सोमवार सुबह 2.51 पर क्या हुआ था, जब रोकनी पड़ी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग- जानें ISRO के अंदर का हाल

चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग का सोमवार को पूरा देश बेसब्री से इंतजार कर रहा था. ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि आखिर ऐन वक्त पर इसरो में ऐसा क्या हुआ, जिससे इसकी लॉन्चिंग रोकनी पड़ी?

News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 9:28 AM IST
सोमवार सुबह 2.51 पर क्या हुआ था, जब रोकनी पड़ी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग- जानें ISRO के अंदर का हाल
चंद्रयान-2 का वज़न 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वजन के लगभग बराबर है.
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Updated: July 16, 2019, 9:28 AM IST
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के दूसरे मून मिशन Chandrayaan-2 की लॉन्चिंग को ठीक एक घंटे पहले रोक दिया गया. चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को तड़के 2.51 बजे देश के सबसे ताकतवर रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च किया जाना था, लेकिन लॉन्चिंग के 56.24 मिनट पहले इसके रॉकेट में कुछ टेक्निकल फॉल्ट हो गया. ऐसे में लॉन्चिंग का काउंटडाउन रोक दिया गया. इसरो के प्रवक्ता बीआर गुरुप्रसाद ने बताया कि GSLV-MK3 लॉन्च व्हीकल (रॉकेट) में खामी आने की वजह से लॉन्चिंग रोक दी गई. लॉन्चिंग की अगली तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी.

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चंद्रयान-2 लॉन्चिंग की तारीख बदलने के फैसले पर डीआरडीओ के पूर्व साइंटिस्ट रवि गुप्ता ने कहा, “एक स्पेसक्राफ्ट में कई जटिल पार्ट्स होते हैं. इन्हें साथ जोड़ने और लॉन्च के लिए तैयार करने में करीब 50 दिन का समय लगता है. अब जब यह फैसला किया गया है कि इंजन में गड़बड़ थी, तो इसके पुर्जे अलग किए जाएंगे और उनपर दोबारा काम होगा. समस्या सुलझाने के बाद इसके कंप्यूटर टेस्ट्स होंगे. इसके बाद ही लॉन्च की नई तारीख सामने आएगी.”

लॉन्चिंग से करीब 56.24 मिनट पहले इसरो ने मीडिया सेंटर और विजिटर गैलरी में लाइव स्क्रीनिंग रोक दी.


चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग का सोमवार को पूरा देश बेसब्री से इंतजार कर रहा था. ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि आखिर ऐन वक्त पर इसरो में ऐसा क्या हुआ, जिससे इसकी लॉन्चिंग रोकनी पड़ी?

लॉन्चिंग से पहले क्या हुआ था इसरो में?
दरअसल, लॉन्चिंग से करीब 56.24 मिनट पहले इसरो ने मीडिया सेंटर और विजिटर गैलरी में लाइव स्क्रीनिंग रोक दी. जिस समय लॉन्चिंग रोकी गई, उस समय काउंटडाउन का आखिरी चरण में था. इसरो से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कुछ मिनट पहले ही रॉकेट के क्रायोजेनिक इंजन में लिक्विड हाइड्रोजन भरा गया था. इसकी वजह से क्रायोजेनिक इंजन और चंद्रयान-2 को जोड़ने वाले लॉन्च व्हीकल में प्रेशर लीकेज हो गया.
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इसरो के सूत्रों ने बताया कि ये लीकेज तय सीमा पर स्थिर नहीं हो रहा था. लॉन्च के लिए जितना प्रेशर होना चाहिए, उतना नहीं था. ये प्रेशर लगातार घटता जा रहा था. इसलिए इस इसरो के मून मिशन चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग को ऐन वक्त पर टाल दिया.

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वैज्ञानिकों की 11 साल की मेहनत को लगा झटका
चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग ऐन वक्त पर रुकने से इसरो वैज्ञानिकों की 11 साल की मेहनत को छोटा सा झटका लगा है. हालांकि, इसरो वैज्ञानिकों के द्वारा आखिरी पलों में इस बड़ी तकनीकी खामी को खोज बड़ा कदम है. अगर इस कमी के साथ रॉकेट छूटता, तो बड़ा हादसा हो सकता था. यह वैज्ञानिकों की महारत है कि उन्होंने गलती खोज ली.

चंद्रयान-1 का सेकेंड एडिशन है चंद्रयान-2
चंद्रयान-2 वास्तव में चंद्रयान-1 मिशन का ही नया एडिशन है. इसमें ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं. चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था. चंद्रयान-2 के जरिए भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर उतारेगा. यह लैंडिंग चांद के साउथ पोल पर होगी. इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्पेसक्राफ्ट उतारने वाला पहला देश बन जाएगा.

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चंद्रयान 2 चंद्रमा के ऐसे हिस्से पर पहुंचेगा, जहां आज तक किसी अभियान में नहीं जाया गया.


चंद्रयान-2 की खासियत

- चंद्रयान-2 का वज़न 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वजन के लगभग बराबर है.
- इसमें 13 भारतीय पेलोड में 8 ऑर्बिटर, 3 लैंडर और 2 रोवर होंगे. इसके अलावा NASA का एक पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा.
- चंद्रयान 2 चंद्रमा के ऐसे हिस्से पर पहुंचेगा, जहां आज तक किसी अभियान में नहीं जाया गया.
- यह भविष्य के मिशनों के लिए सॉफ्ट लैंडिंग का उदाहरण बनेगा.
- भारत चंद्रमा के धुर दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने जा रहा है, जहां पहुंचने की कोशिश आज तक कभी किसी देश ने नहीं की.
- चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले जा रहा है.

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First published: July 16, 2019, 9:10 AM IST
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