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कोरोना केस हुए कम फिर भी केरल में डेथ रेट क्यों है ज्यादा, जानें असली वजह

केरल में कोरोना के मामले कम हो रहे हैं लेकिन डेथ रेट अभी कम नहीं हो रहा है. (सांकेतिक तस्वीर-AP)

केरल में कोरोना के मामले कम हो रहे हैं लेकिन डेथ रेट अभी कम नहीं हो रहा है. (सांकेतिक तस्वीर-AP)

कोरोना की दूसरी लहर (Covid Second Wave) का कहर झेल रहे केरल (Kerala) में अब एक्टिव केस होने लगे हैं. महामारी की संक्रामक क्षमता प्रदर्शित करने वाला R-वैल्यू भी अब 1 से कम हो चुका है. लेकिन फिर भी राज्य में कोरोना डेथ रेट (Death Rate) उस अनुपात में नहीं कम हुआ है.

  • News18Hindi
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    तिरुवनंतपुरम. केरल में कोहराम मचाने के बाद अब कोरोना के नए मामलों (New Covid Cases) की संख्या कम हो रही है. राज्य में महामारी के एक्टिव केस (Active Cases) की संख्या अब करीब 90 हजार हो गई है. महामारी की संक्रामक क्षमता प्रदर्शित करने वाला R-वैल्यू भी अब 1 से कम हो चुका है. लेकिन फिर भी राज्य में कोरोना डेथ रेट उस अनुपात में नहीं कम हुआ है. अब भी राज्य में हर रोज महामारी के कारण 100 से 200 लोग दम तोड़ रहे हैं. सितंबर महीने में अब तक 3109 लोगों ने कोरोना की वजह से जान गंवाई है. कुल मृतकों की संख्या तकरीबन 24 हजार है.

    अगर कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े पर गौर करें तो 74 प्रतिशत जान गंवाने वाले 60 से अधिक उम्र के हैं. 21 प्रतिशत 41 से 59 के आयुवर्ग में हैं. वहीं 18 से 40 की उम्र वाले 4 प्रतिशत हैं.राजधानी तिरुवनंतपुरम कुल मौतों के आंकड़े और केस फैटलिटी रेट के मामले में सबसे ऊपर है.

    80 फीसदी मौतें बीते 6 महीने के दौरान
    आंकड़े ये भी बताते हैं कि महामारी के आउटब्रेक के बाद से अब तक हुई कुल मौतों में 80 फीसदी बीते 6 महीने के दौरान ही हुई हैं. इसे महामारी की प्रचंड दूसरी लहर से जोड़कर देखा जा रहा है. अगर कुल संख्या की बात करें तो 1 अप्रैल से 20 सितंबर के बीच 19276 लोगों ने जान गंवाई है.

    क्या कहते हैं एक्सपर्ट
    सितंबर महीने के बीते तीन सप्ताह में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ा है. इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक केरल में महामारी की स्थिति को नजदीक से देख रहे एक्सपर्ट अरुण एनएम का कहना है- सामान्य तौर पर एक्टिव केस की संख्या कम होने और मौतों की संख्या कम होने के बीच 15 दिन का गैप होता है.

    वैक्सीनेशन को लेकर हिचकिचाहट है वजह!
    अगर डॉक्टर अरुण एनएम की मानें तो एक्टिव केस की संख्या हाल ही में घटना शुरू हुई है और डेथ रेट कम होने में कुछ और समय लग सकता है. इसके अलावा वैक्सीनेशन को लेकर हिचकिचाहट को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है. डॉ. अरुण के मुताबिक-ऐसे ढेर सारे केस आए हैं जिन्होंने वैक्सीन का एक भी डोज नहीं लगवाया.

    ‘मौतों के आंकड़े सही से तरीके दर्ज नहीं हुए’
    वो ये भी कहते हैं कि दूसरी लहर के पीक महीनों के दौरान राज्य में मौतों की संख्या सही तरीके से नहीं दर्ज की गईं. उदाहरण के तौर पर मई महीने में 3507 मौतें दर्ज हुईं लेकिन डॉ. अरुण कहते हैं कि ये संख्या 10 हजार तक हो सकती है. अगर मृतकों की संख्या तब सही तरीके से दर्ज की गई होती तो उसके मुताबिक अभी के मामले ढलान पर हैं.

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