादी

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 17, 2020, 8:55 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर